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2013: कोर्ट के चक्‍कर लगाते रहे बिजनेस मैन

घोटालों के मामलों में अदालती जांच के घेरे में आने से अनिल अंबानी, सुनील भारती मित्तल तथा टाटा जैसे औद्योगिक घरानों के लिए 2013 काफी कठिन रहा. वहीं सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के चलते कठिन समय से गुजरना पड़ा.
2013: कोर्ट के चक्‍कर लगाते रहे बिजनेस मैन सुब्रत राय, अनिल अंबानी और सुनील भारती मित्तल
भाषा[Edited By: दिगपाल सिंह]नई दिल्ली, 30 December 2013

घोटालों के मामलों में अदालती जांच के घेरे में आने से अनिल अंबानी, सुनील भारती मित्तल तथा टाटा जैसे औद्योगिक घरानों के लिए 2013 काफी कठिन रहा. वहीं सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के चलते कठिन समय से गुजरना पड़ा. शीर्ष अदालत ने राय के देश छोड़ने पर रोक लगा दी.

चाहे निचली अदालतों का गवाही बॉक्स हो या फिर दिल्ली हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के गलियारे हों देश के कारपोरेट जगत के कई दिग्गजों जैसे मुकेश अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला, नवीन जिंदल और रवि रुइया का नाम कई विवादास्पद मामलों में गूंजता रहा.

इस साल कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा. फिनलैंड की मोबाइल कंपनी नोकिया को टैक्‍स विवाद में हाईकोर्ट जाना पड़ा, तो ब्रिटेन के वेदांता समूह, कोरिया की इस्पात कंपनी पॉस्को, स्विट्जरलैंड की नोवार्टिस को औद्योगिक प्रदूषण, लाइसेंस व पेटेंट जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट में जूझना पड़ा.

शीर्ष अदालत ने नोवार्टिस की कैंसर की दवा ग्लीवेक के लिए उसकी पेटेंट याचिका को खारिज कर दिया, जिससे घरेलू फार्मा कंपनियों को बड़ा प्रोत्साहन मिला. इससे घरेलू फार्मा कंपनियां सस्ती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन कर सकेंगी.

इसी तरह अमेरिकी फार्मा कंपनी मर्क शार्प एंड डोहमे (एमएसडी) को जेनेरिक मधुमेह रोधी दवा बनाने वाली भारतीय कंपनी ग्लेनमार्क के साथ मामले में हाई कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई. अब यह मामला बड़ी पीठ में लंबित है.

सहारा इंडिया परिवार व सुब्रत राय के लिए 2013 अच्छा नहीं रहा. सुब्रत राय के न केवल भारत छोड़ने पर रोक लगा दी गई, बल्कि उन पर व उनके समूह की कंपनियों पर शीर्ष अदालत से ‘लुकाछिपी’ का खेल खेलने का भी आरोप लगा. यह मामला सहारा समूह द्वारा निवेशकों का 20,000 करोड़ रुपये लौटाने से संबंधित है. इस मामले में उन पर अदालत की अवमानना का मामला भी चल रहा है.

समूह के लिए संकट उस समय और बढ़ गया जबकि शीर्ष अदालत ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच में हस्तक्षेप के लिए राय और उनके दो कर्मचारियों के खिलाफ मानहानि का मामला चल सकता है.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में भारती सेल्युलर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुनील मित्तल, एस्सार समूह के प्रवर्तक रवि रुइया तथा रिलायंस एडीएजी समूह के प्रमुख अनिल अंबानी को शीर्ष अदालत में जाना पड़ा. सीबीआई की विशेष अदालत ने इनके खिलाफ आरोपी और गवाह के रूप में पेश होने का समन जारी किया था.

अतिरिक्त स्पेक्ट्रम घोटाले में जहां मित्तल व रुइया को शीर्ष अदालत से अस्थायी राहत मिल गई, जिसने उनके खिलाफ कार्रवाई पर स्थगन दे दिया. वहीं अंबानी अदालत को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आदेश देने के लिए अपनी ओर से विश्वास नहीं दिला पाए. एडीएजी के प्रमुख के अदालत में गवाह के रूप में पेश होने के एक दिन बाद उनकी पत्नी टीना अंबानी को भी पटियाला हाउस अदालत में अपना बयान दर्ज करने के लिए पेश होना पड़ा.

सरकार का प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने का विवादास्पद फैसला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सीपीआई के सांसद गुरदास दासगुप्ता ने पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली के खिलाफ मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की. हालांकि, दोनों ने ही इससे इनकार किया.

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