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हमारी शूटिंग देखने कई बार शेर आ जाते थेः आलोक नाथ

ढेर सारी फिल्मों और धारावाहिकों का जाना-पहचाना नाम बन चुके आलोक नाथ यूं तो मुंबई आए थे हीरो बनने लेकिन वक्त और हालात ने ऐसी करवट ली कि थिएटर की राह पकड ली. वे बुनियाद से जुड़े कुछ खास लम्हे कर रहे हैं साझा

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aajtak.in
नरेंद्र सैनीनई दिल्ली, 23 August 2013
हमारी शूटिंग देखने कई बार शेर आ जाते थेः आलोक नाथ

ढेर सारी फिल्मों और धारावाहिकों का जाना-पहचाना नाम बन चुके आलोक नाथ यूं तो मुंबई आए थे हीरो बनने, लेकिन वक्त और हालात ने ऐसी करवट ली कि थिएटर की राह पकड ली. 1987 में जब रमेश सिप्पी ने अपने पहले टेलीविजन धारावाहिक ‘बुनियाद’ की नींव डाली तो जो पहला नाम आया वह था मास्टर हवेली राम का. शर्मीले लेकिन इरादों के पक्के हवेली राम के इस किरदार को जीवंत किया आलोक नाथ ने. हालांकि आलोक नाथ की मानें तो इसका पूरा श्रेय डायरेक्टर रमेश सिप्पी और लेखक मनोहर श्याम जोशी को जाता है.

इस सिलसिले में आलोक नाथ कहते हैं, ‘बुनियाद के दौरान हम नए थे, स्टुडेंट थे लेकिन खुशी है कि रमेशजी जैसा डायरेक्टर मिल गया. उन्होंने हमें इस तरह सिखाया जैसे माता-पिता अपने बच्चों को सिखाते हैं. हम सभी रमेशजी के साथ स्क्रिप्ट पर निर्भर करते थे क्योंकि हम कलाकार हैं और हमारे लिए स्क्रिप्ट ही गीता, कुरान और बाइबल है. दरअसल हर सच्चा कलाकार उसे ही ईमानदारी से निभाकर वाहवाही लूट लेता है. बुनियाद इंसानी रिश्तों के साथ दर्द, जज्‍बात, बिछुडन के साथ कई भवानाओं को समेटे हुए है जो आज भी प्रासंगिक है. मैं समझता हूं उस दौर में ऐसा धारावाहिक बनाना सिर्फ और सिर्फ रमेश जी के ही बूते की बात थी.’

लगभग 27 साल से फिल्मों के साथ टेलीविजन धारावाहिकों के जरिये लगातार दर्शकों की आंखों का तारा बने आलोक नाथ ने वह दौर भी देखा है जब सिर्फ और सिर्फ टेलीविजन और रेडियो था. अपनी लोकप्रियता के साथ बुनियाद की लोकप्रियता का बखान करते हुए आलोक नाथ कहते हैं, ‘जब यह शो शुरू हुआ था तब हफ्ते में मात्र एक दिन आया करता था. सभी को इसका शिद्दत से इंतजार रहा करता था, लेकिन जैसे-जैसे इसकी लोकप्रियता बढी यह हफ्ते में दो बार आने लगा. वह दौर चिट्ठियों का दौर था और हमें प्रशंसकों की ढेरों चिट्ठियां मिलती थी. दूर-दराज के इलाकों में जहां दूरदर्शन पहुंच नहीं पाया था, सिर्फ रेडियो था वहां से भी हमें चिट्ठियां आया करती थी. बहुत मजे के दिन थे वह. सभी नये थे सो जमकर काम करते. अब धारावाहिकों की सफलता के जश्न मनाए जाते हैं लेकिन तब महीने में एक बार जमकर पार्टी होनी पक्की थी.’

शूटिंग के दौरान के खास पलों को यादों में समेटे आलोक नाथ कहते हैं, ‘काफी वक्‍त गुजर गया है. बहुत सी यादें हैं लेकिन लगता है उन्हें बयान करने की बजाए उन्हें दिल के कोनों में आराम करने दिया जाए. हां शूटिंग लोकेशन के बारे में बताना चाहूंगा. ‘बुनियाद’ को लाहौर में दिखाया गया था सो रमेशजी ने फिल्मसिटी के एक बडे हिस्से को लाहौर बना दिया था. उस समय फिल्मसिटी का चेहरा ही कुछ और था. फिल्मसिटी के नाम पर दूर-दूर तक बियांबान जंगल ही जंगल था. कई बार सेट पर जंगली जानवर आ जाया करते. मुझे याद है कई बार तो कुत्तों को मुंह में दबाये शेर आ जाते हमारी शूटिंग देखने. शेर को देखकर पूरे सेट में उथल-पुथल मच जाती लेकिन आज उसे सोचकर हंसी आती है.’

आलोक नाथ ने बुनियाद में 27 साल के प्रौढ़ हवेली राम का सफर 80 साल के बुजुर्ग होने तक निभाया जिसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ बुजुर्ग किरदार ही मिलने लगे. क्या जवानी में ही बूढे होने का दर्द आज भी सालता है? ‘मुझे दुख है इस बात का, लेकिन अब क्या किया जा सकता है. दरअसल कुछ गलत और सही या अच्छा-बुरा नहीं होता. सब अच्छा हुआ और अच्छा हो रहा है. लोग मुझे जानते हैं, दर्शक सराहते हैं और आप मेरा इंटरव्यू ले रहे हैं इससे बडी़ बात मेरे लिए और क्या हो सकती है. मैं खुश हूं....’

मास्टर हवेली राम के किरदार को टेलीविजन के जरिये एक बार फिर जी रहे आलोक नाथ को यदि दर्शक देखना चाहें तो हर गुरुवार और शुक्रवार रात 8:30 बजे दूरदर्शन पर देख सकते हैं. हाल ही में शुरू हुए इस शो ने एक बार फिर दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है.

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