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इन तरीकों की वजह से बॉलीवुड में फिल्ममेकिंग को बदल चुके हैं रामगोपाल वर्मा

फिल्मों को लेकर उनकी दीवानगी किसी से छिपी नहीं है और वे भारत के उन निर्देशकों में शुमार है जिनका फिल्मों से कमर्शियल तौर पर नहीं बल्कि आर्टिस्टिक स्तर पर लगाव है.

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aajtak.in [Edited By: केपी वर्मा]नई दिल्ली, 07 April 2019
इन तरीकों की वजह से बॉलीवुड में फिल्ममेकिंग को बदल चुके हैं रामगोपाल वर्मा रामगोपाल वर्मा

रामगोपाल वर्मा अपने आप में एक कैरेक्टर हैं. फिल्मों को लेकर उनकी दीवानगी किसी से छिपी नहीं है और वे भारत के उन निर्देशकों में शुमार है जिनका फिल्मों से कॉमर्शियल तौर पर नहीं बल्कि आर्टिस्टिक स्तर पर लगाव है. सत्या जैसी फिल्म के साथ बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड फिल्मों का कलेवर बदल डालने वाले रामगोपाल वर्मा के बारे में एक बार पंकज त्रिपाठी ने कहा था कि एक दौर में बॉलीवुड में जो भी आड़े टेढ़े चेहरे वाला शख्स एक्टर बनने आता था, वो सबसे पहले रामगोपाल वर्मा के पास ही पहुंचता था क्योंकि बाकी स्टूडियोज़ तो चमक धमक और हैंडसम एक्टर्स चाहते थे लेकिन रामू एक्टर्स की तलाश में रहते थे. अपनी लो बजट पर हाई ऑन कंटेंट फिल्मों के लिए मशहूर रामगोपाल ने उर्मिला, मनोज वाजपेयी, सौरभ शुक्ला और अनुराग कश्यप जैसे सितारों को फिल्मों की बारीकियां सिखाईं. पेश है ऐसे कुछ फैक्ट्स जिनके चलते रामगोपाल वर्मा ने काफी हद तक अपने स्तर पर बॉलीवुड में फिल्ममेकिंग को बदलने की कोशिश की है.

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My amazingly talented costume designer niece ⁦@shravyavarma promised to apply her costume designing talent on dear old ME!

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I never thought @ncbn.official was this b...d 🙄🙄🙄 F...k 😡😡😡#LakshmisNTR

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And @ncbn.official, sorry I mean Sritej has come to backstab all 3 of us 😡

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रामगोपाल वर्मा उन चुनिंदा शख्सियतों में से थे  जिन्होंने सबसे पहले देश में स्टैडी कैमरा का इस्तेमाल करना शुरु किया था. ये एक विशेष प्रकार का कैमरा होता है जो मूव होने के दौरान भी फोक्सड इमेज ले सकता है. रामगोपाल वर्मा डिजिटल कैमरा के साथ महज 2-3 लाख रुपए में फिल्में बना रहे हैं. उन्होंने अपनी फिल्म आइसक्रीम के कई सीन्स सिर्फ आईफोन से शूट किए थे.

वर्मा की फिल्म शिवा से उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ख्याति प्राप्त हुई. इसके अलावा ये फिल्म कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ऑफिशियल सेलेक्शन के तौर पर नज़र आई थी. उन्हें शूल के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है. उन्होंने डॉक्यूड्रामा जैसी तकनीक का इस्तेमाल करना शुरु किया था और भारत में वो कॉन्सेप्ट एकदम नया था. तलवार जैसी फिल्में डॉक्यूड्रामा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है.

वर्मा अपनी फिल्मों में लाइट के इस्तेमाल को लेकर भी काफी चर्चा में रहते हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि लाइट मेरे लिए किसी कैरेक्टर से कम नहीं है. लाइट की भी अपने आप में एक स्टोरी होती है. कई निर्देशकों ने वर्मा से लाइट को इफेक्टिव तरीके से इस्तेमाल करने के टिप्स लिए हैं. रामगोपाल वर्मा ने सबसे पहले गॉड आई टेक्नीक को फिल्मों में इस्तेमाल करना शुरू किया था.

रामगोपाल वर्मा ने महज 15 दिनों में फिल्म कौन की शूटिंग निपटा दी थी. इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर को आज भी उनकी सबसे बेहतरीन फिल्मों में शुमार किया जाता है.

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