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Film Review: 'बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम'

'चॉकलेट', 'धन धना धन गोल' और 'हेट स्टोरी' जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने अब 'बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम' फिल्म बनाई है. अच्छी स्टारकास्ट के साथ बनाई गई उनकी ये फिल्म आइए जानते हैं कैसी है.

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aajtak.in
पूजा बजाज / आर जे आलोक नई दिल्ली, 17 May 2016
Film Review: 'बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम'

फिल्म का नाम: बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम
डायरेक्टर: विवेक अग्निहोत्री
स्टार कास्ट: अनुपम खेर, पल्लवी जोशी, अरुणोदय सिंह, माही गिल, आँचल द्विवेदी
अवधि: 1 घंटा 55 मिनट
सर्टिफिकेट: A
रेटिंग: 2 स्टार

'चॉकलेट', 'धन धना धन गोल' और 'हेट स्टोरी' जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने अब 'बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम' फिल्म बनाई है. अच्छी स्टारकास्ट के साथ बनाई गई उनकी ये फिल्म आइए जानते हैं कैसी है:

कहानी
यह कहानी है विक्रम पंडित (अरुणोदय सिंह) की, जो दिल्ली और विदेश में पढ़ाई के बाद अब हैदराबाद से एमबीए कर रहा है. कॉलेज में विक्रम के प्रोफेसर रंजन बटकी (अनुपम खेर) भी हैं जो उसे एक सीक्रेट गेम के तहत 'बुद्धा इन अ ट्रैफिक जैम' नामक फाइल देते हैं, जब विक्रम उस फाइल को पढ़ता है तो उसके भीतर से एक क्रांतिकारी बाहर निकलता है जो समाज में परिवर्तन लाने की कोशिश में लग जाता है. फिर कहानी में चारु सिद्धू (माही गिल) और शीतल पटकी (पल्लवी जोशी) की भी एंट्री होती है और कई सारे उतार-चढ़ावों के बीच आखिरकार एक रिजल्ट देने की कोशिश की गई है.

स्क्रिप्ट
फिल्म की कहानी अलग-अलग चैप्टर के हिसाब से दर्शाई गई है, जिसमें माओवादी, नक्सल, पॉलिटिक्स, समाज व्यवस्था के ऊपर कई सारे सवाल किए गए हैं. बस्तर जिले के सीन से फिल्म की शुरुआत होती है जो काफी उम्दा नजर आती है. लेकिन धीरे-धीरे फिल्म में लंबे-लंबे संवाद आने लगते हैं जो एक अलग तरह की ऑडियंस को ही आकर्षित कर पाएंगे. सिनेमेटोग्रॉफी अच्छी है. हालांकि की फिल्म में गांव के दृश्य ज्यादा शामिल किए गए हैं फिर भी होने फिल्म ज्यादा अर्बन लगती है.

अभिनय
फिल्म में अनुपम खेर , माही गिल ने अच्छा काम किया है, कई दिनों के बाद फिल्मों में आगमन करने वाली पल्लवी जोशी का काम भी सराहनीय है. वहीं एक्टर अरुणोदय सिंह ने काम अच्छा किया है लेकिन बार-बार उनकी आवाज आपके कानो में जाती है तो एक वक्त के बाद बोरियत सी होने लगती है.

संगीत
फिल्म में लोक गीत को अच्छे से पिरोया गया है, साथ ही 'चंद रोज और मेरी जान' वाला गाना भी सुनने में अच्छा लगता है.

क्यों देखें
यदि आपको मुद्दों पर आधारित फिल्में भाती हैं, तो जरूर देखिए.

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