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मोदी सरकार की नई मुश्किल! लक्ष्‍य से काफी दूर है टैक्‍स कलेक्‍शन

आर्थिक सुस्‍ती के बीच टैक्‍स कलेक्‍शन के मोर्चे पर मोदी सरकार के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है. दरअसल, सरकार का टैक्‍स कलेक्‍शन उसके तय लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है.

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aajtak.in नई दिल्‍ली, 19 September 2019
मोदी सरकार की नई मुश्किल! लक्ष्‍य से काफी दूर है टैक्‍स कलेक्‍शन लक्ष्‍य से काफी दूर है टैक्‍स कलेक्‍शन

  • डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन में 17.5 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्‍य
  •  इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के लिए 15 फीसदी इजाफे का है लक्ष्य

देश में आर्थिक सुस्‍ती की वजह से विपक्ष की आलोचना झेल रही मोदी सरकार के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है. दरअसल, चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि टैक्स कलेक्‍शन, सरकार के लक्ष्‍य से काफी कम है. यहां बता दें कि पूरे वित्त वर्ष के लिए डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन में 17.5 फीसदी और इनडायरेक्‍ट टैक्‍स के लिए 15 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है.

क्‍या कहते हैं आंकड़े  

न्‍यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से 17 सितंबर की अवधि में सरकार का टैक्‍स कलेक्‍शन बढ़ा जरूर है लेकिन लक्ष्‍य को देखते हुए रफ्तार काफी सुस्‍त है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन 4.7 फीसदी बढ़कर 5.50 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 5.25 लाख करोड़ रुपये रहा था.अगर सरकार के लक्ष्‍य के हिसाब से देखें तो यह रफ्तार धीमी है. यहां बता दें कि चालू वित्त वर्ष के दूसरे तिमाही के अब चंद दिन बचे हैं. ऐसे में सरकार को लक्ष्‍य हा‍सिल करने के लिए कलेक्‍शन की रफ्तार आगामी तिमाही (अक्‍टूबर-दिसंबर) में दोगुनी करनी पड़ेगी.

टैक्‍स डिपार्टमेंट के सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि 5.50 लाख करोड़ रुपये के टैक्‍स कलेक्‍शन में से एडवांस टैक्‍स कलेक्‍शन 7.3 फीसदी बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये पर है. इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में एडवांस टैक्‍स कलेक्‍शन 2.05 लाख करोड़ रुपये रहा था. एक सीनियर टैक्‍स अधिकारी के मुताबिक नेट टैक्‍स कलेक्‍शन 4.5 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.25 लाख करोड़ रुपये रहा था.

वहीं इस दौरान सरकार का राजकोषीय घाटा उसके पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 77 फीसदी से आगे निकल चुका है. आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में राजकोषीय घाटा 5.47 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि पूरे वर्ष के लिए बजट में 7.03 लाख करोड़ रुपये रखा गया है.

क्‍या है वजह

टैक्‍स कलेक्‍शन उम्मीद से कम रहने की वजह मांग में गिरावट और कुल वृद्धि में कमी है. टैक्‍स कलेक्‍शन के ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब आर्थिक मंदी की आहट की वजह से सरकार चौतरफा घिरी है. बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर पांच फीसदी पर आ गई है, जो इसका छह साल का निचला स्तर है. 

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