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अनुराधा पौडवाल से लेकर कुमार सानू तक, रामायण के लिए इन सिंगर्स ने दी आवाज

हम आपको उन सिंगर्स और उन गानों के बारे में भी बताएंगे, जिन्हें इन सिंगर्स ने गाया है और रामायण की कामयाबी में अपना योगदान दिया है. ये वो सिंगर्स हैं जिनका बॉलीवुड में भी काफी नाम है. लेकिन सीरियल रामायण में दिए उनके योगदान के लिए उन्हें कोई जानता नहीं है.

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aajtak.in
aajtak.in मुंबई, 15 May 2020
अनुराधा पौडवाल से लेकर कुमार सानू तक, रामायण के लिए इन सिंगर्स ने दी आवाज अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया

रामायण की कामायाबी में जितना हाथ उसके पात्रों का है, उतना ही रामानंद सागर के निर्देशन का है और अच्छी स्क्रिप्टिंग है. साथ ही शो को हिट कराने में संगीत ने भी बड़ी भूमिका निभाई है.

जब भी रामायण के संगीत की बात होती है, रविन्द्र जैन का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि रविन्द्र जैन सीरियल रामायण के म्यूज़िक कम्पोजर थे. इसके अलावा उन्होंने रामायण के कई बेहतरीन गानों को अपनी आवाज भी दी है, लेकिन अगर हम ये कहें कि सारे गाने रविन्द्र जैन ने ही गाए हैं तो ये कहना सरासर गलत होगा क्योंकि ज्यादातर लोगों को ऐसा ही लगता है.

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि रामायण सीरियल में एक दो नहीं बल्कि कई भारतीय गायकों ने अपनी आवाज दी है. ये वो गायक हैं जिन्हें आप लोग बहुत अच्छे से पहचानते हैं..

हम आपको उन सिंगर्स और उन गानों के बारे में भी बताएंगे, जिन्हें इन सिंगर्स ने गाया है और रामायण की कामयाबी में अपना योगदान दिया है. ये वो सिंगर्स हैं जिनका बॉलीवुड में भी काफी नाम है. लेकिन सीरियल रामायण में दिए उनके योगदान के लिए उन्हें कोई जानता नहीं है.

1) कुमार सानू– पापियों के नाश को, धर्मं के प्रकाश को, रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली, श्री रामजी की सेना चली, रामजी की सेना चली, हर हर महादेव....

ये गाना तो आपको याद ही होगा, ये तब का गाना है जब राम जी की सेना लंका पहुंचने के लिए सेतु का निर्माण करती है, और इस गाने को अपनी आवाज दी थी बॉलीवुड के फेमस सिंगर कुमार सानू ने. वैसे तो कुमार सानू ने हजारों गाने गाए हैं, लेकिन फिल्म आशिकी (1990) के गानों के लिए उन्हें विशेष तौर पर याद किया जाता है और कुमार सानू को संगीत के क्षेत्र में दिए उनके शानदार योगदान के लिए साल 2009 में पद्मश्री से सम्मानित भी किया जा चुका है.

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2) कविता कृष्णमूर्ति- हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की, ये रामायण है, पुण्य कथा श्रीराम की

क्या आपने उत्तर रामायण का ये गाना सुना है, बिल्कुल सुना होगा क्योंकि यही वो गाना है जो राम को उनके बिछड़े हुए बेटों लव और कुश से मिलवाता है और इसी गाने के बाद सीता माता आखिरी बार राज दरबार में आती हैं और धरती में समा जाती हैं.

इस गाने को अपनी आवाज दी थी पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कविता कृष्णमूर्ति ने. कविता कृष्णमूर्ति को हिन्दी, इंग्लिश, तमिल, तेलगु, कन्नड़, मराठी, गुजराती,बंगाली और नेपाली जैसी अनेकों भाषाओं में उनकी शानदार गायिकी के लिए जाना जाता है. वैसे तो कविता के गानों की लिस्ट बहुत लंबी है लेकिन उनके एवरग्रीन सॉन्ग की बात करें तो वो हैं फिल्म (खामोशी - द म्यूज़िकल) का सॉन्ग आज मैं ऊपर, फिल्म (याराना) का गाना मेरा पिया घर आया ओ रामजी, फिल्म (1942 : अ लव स्टोरी) का गाना प्यार हुआ चुपक से और फिल्म (हम दिल दे चुके सनम) का टाइटल सॉन्ग.

3) अनुराधा पौडवाल– कब दर्शन देंगे, राम परम हितकारी, कब दर्शन देंगे दीन हितकारी, रस्ता देखत सबरी की उम्र गई सारी.

ये वो भजन है जिसमें भक्ति की पराकाष्ठा है, जहां शबरी अपने प्रभु श्रीराम के आने की प्रतीक्षा करती है और आंसुओं और फूलों से उनके स्वागत की तैयारी करती है. भगवान के लिए भक्त की बेसब्री का प्रतीक बना ये भजन वाकई दिल को छू लेता और मन को भावविभोर कर देता है.

