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Mrs. Serial Killer Review: क्राइम पेट्रोल के डायलॉग्स, ढीला स्क्रीनप्ले, जैकलीन की नई फिल्म में नहीं है दम

जैकलीन फर्नांडिस की नेटफ्लिक्स ओरिजिनल फिल्म मिसेज सीरियल किलर रिलीज हो गई है और हम बता रहे हैं कि इस फिल्म में आपको क्या देखने को मिलेगा. पढ़िए हमारा रिव्यू.

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aajtak.in
पल्लवी नई दिल्ली, 04 May 2020
Mrs. Serial Killer Review: क्राइम पेट्रोल के डायलॉग्स, ढीला स्क्रीनप्ले, जैकलीन की नई फिल्म में नहीं है दम जैकलीन फर्नांडिस
फिल्म: Mrs. Serial Killer
कलाकार: Jacqueline Fernandez, Manoj Bajpayee, Mohit Raina
निर्देशक: Shirish Kunder

जैकलीन फर्नांडिस की फिल्म मिसेज सीरियल किलर का ऐलान जब हुआ था, तब उनके लुक को देखकर और कहानी के बारे में जानकर फैन्स की दिलचस्पी और उत्साह बढ़ा था. नेटफ्लिक्स की इस फिल्म का इंतजार सभी को काफी समय से था और अब जब ये आ गई है, तो हमें अपनी सोच पर शक होने लगा है.

हिंदी सिनेमा में मिस्ट्री थ्रिलर फिल्मों के बारे में सोचें तो तापसी पन्नू की बदला, विद्या बालन की कहानी, उर्मिला मातोंडकर की कौन, रानी की मर्दानी 2 जैसे कई नाम आपके दिमाग में आते हैं. फिर एक ऐसी मूवी नेटफ्लिक्स पर आती है, जो लॉकडाउन में बीत रहे आपके खराब दिनों को और खराब बना देती है. जैकलीन की मिसेज सीरियल किलर वही फिल्म है.

ये है फिल्म की कहानी?

बाकी बातें बाद में पहले बता दूं कि ये फिल्म शिरीष कुंदर ने खुद लिखी है, इसका निर्देशन, क्रिएशन और यहां तक कि म्यूजिक भी उन्होंने खुद ही दिया है. जो नहीं होना चाहिए था! अब करते हैं कहानी की बात. कहानी असल में ये है कि शहर के एक मशहूर गायनोलॉजिस्ट को सीरियल किलिंग के जुर्म में पुलिस गिरफ्तार कर लेती है. ऐसे में उसकी पत्नी अपने निर्दोष पति को बचाने और उसकी बेगुनाही साबित करने के लिए कुछ भी कर सकती है.

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I’d like you guys to meet Dr. Mrityunjoy Mukherjee. A doctor, a husband, and a murderer? Very happy to share that the trailer will be out at 12 PM on @netflix_in on 17 April. Mrs. Serial Killer premieres May 1.

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परफॉर्मेंस

फिल्म में जैकलीन फर्नांडिस ने सोना का किरदार निभाया है और उनके पति डॉक्टर मृत्युंजॉय मुखर्जी के रोल में हैं मनोज बाजपेयी. मृत्युंजॉय उर्फ जॉय एक बड़ा मैटरनिटी होम चलाते हैं और उनकी पत्नी सोना एक पुलिसवाले इमरान शाहिद (मोहित रैना) से परेशान हैं. इमरान और सोना का एक राज है, जो किसी को नहीं पता. साथ ही इमरान, जॉय को जेल भेजने की पूरी कोशिश में लगा हुआ है. वो कामयाब भी होता है लेकिन फिर कहानी में ऐसा मोड़ आता है कि आप थोड़ा सा चौंक जाते हैं.

इस फिल्म में चौंकने वाली बहुत सी बातें हैं वैसे. जैसे जैकलीन फर्नांडिस इतने अच्छे सेटअप वाले सीन को इतना खराब कैसे कर सकती हैं. मनोज बाजपेयी ने इस फिल्म को करने के लिए हां क्यों किया. मोहित रैना के किरदार को फिल्म के बीच में अचानक क्या हो गया? और भी बहुत कुछ. पर हम परफॉर्मेंस की बात कर लेते हैं. जैकलीन की डायलॉग डिलीवरी अभी भी उतनी ही खराब है, जितनी उनके करियर के शुरूआती दिनों में हुआ करती थी. उनकी एक्टिंग में कोई दम नहीं है. इस फिल्म में उनकी चीखें अच्छी निकली हैं बस और वो काफी खूबसूरत भी दिखी हैं.

