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बरगढ़ लोकसभा सीट: यहां मात्र 11000 वोटों से चूकी थी BJP

Bargarh Lok Sabha constituency बारगढ़ लोकसभा क्षेत्र का विस्तार ओडिशा के बारगढ़ और झारसुगड़ा जिले में है. केन्द्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बारगढ़ जिला ओडिशा के 15 नक्सल प्रभावित जिलों में से एक है. 

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aajtak.in
पन्ना लाल नई दिल्ली, 05 February 2019
बरगढ़ लोकसभा सीट: यहां मात्र 11000 वोटों से चूकी थी BJP जश्न मनाते बीजेपी कार्यकर्ता ( PTI फाइल फोटो)

बारगढ़ ओडिशा का एक प्राचीन शहर है. ऐतिहासिक दस्तावेज और यहां मिले साक्ष्य बताते हैं कि बौद्ध धर्म यहां काफी समय तक फला फूला. बारगढ़ का धनुजात्रा काफी प्रसिद्ध है, इसे दुनिया का सबसे खुला नाटकीय मंच कहा जाता है.  यहां मौजूद नरसिंह नाथ मंदिर ओडिशा की वास्तुकला का बेहतरीन नमूना  है.  

बारगढ़ संसदीय क्षेत्र 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आया. छोटे से वक्त में बारगढ़ में राजनितिक वर्चस्व की मजेदार कहानी देखने को मिली है. 2014 में बीजेपी यहां खाता खोलते खोलते रह गई. इस बार केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान यहां लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. लेकिन बीजद का दावा है कि उसने अपना किला और भी मजबूत किया है, लिहाजा 2019 की जंग और भी रोमांचक रहने की उम्मीद है.

राजनितिक पृष्ठभूमि

परिसीमन के बाद 2009 में इस सीट पर पहली बार वोट डाले गए.  2009 में पूरे देश की तरह इस सीट पर भी कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक रहा था. पार्टी कैंडिडेट संजय भोई चुनाव जीते.  उन्होंने बीजेपी की राधा रानी पांडा को एक लाख से अधिक वोटों से हराया था. 

सामाजिक ताना बाना

बारगढ़ लोकसभा क्षेत्र का विस्तार ओडिशा के बारगढ़ और झारसुगड़ा जिले में है. केन्द्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बारगढ़ जिला ओडिशा के 15 नक्सल प्रभावित जिलों में से एक है.  

2011 की जनसंख्या के मुताबिक यहां की आबादी 20 लाख 60 हजार 433 है. यहां की 81.5 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है, जबकि 18.5 फीसदी जनसंख्या का निवास ग्रामीण और देहातो इलाकों में है. यहां की कुल आबादी में 19.58 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति का है, जबकि 22.21 प्रतिशत भाग अनुसूचित जनजातियों का है.

बारगढ़ लोकसभा क्षेत्र के दायरे में विधान सभा की 7 सीटें आती हैं.  इनके नाम हैं पदमपुर, बीजेपुर, अट्टाबिरा, भटली, ब्रजराजनगर, झारसुगुड़ा.  2014 के विधानसभा चुनाव में पदमपुर और ब्रजराजनगर से बीजेपी जीती थी, जबकि बीजेपुर और झारसुगुड़ा सीट पर कांग्रेस के कैंडिडेट कामयाब रहे थे, बाकी बची तीन सीटों पर बीजू जनता दल ने कब्जा जमाया था.  हालांकि बीजेपुर सीट से कांग्रेस विधायक की मौत के बाद  फरवरी  2018 में हुए उपचुनाव में यहां से बी जे डी ने जीत हासिल की थी. 

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 में बारगढ़  में कुल वोटर्स की संख्या 14 लाख 30 हजार 717 थी. यहां पर पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 51 हजार 140 थी, अगर महिला वोटर्स का आंकड़ा देखे तो ये संख्या 6 लाख 79 हजार 577 थी.

2014 का जनादेश

2014 के सियासी रण में यहां रोमांचक टक्कर देखने को मिली. नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर सवार बीजेपी ने अपेक्षाकृत इस कमजोर सीट पर बीजेडी को जोरदार चुनौती दी. हालांकि बीजेपी ये सीट हार गई, लेकिन हार का फासला बेहद कम था. बीजद उम्मीदवार डॉ प्रभाष कुमार सिंह को यहां 383230 वोट मिले. जबकि दूसरे नम्बर पर रही बीजेपी को 372052 वोट मिले. इस तरह बीजेडी और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर मात्र 11178 रहा.  2009 में इस सीट से विजयी रहने वाली कांग्रेस तीसरे नम्बर आ गई. पार्टी कैंडिडेट संजय भोई को 274610 वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां मतदान का प्रतिशत 78.71% रहा.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

सांसद प्रभाष कुमार सिंह की लोकसभा में ये पहली पारी है. 54 साल के डॉ प्रभाष रिसर्च स्कॉलर रहे हैं. उन्होंने संभलपुर और उत्कल यूनिवर्सिटी से एम ए और पी एचडी की शिक्षा ली है. इतिहास,संस्कृति और पुरातत्व पर इनके कई शोध प्रकाशित हो चुके हैं. प्रभाष कुमार ओडिशा हिस्ट्री कांग्रेस के आजीवन सदस्य हैं.  

बारगढ़ सांसद डॉ प्रभाष कुमार लोकसभा की 321 में से 281 बैठकों में  उपस्थित रहे हैं. उन्होंने सदन में 151 सवाल पूछे. वह लोकसभा की 57 डिबेट्स में भी हाजिर रहे. डॉ प्रभाष कुमार ने 2 निजी बिल भी संसद में पेश किया है.

सांसद विकास निधि की बात करें तो उन्होंने पिछले 5 साल में अपने कोटे से 22.16 करोड रुपये विकास के अलग अलग मद पर खर्च किए हैं.

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