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प्रेम गीतों के अनोखे शिल्‍पकार थे आनंद बख्‍शी

अपने कैरियर में कई सुपरहिट गीत देने वाले हरफनमौला गीतकार आनंद बख्‍शी ने कई सितारों, निर्देशकों और संगीतकारों की किस्मत चमकाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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आज तक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 21 July 2009
प्रेम गीतों के अनोखे शिल्‍पकार थे आनंद बख्‍शी आनंद बख्‍शी

" "गीतों को एक खूबसूरत मोड़ देने वाले आनंद बख्‍शी का लिखा गीत 'यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे' को भला कौन भूल सकता है. चार दशकों से अधिक समय के अपने कैरियर में कई सुपरहिट गीत देने वाले हरफनमौला गीतकार आनंद बख्‍शी ने कई सितारों, निर्देशकों और संगीतकारों की किस्मत चमकाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

सदाबहार गीतों के शिल्‍पकार
चिंगारी कोई भड़के..., मैंने पूछा चांद से.... और तुझे देखा तो ये जाना सनम... जैसे एक से बढ़कर एक गीतों के रचनाकार आनंद बख्शी मायानगरी में गायक बनने की हसरत लेकर आए थे लेकिन बन गए गीतकार. ज़िन्दगी की तल्ख अनुभवों को जब शब्द में पिरोया तो हर आदमी की ज़िन्दगी किसी न किसी सिरे से उस गीत से जुड़ गयी. 4000 से अधिक गीतों की रचना करने वाले आनंद बख्‍शी ने जितने सरल गीत लिखें हैं उतनी ही सरलता से वह गीत हर दिल में उतर जाते हैं.

मैकेनिक से बने गीतकार
21 जुलाई सन् 1930 को रावलपिण्डी में जन्मे आनंद बख्‍शी गायक बनने का सपना लेकर मुंबई गए थे लेकिन गीतकार बन गए. गीतकार बनने से पहले वे नेवी में एवं मोटर मैकेनिक का काम कर चुके थे. आनंद बख्‍शी को पहली बार भगवान दादा ने अपनी फिल्‍म बड़ा आदमी (1956) के लिए गीत लिखने को कहा. लेकिन इससे उन्‍हें सफलता नहीं मिली. 'मेहदी लगी मेरे हाथ(1962)' और 'जब-जब फूल खिले(1965)' की सफलता मिलने तक उन्‍हें संघर्ष करना पड़ा. इन फिल्‍मों के प्रदर्शन के साथ ही उनको लोकप्रियता मिलनी शुरू हो गई. 'परदेसियों से न अँखियाँ मिलाना' और 'यह समा है प्यार का' जैसे लाजवाब गीतों ने उन्हें बहुत लोकप्रिय बना दिया. इसके बाद फ़िल्म 'मिलन(1967)' के प्रदर्शन के साथ ही वह गीतकारों की श्रेणी में सबसे ऊपर आ गये. उन्हें फिर कभी पीछे मुड़ के देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी.

प्रेम गीतों के सफल रचनाकार
गीतकार आनन्द बख्‍शी ने संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ मिलकर 'फ़र्ज़(1967)', 'दो रास्ते(1969)', 'बॉबी(1973'), 'अमर अकबर एन्थॉनी(1977)', 'इक दूजे के लिए(1981)' और राहुल देव बर्मन के साथ 'कटी पतंग(1970)', 'अमर प्रेम(1971)', हरे रामा हरे कृष्णा(1971)' और 'लव स्टोरी(1981)' फ़िल्मों में अमर गीत दिये. आनंद बख्‍शी ने राज कपूर के लिए 'बॉबी(1973)', 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्(1978)'; सुभाष घई के लिए 'कर्ज़(1980)', 'हीरो(1983)', 'कर्मा(1986)', 'राम-लखन(1989)', 'सौदागर(1991)', 'खलनायक(1993)', 'ताल(1999)' एवं 'यादें(2001)'; और यश चोपड़ा के लिए 'चाँदनी(1989)', 'लम्हे(1991)', 'डर(1993)', 'दिल तो पागल है(1997)'; आदित्य चोपड़ा के लिए 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे(1995)', 'मोहब्बतें(2000)' फिल्मों में सदाबहार गीत लिखे.

कई गायकों को दिया जीवन
आनंद बख्‍शी ने शैलेंद्र सिंह, उदित नारायण, कुमार सानू, कविता कृष्णमूर्ति और एस पी बालसुब्रय्मण्यम जैसे अनेक गायकों के पहले गीत का बोल भी लिखा है. सिगरेट के अत्यधिक सेवन की वजह से वह फेफड़े तथा दिल की बीमारी से ग्रस्त हो गए. आखिरकार 72 साल की उम्र में अंगों के काम करना बंद करने के कारण 30 मार्च 2002 को उनका निधन हो गया.

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