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यौन उत्पीड़न मामले में एक्टर जितेंद्र को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी जाने-माने अभ‍िनेता जितेंद्र को हिमाचल हाई कोर्ट में बड़ी राहत मिली है.

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aajtak.in
ऋचा मिश्रा नई दिल्ली, 18 March 2018
यौन उत्पीड़न मामले में एक्टर जितेंद्र को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत जितेंद्र

यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी जाने-माने अभ‍िनेता जितेंद्र को हिमाचल हाई कोर्ट में बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में आगे की कार्रवाई और जांच पर रोक लगा दी है. पिछले दिनों एक्टर की कजिन ने रेप के आरोप लगाए थे. पुलिस ने 16 फरवरी को कजिन की शिकायत के आधार पर एक्टर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया था.

75 की उम्र में जितेंद्र पर यौन शोषण का आरोप, भागकर की थी शादी

हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई को 23 मई को सूचीबद्ध किया था. जितेंद्र ने दावा किया था कि पुलिस ने कोई प्राथमिक जांच या सबूत के बिना प्राथमिकी दर्ज की थी. जितेन्द्र के वकील ने कहा कि पुलिस ने उनसे कोई सवाल नहीं किया और न ही FIR की कॉपी दी. यह आरोप गलत है और उनकी खराब करने के लिए एक साजिश रची जा रही है.

इस बीच, महिला पुलिस स्टेशन, शिमला में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (आक्रमण या आपराधिक बल के तहत महिला को अपनी विनम्रता को अपमानित करने के इरादे से) के तहत दर्ज प्राथमिकी में आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. गौरतलाब है कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जितेंद्र (रवि कपूर) के खिलाफ हिमाचल प्रदेश की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. पीड़िता का कहना है कि 47 साल पहले जितेंद्र ने उनका यौन शोषण किया था.

#MeToo कैंपेन की वजह से कजिन की दर्ज कराई शिकायत

जितेंद्र की कथ‍ित कजिन ने यह भी कहा क‍ि 'मुझे इस घटना को बताने में सालों लग गए. इसकी हिम्मत मुझे इन दिनों चल रहे फेमिनिस्ट अवेयरेस कैंपेन जैसे कि #MeToo की वजह से आई है. इन आंदोलन की वजह से दुनिया की लाखों पीड़ितों को अपनी बात सामने रखने की हिम्मत मिली है. परिवार और रिश्तेदारों द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार होने वाली पीड़ितों में अब उम्मीद की किरण जागी है.

इन सब आरोपों पर सफाई देते हुए जितेंद्र के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा है, ये सभी आरोप बेबुनियाद, हास्यास्पद और मनगढ़ंत हैं. पर्सनल एजेंडे के कारण एक्टर को बदनाम करने की कोश‍िश की गई है. अब करीब 50 साल बाद इन आरोपों पर कोई भी न्यायालयीन कानून या कानूनी एजेंसी विचार नहीं कर सकती.

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