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लिव-इन पार्टनर और LGBTQ कपल को भी हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देगी यह कंपनी

ज्यादातर कंपनियां अविवाहित या लिव-इन पार्टनर हेट्रो-सेक्सुअल कर्मचारियों को बीमा कवर की सुविधा नहीं देतीं, क्योंकि भारत में उनकी कानूनी स्थिति अभी बहुत स्पष्ट नहीं है.

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aajtak.inनई दिल्ली, 16 July 2019
लिव-इन पार्टनर और LGBTQ कपल को भी हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा देगी यह कंपनी सिटी बैंक की पहल

बहुराष्ट्रीय समूह सिटीग्रुप इंक ने भारत के अपने दफ्तरों में ज्यादा समावेशी कर्मचारी नीति बनाने की दिशा में कदम उठाया है. कंपनी ने हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज, रीलोकेशन खर्च जैसी सुविधाएं अब लिव-इन पार्टनर्स और LGBTQ (लेस्ब‍ियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर क्वियर) पार्टनर्स को भी देने का फैसला किया है.

न्यूयॉर्क मुख्यालय वाला यह इनवेस्टमेंट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज कॉरपोरेशन देश का पहला ऐसा कॉरपोरेशन है जो अपने लिव-इन रहने वाले या अविवाहित हेट्रो-सेक्सुअल कर्मचारियों को बीमा सुविधा देने जा रहा है. वैसे कुछ कंपनियां LGBTQ समुदाय के कर्मचारियों को ऐसी सुविधाएं देती हैं, लेकिन लिव-इन पार्टनर के लिए ऐसी सुविधा की घोषणा करने वाली सिटी ग्रुप पहली कंपनी है. इसके पहले गोदरेज समूह, एक्सेंचर और आईबीएम भी LGBTQ समुदाय के कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योंरेस की सुविधा दे चुकी हैं.

सिटी इंडिया प्राइड नेटवर्क की बिजनेस स्पांसर पद्मजा चक्रवर्ती ने इकोनॉमिक टाइम्स अखबार को बताया कि कंपनी अपने कर्मचारियों के ऐसे पार्टनर को भी बीमा सुविधा देने जा रही है, जो सेम सेक्स या अपोजिट सेक्स के हैं और साथ रहते हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी इसके अलावा डोमेस्टिक रीलोकेशन बेनिफिट भी ऐसे कर्मचारियों को देगी जो अभी तक कर्मचारियों की पत्नी, मां-बाप या निर्भर बच्चों को मिलता रहा है.

गौरतलब है कि ज्यादातर कंपनियां अविवाहित या लिव-इन पार्टनर हेट्रो- सेक्सुअल कर्मचारियों को बीमा कवर की सुविधा नहीं देतीं, क्योंकि भारत में उनकी कानूनी स्थिति अभी बहुत स्पष्ट नहीं है. ऐसे लोगों को अलग से भी बीमा मिलना आसान नहीं होता, क्योंकि इसके लिए कई तरह के प्रूफ की जरूरत होती है. लेकिन ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी में ऐसे लोगों की जिम्मेदारी कंपनी लेती है.

ऐसे कदम यह साबित करते हैं कि अब LGBTQ समुदाय या लिव-इन पार्टनर्स के लिए समाज का नजरिया बदल रहा है. सिटीग्रुप के भारत में करीब 17 हजार कर्मचारी हैं, जबकि दुनिया भर में इसके करीब 2.14 लाख कर्मचारी हैं.

पिछले साल 6 सितंबर को दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भारत में समलैंगिकता अपराध नहीं रह गया है. आपसी सहमति से समलैंगिक यौन संबंध बनाए जाने को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इससे संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया.

सिटी ग्रुप भारत में सिटी बैंक के नाम से बैंकिंग सेवाएं भी देता है. यह अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है. इसे फॉर्च्यून 500 में 30वें स्थान पर रखा गया है.

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