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ओबामा से न्याय की गुहार लगा रहे हैं भोपाल गैस पीड़ि‍त, बयां करना चाहते हैं दर्द

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तीन दिवसीय यात्रा पर रविवार को भारत आए हैं. वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि‍ भी हैं, लिहाजा पूरा देश उत्सव के रंग में रंगा हुआ है. लेकिन भारतवर्ष का एक कोना ऐसा भी है, जिसकी सिसकियों में ओबामा का नाम है और आंसू दुनिया के सबसे ताकतवर नेता से त्रासदी बयां करने को आतुर हैं.

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aajtak.in
अखि‍लेश श्रीवास्तव [Edited By: स्वपनल सोनल]भोपाल, 26 January 2015
ओबामा से न्याय की गुहार लगा रहे हैं भोपाल गैस पीड़ि‍त, बयां करना चाहते हैं दर्द symbolic image

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तीन दिवसीय यात्रा पर रविवार को भारत आए हैं. वह गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि‍ भी हैं, लिहाजा पूरा देश उत्सव के रंग में रंगा हुआ है. लेकिन भारत का एक कोना ऐसा भी है, जिसकी सिसकियों में ओबामा का नाम है और आंसू दुनिया के सबसे ताकतवर नेता से त्रासदी बयां करने को आतुर हैं. भोपाल गैस त्रासदी पीड़ि‍त इंसाफ की मांग को लेकर बराक ओबामा से 21 तोपों की सलामी के बीच पुरानी चीख-पुकार याद करने की गुहार लगा रहे हैं.

गैस पीड़ि‍तों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति से उन्होंने उनकी पिछली यात्रा के समय भी इंसाफ की मांग की थी, लेकिन शायद ओबामा गैस पीड़ि‍तों की बात सुनना ही नहीं चाहते. ओबामा एक बार फिर भारत आए हैं. वह राष्ट्र के अतिथि हैं, लेकिन साथ में अपेक्षाओं ओर उम्मीदों की पोटली भी है. दोनों देशों के बीच व्यवसाय को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखने वाले ओबामा हैदराबाद हाउस से लेकर राष्ट्रपति भवन तक मोदी की मेजबानी के कायल हैं. लेकिन भोपाल के लोग उस ओबामा को नहीं भूल पा रहे हैं, जिनसे पिछली बार उन्होंने समय मांगा तो सिवाय निराशा के कुछ हाथ नहीं आया.

कई NGO चाहते हैं मोदी गैस त्रासदी मुद्दे पर करें बात
प्रभावितों के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भी मांग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने गैस त्रासदी का मुद्दा उठाना चाहिए. पांच एनजीओ ने एक संयुक्त बयान में कहा, 'प्रभावितों की मांग है कि दोनों देशों के नेताओं को आम लोगों की जिंदगी और सेहत के बजाय कॉरपोरेट हितों को सुरक्षा देना रोकना चाहिए. भोपाल त्रासदी से जुड़े मुद्दों के समापन के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए.'

गौरतलब है कि 1984 में 2-3 दिसंबर की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के संयंत्र से घातक मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस रिसने से 3000 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि हजारों अन्य बीमार हो गए थे. यह दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में एक था.

यूसीआईएल की मूल बहुराष्ट्रीय कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन को बाद में डाउ केमिकल्स ने खरीद लिया था. भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खान ने कहा कि अमेरिका ने यह सुनिश्चित किया था कि ब्रिटिश पेट्रोलियम मैक्सिको की खाड़ी में तेल रिसाव के लिए 20 अरब डालर का भुगतान करे. उन्होंने कहा, 'हम ओबामा से पूछना चाहेंगे कि कैसे उनकी अंतरात्मा ने उन्हें उन दो अमेरिकी कॉरपोरेशन का साथ देने की इजाजत दी, जिन्होंने उस राशि का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही उस घटना से दो हजार गुणा अधिक मारे गए लोगों के लिए दिया था.'

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