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ग‍िरीश कर्नाड: साह‍ित्य, स‍िनेमा जगत का कभी न भुलाया जाने वाला फनकार

गिरीश कर्नाड सिनेमा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में शीर्ष पर रहे. गिरीश कर्नाड ने जीवन के आखिरी वर्षों तक समाज और राजनीति को लेकर एक एक्टिविस्ट के तौर पर भी बेबाक राय रखते रहें. आइए एक नजर डालते हैं गिरीश कर्नाड के सफर पर...

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aajtak.in [Edited By: ऋचा मिश्रा]नई दिल्ली, 10 June 2019
ग‍िरीश कर्नाड: साह‍ित्य, स‍िनेमा जगत का कभी न भुलाया जाने वाला फनकार ग‍िरीश कर्नाड

द‍िग्गज साह‍ित्यकार, अभ‍िनेता, रंगकर्मी और एक्टिविस्ट ग‍िरीश कर्नाड ने सोमवार को बेंगलुरु में आखिरी सांस ली. ग‍िरीश कर्नाड के न‍िधन के साथ साहित्य और सिनेमा के एक युग का अंत भी हो गया. गिरीश कर्नाड एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं, जो सिनेमा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में शीर्ष पर रहे और हर तरह की भूमिकाओं में काम किया. गिरीश जीवन के आखिरी वर्षों तक समाज और राजनीति को लेकर एक एक्टिविस्ट के तौर पर भी अपनी बेबाक राय रखते रहें. आइए एक नजर डालते हैं गिरीश कर्नाड के सफर पर...

गिरीश कर्नाड का जन्म 19 मई 1938 को  माथेरन, महाराष्ट्र में हुआ था. उनका पूरा नाम ग‍िरीश रघुनाथ कर्नाड था. उनकी शुरुआती पढ़ाई मराठी में हुई. उन्होंने कन्नड़ भाषा तब सीखी जब परिवार कर्नाटक के धारावाड में श‍िफ्ट हो गया. उस वक्त कर्नाड की उम्र 14 वर्ष थी. ग‍िरीश ने 1958 में कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज से कर्नाड ने अपना ग्रेजुएशन किया. उनका विषय गणित था. 1960-63 में उन्होंने इंग्लैंड जाकर आगे की पढ़ाई पूरी की. कर्नाड ने इग्लैंड में दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की. ग‍िरीश ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यून‍ियन के प्रेस‍िडेंट भी बने.

कर्नाड ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस चेन्नई में सात साल तक (1963 से 1970) तक काम किया. लेकिन इस काम में कर्नाड का मन नहीं लगा. उन्होंने फुल टाइम लेखन के लिए इस्तीफ़ा दे दिया. कर्नाड ने चेन्नई में स्थानीय थियेटर ग्रुप "द मद्रास थियेटर ग्रुप" के साथ भी काम किया.

कर्नाड अमेरिका भी गए और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में पढ़ाया भी.

कर्नाड के जीवन में मां का रहा गहरा असर

कर्नाड की मां कम उम्र में ही विधवा हो गई थीं. कहा जाता है कि उनका बाल विवाह हुआ था. पेशे से कर्नाड की मां नर्स थीं. नर्सिंग की ट्रेनिंग के दौरान कर्नाड की मां को डॉक्टर रघुनाथ कर्नाड से प्यार हुआ था. बाद में उन्होंने आर्य समाज मंदिर में शादी की. उनकी मां ने व‍िधवाओं के लिए बहुत काम किया, यही वजह है कि कर्नाड के जीवन में अपनी मां का गहरा असर रहा.

परिवार
ग‍िरीश कर्नाड ने सरावथी से शादी की. कर्नाड के बेटे का नाम रघु कर्नाड और बेटी का नाम राधा कर्नाड है. ग‍िरीश कर्नाड का बेटा जर्नल‍िस्ट है जबकि बेटी कीनिया में डॉक्टर है.