इससे पहले जैकलीन ने नेटफ्लिक्स की ही फिल्म ड्राइव में भी काम किया था. खुद को बेकार से बेकार फिल्में करने का चैलेंज जैकी क्यों दे रही हैं, ये बात समझ नहीं आ रही.

मनोज बाजपेयी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बढ़िया कलाकारों में से एक हैं. इस फिल्म में भी उन्हें शाइन तो करना ही था और उन्होंने किया भी. लेकिन एक एक्टर पूरी फिल्म नहीं बचा सकता ना. उसके किरदार में लेयर्स थीं, जिन्हें परत-दर-परत खोला जाता तो कमाल हो जाता. ऐसे ही इमरान शाहिद के रोल में मोहित रैना ने अच्छा काम किया है. लेकिन वो भी इस फिल्म को बचा नहीं पाए. वो खुद अपनी परफॉर्मेंस को अंत तक संभाल ही नहीं पाए.

शिरीष कुंदर का डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक....

डायरेक्शन से लेकर म्यूजिक और बाकी सबके लिए एक ही इंसान जिम्मेदार है और वो हैं शिरीष कुंदर. शिरीष कुंदर ने इससे पहले सिनेमा को जान-ए-मन और जोकर (अक्षय कुमार वाली, सपने ना देखो ज्यादा) दी हैं. इन दोनों फिल्मों का हश्र बॉक्स ऑफिस पर क्या हुआ था और दर्शकों की इन्हें लेकर क्या राय है, सबको पता है. लेकिन जब कोई निर्देशक अच्छी मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म का आईडिया जनता को परोसता है तो उससे उम्मीद अच्छी ही की जाती है.

मिसेज सीरियल किलर को लेकर शिरीष कुंदर से उम्मीद लगाना ही थ्रिलर फिल्मों के फैन्स की गलती है. फिल्म की स्क्रिप्ट बेहद कमजोर है. उन्होंने अपने किरदारों को ढंग से दिखाया ही नहीं. जैकलीन फिल्म में एक टीचर हैं, किस चीज की, कहां पढ़ाती हैं, अभी काम कर रही है या नहीं कुछ नहीं दिखाया. मनोज बाजपेयी के लिए एक बहुत सॉलिड बैकस्टोरी का आईडिया है लेकिन उसे फिल्म में क्यों ही दिखाना?! ऐसी बहुत सी चीजें इस फिल्म को बद से बद्तर बनाती हैं.

शिरीष के डायरेक्शन में कोई दम नहीं है और डायलॉग्स तो पक्का क्राइम पेट्रोल के किसी राइटर से लिखवाए गए हैं. क्योंकि बहुत इंटेंस सीन में आपको हंसी दो ही चीजों से आती है, एक्टर्स की खराब एक्टिंग और दूसरा बेकार डायलॉग, यहां आपको दोनों मिलेंगे. एक उदाहरण के लिए सुन लीजिए, मनोज बाजपेयी के किरदार को सोना (जैकलीन) जॉय कहकर पुकारती हैं. ऐसे में वो गुस्सा हो जाते हैं और कहते हैं- 'तुम मुझे जॉय जॉय क्यों बुलाती रहती हो, मैं कोई आइसक्रीम हूं?'

सिनेमेटोग्राफी काफी सही है. सुंदर लोकेशन्स को दिखाया गया है. हालांकि जिन सीन्स के लिए सेट्स तैयार किए गए हैं, वो आपको देखते ही समझ आ जाएंगे. म्यूजिक की बात करें तो इतना खराब म्यूजिक शायद ही किसी फिल्म का होगा. बैकग्राउंड स्कोर की तो बात ही मत करो. तो अगर आपको अपना वीकेंड, लॉकडाउन में बीत रहा मुश्किल समय और मूड खराब नहीं करना है तो मिसेज सीरियल किलर आपके लिए नहीं बनी है.

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