एडवांस्ड सर्च

Advertisement

मैकेनिक बने तो कभी फोन ऑपरेटर, लेकिन किस्मत ने बनाया नामी गीतकार

आनंद बख्शी का नाम सुनते ही उनके ल‍िखे कई गीत याद आ जाते हैं. जानिए उनके बारे में दिलचस्प बातें.
मैकेनिक बने तो कभी फोन ऑपरेटर, लेकिन किस्मत ने बनाया नामी गीतकार आनंद बख्शी
aajtak.in [Edited By: महेन्द्र गुप्ता]नई दिल्ली, 21 July 2018

आनंद बख्शी का नाम सुनते ही उनके ल‍िखे कई गीत याद आ जाते हैं. भारतीय सिनेमा के इतिहास में आनंद बख्शी साहब का नाम गीतकार के रूप में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. 21जुलाई 1930 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में) में जन्मे आनंद बख्शी ने एक से बढ़कर एक गाने हिंदी फिल्मों को दिए हैं. उस जमाने के मशहूर संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, राहुल देव बर्मन, कल्याणजी आनंदजी, विजु शाह, रोशन, राजेश रोशन और कई चहेते लेखकों में आनंद बख्शी का भी नाम था. आइए आज आनंद बख्शी के जन्मदिन पर जानते हैं कुछ खास बातें:

बचपन से ही आनंद का लक्षय था फिल्म इंडस्ट्री में आना और परिवार की इजाजत के बगैर उन्होंने नेवी ज्वाइन कर ली जिससे की आनंद मुंबई आ सकें. लेकिन उनका नेवी का करियर ज्यादा दिन नहीं चल पाया क्योंकि भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उन्हें परिवार के साथ लखनऊ जाकर रहना पड़ा.

फिल्मों के अलावा गुरुदत्त को पसंद था ये काम करना, किया था सुसाइड

लखनऊ में आनंद एक टेलीफोन ऑपरेटर का काम भी किया करते थे. उसके बाद दिल्ली जाकर एक मोटर मैकेनिक का काम भी उन्होंने किया.दिल्ली के बाद आनंद का मुंबई आना जाना रहता था और उसी दौरान 1958 में उनकी मुलाकात एक्टर मास्टर भगवान से हुई और उन्होंने आनंद को 'भला आदमी' फिल्म के लिए गीत लिखने का काम दिया.

फिल्म 'भला आदमी' के बाद भी आनंद को अगली फिल्म के लिए कई साल का इन्तजार करना पड़ा और चार साल बाद 1962 में 'मेहंदी लगी मेरे हाथ' फिल्म मिली फिर 1965 में 'जब जब फूल खिले' फिल्म ऑफर हुई. दोनों फिल्मो को सूरज प्रकाश बना रहे थे.आनंद बख्शी का नाम 1967 की फिल्म 'मिलान' के बाद काफी फेमस हो गया और उसके बाद एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट आनंद को मिलने लगे.

वहीदा रहमान के जन्‍मदिन पर जानें ये 10 खास बातें

उसके बाद आनंद बख्शी ने एक से बढ़कर एक फिल्में 'अमर अकबर एंथनी', 'एक दूजे के लिए' 'अमर प्रेम' और 'शोले' जैसी फिल्में के लिए भी लिखा. आनंद बख्शी ने राज कपूर की फिल्म 'बॉबी', सुभाष घई की 'ताल' और अपने दोस्त यश चोपड़ा की फिल्म 'दिल तो पागल है' के लिए भी गीत लिखे.

साहिर लुधियानवी के अलावा आनंद बख्शी ही एक ऐसे गीतकार थे जो अपने गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान मौजूद रहते थे और लगभग 4000 गाने उन्होंने लिखे हैं साथ ही आनंद बख्शी ने 1973 की फिल्म 'मोम की गुड़िया' में लता मंगेशकर के साथ गाना भी गाया है. आनंद बख्शी साहब की बीमारी के चलते 30 मार्च 2002 को 71 साल की उम्र में मृत्यु हो गई.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay