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GST लागू होने के बाद कंपनियों के 50,000 करोड़ दो महीने तक फंसे रहेंगे

इसमें कहा गया है कि इस तरह के बड़े बदलाव के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए नकदी की आवश्यकता की जरूरत होगी. साथ ही लघु अवधि के वित्त की जरूरत को पूरा करने के लिए भी इसकी आवश्यकता होगी.

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केशवानंद धर दुबे/ BHASHA मुंबई, 20 June 2017
GST लागू होने के बाद कंपनियों के 50,000 करोड़ दो महीने तक फंसे रहेंगे प्रतीकात्मक फोटो

घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि शुरआती चरण में जीएसटी की ओर बदलाव से कंपनियों का कार्यशील पूंजी का चक्र प्रभावित होगा. ऐसे में कम से कम दो से चार महीने तक आसानी से उपलब्ध नकदी की जरूरत होगी.

इसमें कहा गया है कि इस तरह के बड़े बदलाव के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए नकदी की आवश्यकता की जरूरत होगी. साथ ही लघु अवधि के वित्त की जरूरत को पूरा करने के लिए भी इसकी आवश्यकता होगी. करीब 11,000 कंपनियों पर किए गए अध्ययन के अनुसार इससे एक लाख करोड़ रूपये का इनपुट क्रेडिट फंस जाएगा. साथ ही इसमें से 50,000 करोड़ रूपये करीब दो महीने तक फंसे रहेंगे. ऐसे में भविष्य में कंपनियों की लघु अवधि की कार्यशील पूंजी की जरूरत का आंकड़ा ऊंचा हो सकता है. जीएसटी के तहत पूरे देश को एकल बाजार बनाने का लक्ष्य है. इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार माना जा रहा है.

जीएसटी कानून में मुनाफाखोरी प्रावधान होना जरूरी था
सरकार ने माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के एक जुलाई से लागू होने तक व्यवसायिक जगत से कीमत वृद्धि पर रोक लगाने को कहा है. सरकार का कहना है कि इस प्रकार की वृद्धि से बाद में संबद्ध प्राधिकरण द्वारा बही खाते की जांच हो सकती है. राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि जीएसटी कानून में मुनाफाखोरी निरोधक प्रावधान जरूरी था. ताकि करो में कमी का लाभ ग्राहकों को मिलना सुनिश्चित हो सके. उन्होंने कहा, मेरा उन्हें सुझाव है कि जीएसटी के क्रियान्वयन तक वे कीमत वृद्धि को रोक सकते हैं तो अच्छा है, अन्यथा यह लागत वृद्धि का गंभीर मुद्दा होगा.

अधिया ने कहा, अगर लागत के नाम पर कीमत बढ़ाते हैं तो आगे इसकी जांच की जा सकती है. जीएसटी कानून में एक मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान शामिल हैं जो यह सुनिश्चित करेगा कि कंपनियां कर में कटौती का लाभ ग्राहकों को दें. बता दें कि पिछले सप्ताह जीएसटी परिषद ने 1200 से अधिक वस्तुओं तथा 500 सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत कर स्लैब में रखा.

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