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मई में भी 23 फीसदी से ज्यादा बेरोजगारी दर, लॉकडाउन में ढील का खास फायदा नहीं

लॉकडाउन में ढील के बावजूद मई महीने में देश में बेरोगारी की दर 23.48 फीसदी की ऊंचाई पर रही. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों से यह बात सामने आई है. यह अप्रैल के 23.52 फीसदी के बेरोजगारी दर से थोड़ा सा कम है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 01 June 2020
मई में भी 23 फीसदी से ज्यादा बेरोजगारी दर, लॉकडाउन में ढील का खास फायदा नहीं मई में भी बनी रही बेरोजगारी की ऊंची दर

  • मई में भी बनी रही बेरोजगारी की ऊंची दर
  • CMIE के मुताबिक मई में 23.48% थी बेरोजगारी
  • इसके पहले अप्रैल में 23.52% बेरोजगारी दर थी

कोरोना वायरस के प्रकोप और लॉकडाउन की वजह से देश में बेरोजगारी चरम पर बनी हुई है. लॉकडाउन में ढील के बावजूद मई महीने में देश में बेरोगारी की दर 23.48 फीसदी की ऊंचाई पर रही. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों से यह बात सामने आई है.

इंडस्ट्री के उत्पादन में आई थी भारी गिरावट

हालांकि यह अप्रैल के 23.52 फीसदी के बेरोजगारी दर से थोड़ा सा कम है. गौरतलब है कि देश भर में लॉकडाउन का पांचवां चरण लागू हो चुका है. हालांकि इसे अनलॉक-1 भी कहा जा रहा है, क्योंकि इस दौरान ज्यादा आर्थिक गतिविधियां खोल दी गई हैं. लेकिन ऐसा लगता नहीं कि मई महीने में जो लॉकडाउन में ढील दी गई थी, उसका कोई खास असर रोजगार पर हुआ है. हाल में आए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में कोर सेक्टर की इंडस्ट्री के उत्पादन में 38.1 फीसदी की गिरावट आई है.

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शहरों में ज्यादा बेरोजगारी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, CMIE ने बताया है किइस दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा थी. इसकी एक वजह यह भी है कि शहरी क्षेत्रों में रेड जोन ज्यादा हैं. देश में जब 25 मार्च को लॉकडाउन लागू हुआ तो ही जानकार इस बात की चेतावनी दे रहे थे कि बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होंगे. इसके पहले सीएमआईई के आए आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन से देश में 12 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं.

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CMIE के मुताबिक, लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों को भारी झटका लगा है. इनमें फेरीवाले, सड़क के किनारे दुकाने लगाने वाले विक्रेता, निर्माण उद्योग में काम करने वाले श्रमिक और रिक्शा चलाकर पेट भरने वाले लोग शामिल हैं.

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शुरू में, लॉकडाउन केवल दिहाड़ी मजदूरों को नुकसान पहुंचाता है जो असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं. धीरे-धीरे, यह सुरक्षित नौकरियों पर भी असर करना शुरू कर देता है. कई स्टार्टअप्स ने छंटनी की घोषणा की है.

देश में अब 1 जून से लॉकडाउन का पांचवां चरण घोषित कर दिया गया है. हालांकि, इस दौरान ज्यादातर आर्थिक गतिविधियां खोल दी गई हैं. इसलिए इस बात की थोड़ी उम्मीद जगी है कि जून में हालात कुछ सुधरें, लेकिन बड़ी संख्या में पलायन कर चुके मजदूरों में से शायद एक हिस्सा खेती-बाड़ी के अपने पारंपरिक कामों में भी लग जाए.

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