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GST...सुधार का सपना, निगेटिव इंपैक्ट, जाने 5 देशों का अनुभव

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बड़े आर्थिक फैसले के बाद देश में जीडीपी विकास दर की रफ्तार पर सवाल खड़ा हुआ. अब केन्द्र सरकार 1 जुलाई 2017 से GST लागू करने की तैयारी में जुट गई है. जीएसटी लागू करने के लिए लोकसभा में लाए गए संशोधन पर हुई बहस के दौरान कई सांसदों ने इस सबसे बड़े आर्थिक सुधार से जीडीपी पर पड़ने वाले असर पर अहम चर्चा की.

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aajtak.in
राहुल मिश्र नई दिल्ली, 20 June 2017
GST...सुधार का सपना, निगेटिव इंपैक्ट, जाने 5 देशों का अनुभव 5 देशों पर उल्टा हुआ जीडीपी का असर

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बड़े आर्थिक फैसले के बाद देश में जीडीपी विकास दर की रफ्तार पर सवाल खड़ा हुआ. अब केन्द्र सरकार 1 जुलाई 2017 से GST लागू करने की तैयारी में जुट गई है. जीएसटी लागू करने के लिए लोकसभा में लाए गए संशोधन पर हुई बहस के दौरान कई सांसदों ने इस सबसे बड़े आर्थिक सुधार से जीडीपी पर पड़ने वाले असर पर अहम चर्चा की. लेकिन दुनिया के जिन पांच देशों ने जीएसटी को लागू कर दिया है उनके आंकड़े कहते हैं कि लागू करने के बाद अर्थव्यवस्था पर पहले 1-2 साल तक नकारात्मक प्रभाव ही पड़ता है.

केन्द्र सरकार जीएसटी के प्रभाव पर जवाब समय आने पर अपना जवाब देगी. लेकिन दुनियाभर में जीएसटी व्यवस्था को लागू करने वाले 5 देशों के आंकड़ों को देखें तो साफ है कि जीएसटी लागू होने के बाद पूरी उम्मीद है कि भारत में भी जीडीपी पर 1-3 फीसदी की कमी दर्ज हो सकती है.

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आस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, मलेशिया और सिंगापोर ने 1991 से 2000 के बीच में अपने-अपने यहां टैक्स के लिए जीएसटी व्यवस्था को लागू किया. इन्हीं देशों के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 1994 में जब सिंगापुर ने अपने यहां जीएसटी लागू किया तो उस साल के जीडीपी आंकड़ों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई. आईएमएफ के मुताबिक 1993 में जीएसटी लागू होने के पहले जहां सिगापोर की जीडीपी विकास दर 5.5 फीसदी के आसपास थी और जीएसटी लागू करने के वर्ष 1994 में वह लुढ़ककर ¬-3 फीसदी हो गई.

 

बाकी देशों में जीएसटी लागू होने पर जीडीपी पर प्रभाव:

देश

जीएसटी लागू करने का वर्ष

जीडीपी (एक साल पहले)

जीडीपी(जब लागू किया)

जापान

1989

2 फीसदी

-1 फीसदी

कनाडा

1991

-1.75 फीसदी

-0.75 फीसदी

सिंगापोर

1994

5.6 फीसदी

-3 फीसदी

ऑस्ट्रेलिया

2000

-1 फीसदी

-1.75 फीसदी

मलेशिया

2015

1.75 फीसदी

-1 फीसदी

गौरतलब है कि देश में नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर को किया गया जिसके बाद कैश की किल्लत के बीच कारोबारी सुस्ती और गिरी हुई खपत ने जीडीपी पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया था. विश्व बैंक, आईएमएफ समेत ग्लोबल रेटिंग एजेंसियां जैसे फिच और मूडीज ने भारत के विकास दर अनुमान को घटाना शुरू कर दिया था.

हालांकि राहत यह रही कि केन्द्र सरकार के अपने आंकड़ों वाले सांख्यकि (सीएसओ) विभाग ने जीडीपी के नए आंकड़े जारी करते हुए दिखाया कि नोटबंदी के फैसले से विकास दर को नुकसान नहीं उठाना पड़ा. हालांकि इस दौरान बीती तिमाही के मुकाबले नोटबंदी वाली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में विकास दर थोड़ा कम 7 फीसदी रही. अब ग्लोबल स्तर पर जीएसटी के इस प्रभाव के बाद इंतजार वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की जीडीपी पर पड़ने वाले असर का होगा.

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