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जंतर मंतर का लोकतंत्र: मुसद्दीलाल की कोई सुनता क्यों नहीं?

विकास कुमारनई दिल्ली, 04 October 2017

गाय की रक्षा के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की घटनाएं इन दिनों आम हैं. यहां तक कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा कि ऐसे गौरक्षकों में से 80 फीसदी फर्जी हैं. लेकिन आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं एक ऐसे गौरक्षक से जो हिंसा नहीं बल्कि अहिंसा का पुजारी है. गांधी और बिनोबा भावे को अपना आदर्श मानने वाले मुसद्दीलाल पिछले छह साल से जंतर-मंतर पर गायों को बचाने के लिए सत्याग्रह कर रहे हैं. मनमोहन सरकार ने उनकी नहीं सुनी और गायों को लेकर आक्रामक रही मोदी सरकार भी उनकी मांग की ओर से आंख मूंदे हुए हैं. वीडियो में देखिए आखिर क्या चाहते हैं मुसद्दीलाल और क्यों जंतर-मंतर को बनाया उन्होंने अपनी लक्ष्य प्राप्ति का जरिया.

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