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बहन की शादी में गाए गाने से खुली मुकेश की किस्मत, ऐसे मिला बॉलीवुड में मौका

सिंगर मुकेश ने अपने मधुर गीतों और सुरीली आवाज से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई. वे 60-70 के दशक की त्रिमूर्ति में शामिल थे जिसके बाकी दो सिंगर थे किशोर और रफी. मुकेश साहब के जन्मदिन पर बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से.

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aajtak.inनई दिल्ली, 22 July 2019
बहन की शादी में गाए गाने से खुली मुकेश की किस्मत, ऐसे मिला बॉलीवुड में मौका मुकेश

सिंगर मुकेश का जन्म 22 जुलाई, 1923 को लुधियाना के जोरावर चंद माथुर और चांद रानी के घर हुआ था. अपने मधुर गीतों और सुरीली आवाज से उन्होंने इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई. वे 60-70 के दशक की त्रिमूर्ति में शामिल थे जिसके बाकी दो सिंगर थे किशोर और रफी. मुकेश साहब के जन्मदिन पर बता रहे हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से.

ऐसे मिला फिल्मों में गाने का मौका

उनकी बड़ी बहन संगीत की शिक्षा लेती थीं और मुकेश बड़े चाव से उन्हें सुना करते थे. उनके एक दूर के रिश्तेदार थे मशहूर अभिनेता मोतीलाल. मोतीलाल का योगदान मुकेश के फिल्मीं करियर को बनाने में उल्लेखनीय रहा. मुकेश अपनी बहन की शादी में गाना गा रहे थे. इस कार्यक्रम में मोतीलाल भी थे. मोतीलाल को मुकेश की आवाज ने प्रभावित किया. मोतीलाल उन्हें मुंबई ले गए. वहीं अपने घर में रहने की जगह दी. साथ ही मुकेश के लिए संगीत रियाज का पूरा इंतजाम किया.

कहीं दूर जब दिन ढल जाए, किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार', 'सजन रे झूठ मत बोलो', 'मेरा जूता है जापानी', 'दोस्त दोस्त ना रहा' और एक प्यार का नगमा है जैसे सुपरहिट गाने मुकेश ने गाए हैं जो आज भी काफी मशहूर हैं. मुकेश ने राज कपूर की इतनी फिल्मों में गाने गए कि उन्हें राज कपूर की आवाज के नाम से जाना जाने लगा. राज कपूर को जब उनकी मौत की खबर मिली तो उनके मुंह से आवाज भी नहीं निकली थी. मानो राज की जिंदगी किसी ने छीन ली हो. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में राज ने कहा था मुकेश के जाने से मेरी आवाज और आत्मा दोनों चली गई.

निधन से बेहद दुखी हुए थे राज कपूर

मुकेश की अचानक मौत से फिल्म इंडस्ट्री समेत देशभर में शोक की लहर दौड़ पड़ी थी. राज कपूर की फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' के गाने 'चंचल निर्मल शीतल' की रिकॉर्डिंग पूरी करने के बाद मुकेश अमेरिका में एक कंसर्ट में परफॉर्म करने चले गए, जहां 27 अगस्त 1976 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. ये कहना गलत नहीं होगा कि उनकी आवाज आज भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कहीं ना कहीं हमसे टकराती है.

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