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सुपर 30 Review: क्वीन जैसा चमत्कार नहीं कर पाए विकास बहल, ठीक ठाक है ऋतिक रोशन की फिल्म

विकास बहल ऋतिक रोशन के साथ आनंद कुमार की जादुई कहानी पर्दे पर लेकर आए हैं. विकास बहल के निर्देशन में सुपर 30 किस तरह की फिल्म बन पड़ी है आइए पढ़ते हैं समीक्षा...

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समृद्धि घोषनई दिल्ली, 12 July 2019
सुपर 30 Review: क्वीन जैसा चमत्कार नहीं कर पाए विकास बहल, ठीक ठाक है ऋतिक रोशन की फिल्म ऋतिक रोशन
फिल्म: सुपर 30
कलाकार: ऋतिक रोशन, पंकज त्रिपाठी मृणाल ठाकुर
निर्देशक: विकास बहल

कंगना रनौत की फिल्म क्वीन से विकास बहल जबरदस्त सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहे थे. देश के पुरुष प्रधान समाज के दबदबे के बीच प्रोग्रेसिव, फेमिनिस्ट और एंटरटेनिंग फिल्म बनाकर विकास ने लोगों का अच्छा मनोरंजन किया था. इस लाजवाब फिल्म ने ना केवल विकास बहल को इंडस्ट्री में नाम दिया बल्कि कंगना को भी स्थापित करने में इसने अहम भूमिका निभाई.  

अब विकास बहल ऋतिक रोशन के साथ आनंद कुमार की जादुई कहानी पर्दे पर लेकर आए हैं. हालांकि विकास बहल सुपर 30 के जरिए क्वीन का जादू दोहराने में नाकाम नजर आते हैं. जबकि आनंद कुमार की जबरदस्त कहानी में क्वीन जैसा जादू दोहराने का शानदार मौका था. 

सुपर 30 की शुरूआत होती है फ्लैशबैक के साथ. एक बेहतरीन स्टूडेंट आनंद कुमार का एडमिशन क्रैबिंज यूनिवर्सिटी में होता है, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते वो दाखिला नहीं ले पाता है. आनंद के पिता की मौत हो जाती है और उसे अपनी मां के हाथों बने पापड़ बेचकर घर चलाना पड़ता है.

हालांकि आनंद की किस्मत बदलती है जब उन्हें लल्लन सिंह का साथ मिलता है. लल्लन सिंह का किरदार आदित्य श्रीवास्तव ने निभाया है. लल्लन आईआईटी की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाता है और आनंद को बतौर टीचर शामिल कर लेता है.  हालांकि जब आनंद को एहसास होता है कि उसके जैसे कई बच्चे अपने सपनों का आर्थिक तंगी के चलते बलिदान कर रहे हैं तो वो अपनी कंफर्टेबल जिंदगी को छोड़कर फ्री कोचिंग सेंटर खोलता है.

ऋतिक रोशन ने आनंद कुमार लगने की कोशिश की है, लेकिन अपने ब्राउन मेकअप शेड्स में वे कई सीन्स में प्रभावी नहीं लगते हैं. जहां उनकी स्किन का काफी ध्यान रखा गया, वहीं एक्टर की आंखों की ओर ध्यान नहीं दिया गया. फिल्म में ऋतिक की नैचुरल हरी आंखें एहसास नहीं होने देती कि वे ऋतिक नहीं बल्कि आनंद कुमार हैं. ऋतिक का बिहारी एक्सेंट सुनने में दिलचस्प है और वे इस रोल को निभा पाने में काफी सफल रहते हैं. ऋतिक का काम बढ़िया है. रोल के लिए उनकी मेहनत दिखती भी है.  

पंकज त्रिपाठी फिल्म में एजुकेशन मिनिस्टर के तौर पर दिखते हैं जिनका कोचिंग बिजनेस शानदार चल रहा है वहीं मृणाल के पास थोड़े से स्क्रीन स्पेस में खास कुछ करने को नहीं था. लेकिन ऋतिक के साथ सीन्स में वे प्रभावी लगती हैं. अनुराग कश्यप की कई फिल्मों में नजर आ चुके आदित्य श्रीवास्तव अपनी अदाकारी से एक बार फिर चौंकाते हैं.

2 घंटे 42 मिनट की ये फिल्म थोड़ी लंबी लगती है. फिल्म में ऋतिक की मृणाल के साथ लव स्टोरी वाला हिस्सा इस कहानी में कोई प्रासंगिकता नहीं रखता है. सुपर 30 के कुछ हिस्से ज्यादा ही नाटकीय लगते हैं. मसलन एक बच्चा जो आनंद के सुपर 30 का हिस्सा होने से एक नंबर से रह जाता है, वो ना केवल कुछ घंटों की मेहनत के बाद शानदार म्यूजिकल परफॉर्मेंस देता है बल्कि कई महीनों की ट्रेनिंग का हिस्सा ना बनने के बाद भी आईआईटी का एग्जाम निकाल देता है.

आनंद कुमार के नेतृत्व में सुपर 30 ने देश भर में कमाल किया है. हालांकि विकास बहल के नेतृत्व में ये फिल्म अपना कमाल दिखा पाने में कहीं ना कहीं चूक जाती है.

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