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अब घिसट-घिसटकर चल रहा है TV का सुपरहिट शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा'

तारक मेहता का उल्टा चश्मा के हर एक कैरेक्टर ने लोगों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से शो को देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि ये शो धीरे-धीरे अपना चार्म खो रहा है. जाहिर सी बात है कि इन दिनों शो की पॉपुलैरिटी फीकी पड़ रही है.

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मोनिका गुप्तानई दिल्ली, 16 May 2019
अब घिसट-घिसटकर चल रहा है TV का सुपरहिट शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' शो के एक एपिसोड में जेठालाल और उनके पिता (फोटो सोर्स : तारक मेहता का उल्टा चश्मा)

जब भी भारत में टीवी के सबसे पॉपुलर शोज का  जिक्र होगा, टॉप लिस्ट में 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' का भी नाम आएगा. इस शो की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. बताने की जरूरत नहीं कि 10 साल से चल रहे इस शो ने टीवी की दुनिया में एक अलग ही मुकाम हासिल किया है.

कुछ यूं कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा के हर एक कैरेक्टर ने लोगों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से शो को देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि ये शो धीरे-धीरे अपना चार्म खो रहा है. जाहिर सी बात है कि इन दिनों शो की पॉपुलैरिटी फीकी पड़ रही है. शो में चल रहा प्लॉट फैंस को प्रभावित करते में असफल नजर आ रहा है. टीआरपी में गिरावट एक दूसरी बात तो है ही.

लेकिन सोचने वाली बात यह है ऐसा हो क्यों रहा है? पूरे परिवार को एक साथ 8.30 बजे टीवी के आगे बैठने के लिए मजबूर करने वाला शो, अब बेअसर साबित हो रहा है. हालांकि, शो को बीते दिनों में कई झटके लगे हैं. डेढ़ साल से शो की फेमस किरदार दयाबेन (दिशा वकानी) का गायब होना, डॉक्टर हाथी का किरदार निभा रहे एक्टर कवि कुमार आजाद की अचानक मौत हो जाना, सोनू का रोल प्ले करने वाली एक्ट्रेस निधि भानुषाली का शो छोड़ना कुछ ऐसे पॉइंट्स है जिसने सीरियल पर असर डाला है. शो के मेकर्स जैसे-तैसे जुगाड़ में लगे हैं कि इसे डाउनफॉल से बचाया जाए. लेकिन जो कोशिश फिलहाल शो के एपिसोड्स में दिख रही है वो नाकाफी है.

शो में घिसे-पिटे प्लॉट दिखाए जा रहे हैं. कभी-कभी तो यूं लगता है जैसे शो अपनी टैग लाइन 'हसंते रहिए, खुश रहिए' से भटक रहा है. पहले शो में हर फंक्शन को बेहद शानदार तरीके से दिखाया जाता था, इसमें मजा भी आता था, मगर अब शो की स्क्रिप्ट में पंच नजर नहीं आते हैं. पहले सीरियल का एक-एक डायलॉग हंसने के लिए मजबूर करते थे अब पूरे एपिसोड में हंसने के लिए डायलॉग ढूंढ़ने पड़ते हैं.

बीते दिनों शो में कई बेतुके से प्लॉट दिखाए गए. जबरदस्ती चीजों को रबर की खींचा जा रहा है. आउटडोर टूर के नाम पर किरदारों का सिंगापुर जैसे शहर में घूमने का प्लॉट भी ठंडा साबित हुआ. अब तो पोपटलाल की शादी और सपने वाला ट्रैक भी बेजान नजर आ रहा है. दो-तीन किरदारों का शो से गायब होना, जैसे सीरियल की हंसी का कहीं गायब हो जाना मालूम पड़ रहा है. शो के जैसे हालात हैं उसमें सीरियल के प्रोड्यूसर असित मोदी के लिए अपने फैंस को बांधे रखना बेहद मुश्किल दिख रहा है. जिस तरह से शो की स्टोरीलाइन चल रही है, उसे देखकर यह भी आशंका है कि दयाबेन की वापसी भी कहीं बेअसर न साबित हो जाए.

कॉम्पटिशन के इस दौर में असित मोदी को शो को बचाने के लिए नयापन लाना जरूरी हो गया है. क्योंकि टीवी पर इन दिनों और भी कई शो कड़ी टक्कर देने के लिए खड़े हैं और ऐसे में दर्शक आसानी से दूसरे शोज की तरफ शिफ्ट हो जाता है. देखा जाए तो शो की स्क्रिप्ट में वक्त रहते बदलाव की जरूरत हो गई है, ताकि तारक मेहता अपने चार्म को बरकरार रख सके और इसे पसंद करने वाले कट्टर दर्शकों के मनोरंजन का जायका बना रहे.

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