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इसरो के वर्ल्ड रिकॉर्ड में ये तकनीकी पेंच भी न भूलें!

इससे पहले 2014 में रूस ने एक साथ 37 तो अमेरिका ने 33 सैटेलाइट लॉन्च किए थे. लेकिन क्या वाकई भारत इस मामले में रूस और अमेरिका से आगे निकल गया है. अगर तथ्यों पर ध्यान से नजर डालें तो जवाब मिलता है...

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 15 February 2017
इसरो के वर्ल्ड रिकॉर्ड में ये तकनीकी पेंच भी न भूलें! इसरो के सैटेलाइट विश्व रिकॉर्ड में ये तकनीकि पेंच

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने बुधवार सुबह एक साथ 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक उनकी कक्षा में स्थापित कर इतिहास रच दिया. इतिहास इसलिए क्योंकि भारत एक साथ इतने उपग्रह प्रक्षेपित करने वाला पहला देश बन गया है. इससे पहले 2014 में रूस ने एक साथ 37 तो अमेरिका ने 33 सैटेलाइट लॉन्च किए थे. लेकिन क्या वाकई भारत इस मामले में रूस और अमेरिका से आगे निकल गया है. अगर तथ्यों पर ध्यान से नजर डालें तो जवाब मिलता है नहीं!

104 नहीं, 125 सैटेलाइट भेज सकता था इसरो
इसरो ने अपने पोलर सैटेलाइट लॉन्च वीह्कल (पीएसएलवी- सी37) की मदद से एक साथ 104 सैटेलाइट लांच कर दिए लेकिन पीएसएलवी की इस उड़ान में इसरो द्वारा लांच सैटेलाइटों की संख्या 125 तक बढ़ाई जा सकती थी क्योंकि पीएसएलवी की कुल पेलोड क्षमता 1500 किलोग्राम है जबकि इस बार उसपर सिर्फ 1360 किलोग्राम भार लोड किया गया था.

104 में से 101 नैनो-सैटेलाइट थे
रूस और अमेरिका की रिकॉर्ड बनाने वाली स्पेस उड़ान में लांच सभी 37 और 33 सैटेलाइट शुद्ध रूप से सैटेलाइट थीं. जबकि इसरो के पीएसएलवी में महज 3 पूर्ण सैटेलाइट थीं और 101 नैनो-सैटेलाइट को जगह दी गई थी. ये सभी नैनो-सैटेलाइट 10 किलोग्राम पेलोड से कम वजन के थे. रूस द्वारा भेजे गए सैटेलाइटों में सबसे हल्का सैटेलाइट भी 80 किलोग्राम वजन का था.

इसरो के इस कीर्तिमान की अहम बातें
इसरो का कीर्तिमान नैनो और माइक्रो सैटेलाइट को लॉच करने की दिशा में बेहद अहम है. इस लांच में इसरो ने अमेरिका सहित कई बड़े-छोटे देशों के लिए नैनो सैटेलाइट को लांच करने का काम किया है. अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम नासा का अनुमान है कि अगले 10 साल में दुनियाभर से कम से कम 3000 नैनो और माइक्रो सैटेलाइट लांच करने का काम किया जाएगा. वहीं तीन साल में नैनो-माइक्रो सैटेलाइट का लांच मार्केट लगभग 3 बिलियन डॉलर का हो जाएगा. मौजूदा पीएसएलवी उड़ान से इसरो ने कई देशों की छोटी सैटेलाइट लांच करके अपने खर्च को कम करने में बड़ी सफलता पाई है. वहीं अगले कुछ साल नैनो और माइक्रो सैटलाइट लांच के जरिए इसरो की कमाई का बड़ा श्रोत बन सकते हैं.

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