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वाजपेयी के नाम ये दो रोचक कीर्तिमान, जो हमेशा रहेगा 'अटल'

अमित दुबे
16 August 2019
वाजपेयी के नाम ये दो रोचक कीर्तिमान, जो हमेशा रहेगा 'अटल'
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज पहली पुण्यतिथि है. आज से ठीक एक साल पहले 16 अगस्त 2018 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था. कोमल हृदय वाले वाजपेयी कठोर फैसले लेने में कभी झिझके नहीं. सियासत अब भी उनको सोचकर ठिठक जाती है. पलट कर देखती है और उन पर गर्व करती है.
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम दो ऐसे कीर्तिमान दर्ज हैं, जिनका टूटना आसान नहीं है. वाजपेयी देश के एकमात्र ऐसे राजनेता थे जिन्होंने चार राज्यों के 6 लोकसभा क्षेत्रों की नुमाइंदगी की थी.
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वह पहले ऐसे सांसद बने जिन्हें चार राज्य यूपी, एमपी, गुजरात और दिल्ली से चुना गया. उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बलरामपुर, गुजरात के गांधीनगर, मध्य प्रदेश के ग्वालियर और विदिशा तथा दिल्ली के नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने का कीर्तिमान वाजपेयी के ही नाम है.
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वाजपेयी के नाम दूसरा कीर्तिमान भी काफी दिलचस्प है. वाजपेयी साल 1957 में उत्तर प्रदेश के तीन संसदीय क्षेत्र लखनऊ, बलरामपुर और मथुरा से चुनाव लड़े थे. बलरामपुर से अटल चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच गए थे, लेकिन लखनऊ और मथुरा में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. मथुरा में तो उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी.
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अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ पढ़ा. साल 1952 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी.
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सबको साथ लेकर चलने की उनकी उदारता ने राजनीति में वो प्रयोग किया, जिसके बाद गठबंधन राजनीति का नया रास्ता खुला. अटल ने 28 दलों को साथ लेकर एनडीए की सरकार चलाई, जो आज भी देश में मिसाल है उदारवादी राजनीति की. सिद्धांतों के आड़े अगर पार्टी लाइन भी आती थी तो अटल उसे तोड़ देते थे, तर्क देते थे और सभी को अपना मुरीद बना लेते थे.
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कविताओं और संवेदनाओं की परिधि में आजीवन खड़े रहे. इस जननायक ने जब 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में जब 5 भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके राष्ट्रवाद के भाव को क्षितिज पर पहुंचाया, तब संपूर्ण विश्व खिलाफ हो गया था. लेकिन उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया और वैश्विक समुदाय को भारत की शक्ति का निर्विवाद परिचय दिया. इसके बाद अटल लोगों में और लोकप्रिय हो गए.
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