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मैं भगवान नहीं इंसान हूं: सचिन तेंदुलकर

दुनिया भर के उनके क्रिकेट प्रशंसक उन्हें क्रिकेट का भगवान कहते हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर ने कहा कि वह भी इंसान हैं जिन्हें अपने देश की तरफ से खेलना पसंद है.

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aajtak.in
मोहित पारीक नई दिल्‍ली, 15 November 2009
मैं भगवान नहीं इंसान हूं: सचिन तेंदुलकर

दुनिया भर के उनके क्रिकेट प्रशंसक उन्हें क्रिकेट का भगवान कहते हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर ने कहा कि वह भी इंसान हैं जिन्हें अपने देश की तरफ से खेलना पसंद है.

मुझे क्रिकेट से प्‍यार है
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रविवार को 20 साल पूरे करने वाले तेंदुलकर ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी होती है कि इतने अधिक लोग मेरे कैरियर का अनुसरण करते हैं लेकिन मैं भगवान नहीं हूं. मुझे क्रिकेट से प्यार है और भारत की तरफ से खेलना पसंद करता हूं.' भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि तेंदुलकर इस खेल के महानतम खिलाड़ी ही नहीं बल्कि क्रिकेट के भगवान हैं. संयोग से पूर्व ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडन ने भी एक बार कहा था, 'मैंने ईश्वर को देखा है, वह भारत की तरफ से चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करता है.' तेंदुलकर ने कहा कि वह महज क्रिकेटर है जो लोगों से मिल रहे समर्थन और प्यार का पूरा लुत्फ उठाते हैं. उन्होंने कहा 'मैं भी इंसान हूं लेकिन मेरे पीछे एक बड़ी शक्ति, बड़ी टीम है. मेरे साथी खिलाड़ी, परिवार, बच्चे, दोस्त और प्रशंसक हैं. मैं जब बल्लेबाजी के लिये क्रीज पर जाता हूं तो मैं उनकी तरफ से खेलता हूं.'

इतने लंबे समय तक खेलने के बारे में सोचा नहीं था
उन्होंने कहा, 'मैंने देश के लिये इतने लंबे समय तक खेलने के बारे में नहीं सोचा था लेकिन हर तरफ से मिलने वाले सहयोग के लिये शुक्रिया जिससे मैं अपने देश के लिये 20 साल तक खेल पाया.' तेंदुलकर ने अपने 20 साल के अंतरराष्ट्रीय कैरियर में बल्लेबाजी के कई रिकॉर्ड तोड़े लेकिन उन्होंने कहा कि इस दौरान दो बार उन्हें लगा कि उनका कैरियर समाप्त हो गया है. ठीक 20 साल पहले 15 नवंबर 1989 को कराची में खेले गये अपने पहले टेस्ट मैच के बारे में इस स्टार बल्लेबाज ने कहा 'पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद मुझे ऐसा लगा. मैंने केवल 15 रन बनाये और मैंने सोचा कि क्या मुझे अगले मैच में खेलने का मौका मिलेगा लेकिन मुझे यह मौका मिला. जब मैंने दूसरे मैच में 58 या 59 रन बनाये तो मुझे बड़ी राहत मिली.' तेंदुलकर ने कहा, 'दूसरी बार तब जब मैं टेनिस एल्बो चोट से पीड़ित था. यह बहुत मुश्किल समय था. मैं रात को सो नहीं पाता था. मैं क्रिकेट गेंद को हिट नहीं कर पा रहा था और मुझे लगा कि मेरा कैरियर समाप्त हो गया है.'

इंग्‍लैंड के खिलाफ चेन्‍नई में खेली गई पारी सर्वश्रे़ष्‍ठ
तेंदुलकर ने पिछले साल चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ 140 रन की मैच विजेता पारी को ऑस्ट्रेलियाई तेज आक्रमण के खिलाफ पर्थ में 1991 में खेली गयी 119 रन की पारी से उपर रखा क्योंकि यह शतक उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के बाद लगाया था. उन्होंने कहा 'मैं कह सकता हूं कि पर्थ की पारी मेरी चोटी की पारियों में शामिल है लेकिन पिछले साल चेन्नई में मैंने जो पारी खेली वह सभी से उपर है क्योंकि इस मैच से कुछ दिन पहले मुंबई में भयावह घटना घटी थी.' तेंदुलकर ने कहा, 'कई लोगों ने अपने करीबी लोगों को गंवा दिया था और इसकी भरपायी नहीं की जा सकती. लेकिन इस जीत से हम कुछ पलों के लिये उनका ध्यान बांटने में सफल रहे.'

कप्‍तानी का पूरी तरह लुत्‍फ उठाया
तेंदुलकर से जब पूछा गया कि क्या उनका पुत्र अर्जुन भी उनके नक्शेकदम पर चलकर क्रिकेट खेलेगा, उन्होंने कहा 'वह अभी 10 साल का है और मैं उस पर क्रिकेट खेलने का दबाव नहीं बनाउंगा. यदि उसे क्रिकेट खेलनी है तो पहले उसे इस खेल को अपने दिल में बसाना होगा और फिर इसके बारे में सोचना होगा. यह बात सिर्फ अर्जुन ही नहीं बल्कि सभी युवाओं पर लागू होती है.' उन्होंने कहा 'अभी तो वह छक्के जड़ना पसंद करता है. ट्वेंटी-20 का जमाना है.'  तेंदुलकर के शानदार कैरियर में कप्तानी के उनके दो कार्यकाल अच्छे नहीं कहे जा सकते लेकिन इस स्टार बल्लेबाज ने कहा कि उन्होंने इस अनुभव का पूरा लुत्फ उठाया. उन्होंने कहा, 'मुझे कभी नहीं लगा कि कप्तानी बड़ा बोझ है. निश्चित तौर पर देश की कप्तानी करना सम्मान है. यह अलग तरह का अनुभव है. हमने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच जीता. टाइटन कप जीता और टोरंटो में पाकिस्तान को हराया लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ बारबाडोस में 120 रन का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाये.' तेंदुलकर ने कहा, 'मैंने इस दौर का भी लुत्फ उठाया और इससे मैंने काफी कुछ सीखा.'

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