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महंगाई पर चारों खाने चित्त हुआ मोदी सरकार का आखिरी बजट

केन्द्रीय बजट 2018 में सरकार ने किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए एग्री उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना इजाफा करने का फैसला लिया है. आर्थिक जानकारों का दावा है कि इस फैसले से देश में महंगाई को दस्तक देने से कोई नहीं रोक सकता.

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Assembly Elections 2018
राहुल मिश्रनई दिल्ली, 01 February 2018
महंगाई पर चारों खाने चित्त हुआ मोदी सरकार का आखिरी बजट बजट के इस ऐलान पर क्या बेलगाम हो जाएगी महंगाई

महंगाई दस्तक देने वाली है. यह बात वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे इजाफे के बाद से कही जा रही है. लेकिन अब केन्द्र में मोदी सरकार के आए आखिरी पूर्ण बजट ने भी तय कर दी है कि देश में महंगाई आने वाली है. केन्द्रीय बजट 2018 में सरकार ने किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए एग्री उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना इजाफा करने का फैसला लिया है. आर्थिक जानकारों का दावा है कि इस फैसले से देश में महंगाई को दस्तक देने से कोई नहीं रोक सकता.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 2014 मे पेश किए बजट में माना था कि फसल का समर्थन मूल्य बढ़ाने से देश में फसल उत्पाद की कीमतों में इजाफा हो जाता है जिसके चलते महंगाई बढ़ना तय हो जाता है. दरअसल अधिक समर्थन मूल्य के इस नीतिगल फैसले से केन्द्र सरकार के खजाने पर बोझ पड़ेगा और आम आदमी को गेंहू, चावल, दाल और तिलहन तय निर्धारित कीमतों से अधिक पर उपलब्ध होगा. इस असर के चलते आम आदमी की रसोईं का बजट तो बिगड़ना तय है ही. इससे सरकार का राजस्व घाटा भी बढ़ जाएगा.

हालांकि कि केन्द्र सरकार के इस नीतिगत फैसले में एक प्रमुख बात और है कि देश में अब खेती करने में किसानों की लागत को तय किया जाएगा. मौजूदा समय में लागत को निर्धारित करने का कोई ढांचा मौजूदा नहीं है. लिहाजा किसानों की आमदनी को दोगुना करने की नियत से यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाता है तो किसान की लागत के आधार पर बड़ी बहस होने की संभावना है.

इसे पढ़ें: बजट 2018: समझें बजट की खास बातें और उनका आप पर असर

गौरतलब है कि देश में खुदरा महंगाई पहले से ही बढ़ रही है और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से इसमें और इजाफे की उम्मीद है. सीपीआई पर आधारित खुदरा महंगाई दिसंबर 2017 में 17 महीने के शीर्ष पर पहुंच गया था और यह रिजर्व बैंक के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर है. इसमें भी खाद्य सामग्री की महंगाई सबसे अहम कारण रही है. अब समर्थन मूल्य में इजाफे के ऐलान से देश में खाद्य महंगाई में बड़ा इजाफा होना तय है.

न्यूनतम मूल्य में इजाफे पर किसानों की प्रतिक्रिया है कि देश में समर्थन मूल्य में खरीद नहीं किया जाता है. लिहाजा समर्थन मूल्य बढ़ाने के ऐलान की जगह यदि सरकार यह ऐलान करती कि किसानों के उत्पाद को निश्चित तौर पर सरकार द्वारा खरीदा जाएगा तभी किसानों को सीधा फायदा पहुंच सकेगा. लिहाजा, कहा जा सकता है कि आम चुनावों से पहले आए इस पूर्ण बजट में केन्द्र सरकार ने किसानों को राहत पहुंचाने के लिए यदि यह कदम उठाया तो इसका खामियाजा देश में सभी को उठाना पड़ेगा.

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