इस भजन को अपने बोल दिए थे फेमस गायिका अनुराधा पौडवाल ने.अनुराधा जी ढेरों भक्ति गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुकी हैं और ज्यादातर भक्ति संगीत ही गाना पसंद करती हैं. लेकिन अलावा वो बॉलीवुड की भी बहुत सारी फिल्मों में गाने गा चुकी हैं. अनुराधा पौडवाल को गायकी के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए साल 2017 में पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

4) महेन्द्र कपूर- तीनो लोक में कोई नहीं

कपि आपको मार्ग रोकने हारो को नहीं जानत है जग में

कपि संकट मोचन नाम तिहारो

रामभक्त हनुमान जी पर फिल्माए गए इस शानदार भजन को अपनी आवाज दी थी जाने माने सिंगर महेन्द्र कपूर जी ने. ये वो भजन था जब वानर सेना समुद्र के तट पर आकर रुक जाती है और आगे जाने की ताकत हनुमान जी को छोड़कर किसी और में नहीं होती है. ऐसे वक्त में वानर सेना इस भजन के द्वारा हनुमान को उनकी शक्ति का अहसास कराती है, जिसके बाद हनुमान जी विशाल रूप करके उड़ जाते हैं और समुद्र पार कर माता सीता की सेवा में पहुंच जाते हैं.

महेन्द्र कपूर द्वारा गाया गया ये भजन आज भी हनुमान मंदिरों में सुना जाता है और भक्तगण बड़े ही इस प्रेम से इसे गाते भी हैं.

महेन्द्र कपूर ने वैसे तो ना जाने कितनी फिल्मों में अपनी गायकी का जादू बिखेरा है, लेकिन अगर उनके कुछ एवरग्रीन गानों की बात की जाए तो वो हैं फिल्म गुमराह (1963) का गीता चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों, फिल्म हमराज़ (1967) का गाना नीले गगन के तले, फिल्म (उपकार) का गाना मेरे देश की धरती सोने उगले सुपरहिट हुए थे. इसके अलावा बी आर चोपड़ की फेमस सीरियल महाभारत के लिए उन्होंने कई गीत गाए थे, लेकिन 2008 में 74 साल की उम्र में महेन्द्र कपूर का देहांत हो गया.

5) सुरेश वाडेकर -

डमरू पाणि शूल धारी

हे नटरज नमो नमः

शीश गंग भस्म अंग

करते धारण नमो नमः

भगवान राम द्वारा शिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को समर्पित इस भजन को विख्यात संगीतकार सुरेश वाडेकर ने अपनी आवाज से सुशोभित किया है. ये वो मौका था जब राम अपनी भाइयों के साथ गुरुकुल में पढ़ाई करने गए थे और वो शिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव के इस भजन को गाते हैं.

सुरेश वाडेकर मुख्य रूप से हिंदी और मराठी गाने गाते हैं लेकिन इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी, कोंकणी और उड़िया गानों में भी अपनी आवाज दी है. सुरेश वाडेकर भजन गीतों के लिए जाने जाते हैं और उनके कई मराठी भजन भक्तों को काफी पसंद हैं. वर्ष 2011में उन्हे श्रेष्ठ पार्श्वगायक की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था.

6) मोहम्मद अजीज –

विरह व्यथा से, व्यतीत द्रवित हो

वन वन भटके राम

अपनी सिया को, प्राण पिया को

पग पग ढूंढे राम

ये विरह का वो गीत है जब दुष्ट रावण माता सीता का हरण कर लेता है और राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता जानकी की तलाश में जंगलों में भटकते हैं. इस गाने के दर्द को हर प्रेमी महसूस कर सकता है, और इसलिए ये गाना राम भक्तों को इतना पसंद है.

लेकिन आप जानते हैं कि ये गीत किसने गाया था, इस गीत को अपनी आपनी आवाज़ दी थी मशहूर सिंगर मोहम्मद अजीज ने जिन्होंने अपनी शानदार गायकी से इस गाने में जैसे प्राण फूंक दिए थे. मोहम्मद अजीज ने ज्यादातर बंगाली और उड़िया फिल्मों में गाने गाए हैं, लेकिन अगर बॉलीवुड की बात की जाए तो उन्होंने 90 के दशक में कई हिंदी गानों में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा है. 2018 में मोहम्मद अजीज का देहांत हो गया था.

7) नितिन मुकेश – विस्मित होकर गरुण प्रभु के मुख की ओर निहारे

ये कैसे बंधन, ये कैसे बंधन बीच बंधे हो,

बंधन काटन हारे,

ये वो भजन है जब संसार के बंधन काटने वाले प्रभु श्रीराम खुद नागपाश के बंधन में बंध जाते हैं और हनुमान जी गरुणराज को नागपाश काटने के लिए लेकर आते हैं. इतना सुंदर भजन, इतनी मीठी आवाज के पीछे सुरसम्राठ मुकेश के बेटे नितिन मुकेश की गायकी का जादू है. नितिन मुकेश अपने पिता मुकेश की तरह की बॉलीवुड की ढेरों फिल्मों में अपने सुरों का कमाल दिखा चुके हैं और उनके बेटे नील नितिन मुकेश एक फेमस बॉलीवुड स्टार हैं.

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