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GST न गुड रहा न सिंपल, 4 महीने में नहीं मिली ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट में राहत

देशभर में एक जुलाई से जीएसटी लागू करते समये केन्द्र सरकार ने दावा किया कि इसे लागू करने के बाद सबसे बड़ा फायदा कंपनियों को मिलेगा. देशभर में उत्पादन करने वाली कंपनियों को अपनी माल ढ़ुलाई की लगात को जीएसटी व्यवस्था में 20 फीसदी कम करने का मौका मिलेगा. लेकिन जीएसटी लागू होने के चौथे महीने में कंपनियों को कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 16 October 2017
GST न गुड रहा न सिंपल, 4 महीने में नहीं मिली ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट में राहत GST का चौथा महीना, फिर भी कंपनियों को नहीं हुआ ये फायदा

देशभर में एक जुलाई से जीएसटी लागू करते समये केन्द्र सरकार ने दावा किया कि इसे लागू करने के बाद सबसे बड़ा फायदा कंपनियों को मिलेगा. देशभर में उत्पादन करने वाली कंपनियों को अपनी माल ढ़ुलाई की लगात को जीएसटी व्यवस्था में 20 फीसदी कम करने का मौका मिलेगा. लेकिन जीएसटी लागू होने के चौथे महीने में कंपनियों को कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है.

गौरतलब है कि रोड ट्रांस्पोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया था कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर को जीएसटी से होने वाले फायदे का अंदाजा इस एक बात से लगाया जा सकता है कि जीएसटी लागू होने के बाद इंटर स्टेट चेक पोस्ट की टैक्स विभाग को जरूरत नहीं है. क्योंकि माल से लदे ट्रक पर राज्यों के दर्जनों सेल्स टैक्स जीएसटी में समाहित हो जाएंगे. लिहाजा किसी फैक्ट्री में माल बनकर तार होगा, उसी समय ट्रक पर लदाई के वक्त ही उसकी यात्रा का जीएसटी पेपर तैयार हो जाएगा जिसे यात्रा के दौरान चेक या अपडेट कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

कारण यह कि एक राज्य से दूसरे राज्य और एक शहर से दूसरे शहर तक भारत में फैक्ट्री के सामान से लदा ट्रक कितने चेकपोस्ट पर रुकेगा यह कोई नहीं जानता था. जीएसटी से यह बदल जाएगा. देश के किसी कोने में फैक्ट्री से माल लाद कर निकला ट्रक दूसरे कोने में बिना रोक-टोक पहुंच गया तो जीएसटी का फायदा ट्रक पर लगे एक-एक सामान को मिलेगा- फैक्ट्री से बाजार तक माल पहुंचाने की लागत में कटौती देखने को मिलेगी.

ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का दावा है कि राज्यों द्वारा चेक पोस्ट हटाने का फायदा उन्हें महज जुलाई के शुरुआती दिनों में दिखाई दिया. लेकिन इससे पहले कि यह उन्हें कोई फायदा पहुंचाता, ज्यादातर राज्यों में सेल्स टैक्स विभागों के मोबाइल दस्तों ने जगह-जगह गाड़ियों को रोककर कागजात चेक करने की नई प्रक्रिया शुरू कर दी.

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जीएसटी लागू करने से पहले केन्द्रीय मंत्री ने यह भी दलील दी थी कि जहां अमेरिका में एक ट्रक साल भर में 3 लाख किलोमीटर का सफर तय करता है वहीं इसके उलट भारत में एक ट्रक महज 50 से 60 हजार किलोमीटर की यात्रा प्रति वर्ष कर पाता है. वहीं प्रति दिन के मुताबिक जीएसटी लागू होने से पहले जहां भारत में एक ट्रक दिन में लगभग 250-300 किलोमीटर का सफर तय करता था वहीं अमेरिका में 450 किलोमीटर और वैश्विक औसत 800 किलोमीटर था. अब देश में जीएसटी लागू होने के बाद प्रति दिन महज 40-50 किलोमीटर का इजाफा हुआ है. लेकिन यह इजाफा कंपनियों के लिए किसी तरह का फायदा लेकर नहीं आया क्योंकि इस दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे ने कंपनियों के खर्च को बढ़ा दिया है.

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जीएसटी लागू होने के बाद ऐसा होने से देश में माल से लदे ट्रक के ट्रैवल टाइम में बड़ी कटौती देखने को मिलेगी. वहीं जीएसटी के तहत प्रस्तावित ई-बिल व्यवस्था से 50,000 रुपये से अधिक के सामान का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ट्रकों द्वारा मौजूदा समय में लिए जा समय को और कम कर देगा. वहीं ट्रांस्पोर्ट सेक्टर में इन बदलावों के साथ देशभर सुधरती हाइवे स्थिति से देश में बड़े कंटेनर ट्रक की मांग भी बढ़ेगी जिससे कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा उत्पाद बाजार तक पहुंच सकेगा.

कई चरण के वैट की जगह देशभर में सिंगल जीएसटी का एक और बड़ा फायदा लॉजिस्टिक में यह होगा कि अब कंपनियों को अलग-अलग राज्यों में विशेष वेयरहाउस रखने की जरूरत नहीं होगी. पहले अलग-अलग राज्यों में टैक्स दर अलग रहने के कारण कंपनियों को विशेष वेयरहाउस हर राज्य में बनाना पड़ता था. अब जीएसटी लागू होने के बाद कंपनियों पर ऐसी बाध्यता नहीं रहेगी.

गौरतलब है कि भारत में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में जीएसटी से पहले लॉजिस्टिक कॉस्ट 14 फीसदी थी. जबकि दुनिया के अहम देशों में यह कॉस्ट महज 6-8 फीसदी आती है. केन्द्र सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी के चलते अब भारत में भी लॉजिस्टिक कॉस्ट घटकर 10-12 फीसदी के दायरे में आ जाएगी जिससे न सिर्फ कंपनियां उत्पाद को कम दाम पर बेच सकेंगी बल्कि अपने मुनाफे को भी बढ़ा सकेंगी.

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