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जेट एयरवेज संकट: 30-50 फीसदी कम सैलरी पर स्पाइसेट ज्वाइन कर रहे पायलट-इंजीनियर

आर्थिक संकट से जूझ रहे जेट एयरवेज के पायलटों और इंजीनियरों ने 30-50 फीसदी कम वेतन स्पाइसजेट को ज्वॉइन करना शुरू कर दिया है. स्पाइसजेट इन दिनों पायलटों-इंजीनियरों की भर्ती कर रही है और वह जेट एयरवेज के कर्मियों को 30-50 फीसदी कम वेतन पर कंपनी में ले रही है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 15 April 2019
जेट एयरवेज संकट: 30-50 फीसदी कम सैलरी पर स्पाइसेट ज्वाइन कर रहे पायलट-इंजीनियर जेट एयरवेज का विमान (फाइल फोटो- इंडियाटुडे आर्काइव)

जेट एयरवेज का आर्थिक संकट उसके कर्मचारियों के लिए कई मुश्किलें लेकर आया है. उसके कर्मी कम वेतन पर ही स्पाइसजेट को ज्वॉइन करने को मजबूर हैं. जेट के पायलटों और इंजीनियरों ने 30-50 फीसदी कम वेतन स्पाइसजेट को ज्वॉइन करना शुरू कर दिया है. स्पाइसजेट इन दिनों पायलटों-इंजीनियरों की भर्ती कर रही है और वह जेट एयरवेज के कर्मियों को 30-50 फीसदी कम वेतन पर कंपनी में ले रही है. बता दें कि कर्ज और घाटे की वजह से जेट एयरवेज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है. एयरलाइन ने करीब 90 फीसदी उड़ानें रद्द कर दी है.

पायलटों को 25-30%, इंजीनियरों को 50% कम वेतन

उद्योग सूत्रों ने कहा कि जेट के पायलटों से कहा गया है कि वे 25-30 फीसदी कम सैलरी पर ज्वॉइन कर सकते हैं. वहीं इंजीनियरों को कहा गया है कि वे 50 फीसदी कम सैलरी पर कंपनी में शामिल हो सकते हैं.

उद्योग के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, 'जेट कंपनी के बंद होने की आशंका की वजह से पेशेवर सैलरी कट लेने के लिए राजी हो रहे हैं. लेकिन जेट एयरवेज में औसत वेतन भी उद्योग में उपलब्ध वेतन से हमेशा बेहतर रहा है.'

जेट एयरवेज के हालात सुधरने की आस

जेट एयरवेज के कर्मचारिओं को अभी अपनी कंपनी के आर्थिक हालात सुधरने की आस है. एक सीनियर एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस इंजीनियर ने कहा कि उसके पास डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति माह वेतन पैकेज का प्रस्ताव है, जबकि वर्तमान में जेट एयरवेज में उसका सीटीसी चार लाख रुपये प्रति माह है. उसने कहा कि यह बहुत कम वेतन है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि जेट एयरवेज को कोई निवेशक मिलेगा और हमारा वेतन सुरक्षित रहेगा.

स्पाइसजेट के एक कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन वही वेतनमान प्रस्तावित कर रही है, जो यहां प्रभावी है.

जेट एयरवेज संकट, मुश्किल में कर्मचारी

जेट एयरवेज से जुड़े एक सीनियर कमांडर ने कहा कि जो पायलट 4-5 साल अनुभव वाले हैं, वे दूसरे एयरलाइन में जा रहे हैं, क्योंकि जेट में वे वेतन में देरी  की वजह से तकलीफ में हैं. उन्होंने कहा, 'वे होमलोन ले चुके हैं और कई अन्य खर्चे भी हैं. ऐसे में उन्हें इनके भुगतान के लिए समय पर वेतन चाहिए. अभी तक ज्यादातर सीनियर पायलट जेट एयरवेज के साथ बने हुए हैं. वे स्पाइसजेट, इंडिगो या एयर इंडिया में नहीं जा रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि कंपनी बदलने से उनकी वरिष्ठता सूची और वेतन प्रभावित हो सकता है. वे 3-5 साल का बांड नहीं भरना चाहते हैं.'

सीनियर पायलटों ने कहा कि कई सारे को-पायलट जिन्हें पर्याप्त अनुभव नहीं है, वे आमतौर पर 2.9 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन जेट एयरवेज में पाते थे. वे अब दूसरी एयरलाइन में दो लाख रुपये से कम पर भी ज्वॉइन करने पर तैयार हैं.

जेट एयरवेज के अलावा देश में स्पाइसजेट और एयर इंडिया एक्सप्रेस ही बोइंग का संचालन करती हैं. जो कंपनियां बोइंग का संचालन ना कर एयरबस का संचालन करती हैं, वे इन पायलटों और इंजीनियरों को लेने से हिचक रही हैं, क्योंकि उन्हें ट्रेनिंग देने में तीन से छह महीने का वक्त लगता है. वे इस दौरान की सैलरी को फलदायी नहीं मानती हैं.

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