साह‍ित्य में योगदान
कर्नाड ने अपना पहला नाटक ययाति 1961 में ल‍िखा था. कर्नाड ने जब ये नाटक लिखा उस वक्त वे ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई कर रहे थे. कर्नाड ने महज 26 साल की उम्र में साल 1964 में दूसरा नाटक "तुगलक" ल‍िखा, इसमें मुहम्मद ब‍िन तुगलक के जीवन को बारीकी से बताया गया था. कन्नड़ साह‍ित्य में ग‍िरीश कर्नाड ने बड़ा योगदान द‍िया. उनके मशहूर नाटकों में 1961 में 'यताति', 1972 में हयवदना, 1988 में नागामनडाला, 1964 में तुगलक, अग्निमतु माले', 'नगा मंडला' और 'अग्नि और बरखा' शामिल है. गिरीश कर्नाड की कन्नड़ और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान पकड़ थी. उन्होंने अपना पहला नाटक कन्नड़ में लिखा था, जिसे बाद में अंग्रेज़ी में भी अनुवाद किया गया.

कन्नड़ नाटक में गिरीश का स्थान वही है जैसा कि बंगाली में बादल सरकार, मराठी में विजय तेंदुलकर और हिंदी में मोहन राकेश का है. कर्नाड के नाटकों का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है. कर्नाड के काम को अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया है. कर्नाड को साहित्य के कई बड़े सम्मान मिले.

स‍िनेमा में योगदान

ग‍िरीश कर्नाड बतौर लेखक अपनी पहचान बनाना चाहते थे. साह‍ित्य जगत का नामचीन चेहरा बनने के बाद उन्होंने बतौर लेखक फिल्मों में कदम रखा. 1970 में बतौर स्क्रीनराइटर 'सम्सकारा' से डेब्यू किया, ये फिल्म  यूआर अनंतमूर्ति के नॉवेल पर आधारित थी. कन्नड़ फिल्म के लिए कर्नाड को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. इस फिल्म में उन्होंने लीड रोल भी किया था.

1977 में आई हिंदी फिल्म स्वामी गिरीश कर्नाड की चर्चित फिल्म है. इसमें कर्नाड ने शबाना आजमी के साथ मुख भूमिका निभाई थी. श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी निशांत गिरीश कर्नाड की एक और चर्चित फिल्म है. इसमें भी शबाना आजमी ने कर्नाड की पत्नी का रोल निभाया था. 197 में शायम बेनेगल की एक और फिल्म मंथन में गिरीश कर्नाड ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इस फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला था. नागेश कुकुनूर की इकबाल और डोर गिरीश कर्नाड की दो और चर्चित फ़िल्में हैं.

गिरीश कर्नाड को 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे. उन्होंने Vamsha Vriksha (1971) से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया. इस फिल्म के लिए ग‍िरीश को नेशनल अवॉर्ड मिला. उनकी हिंदी फिल्मों में आशा, उत्सव, पुकार, टाइगर और टाइगर जिंदा है जैसी फिल्में भी की हैं.

टीवी प्रेजेंटर
गिरीश कर्नाड प्रशासित टीवी सीरीज के प्रेजेंटर भी रहे. 90 के दशक में कर्नाड का ये शो दूरदर्शन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. कर्नाड बतौर प्रेजेंटर जो शो करते थे वो साइंस और नई खोजों पर आधारित था.

यादगार रोल:

1. साल 1976 में आई फिल्म मंथन में गिरीश कर्नाड ने डॉ. राव का किरदार निभाया था. ये फिल्म श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियर के जीवन से प्रेरित थी. 

2. निशांत फिल्म में गिरीश कर्नाड ने एक स्कूल मास्टर की भूमिका निभाई. फिल्म में गिरीश कर्नाड के साथ शबाना आज़मी, अनंत नाग, अमरीश पुरी, स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह सहित कई कलाकार दिखाई दिए  थे.

3. साल 2006 में आई फिल्म 'डोर' में  गिरीश कर्नाड ने 'रणधीर सिंह' का रोल अदा किया था. इस फिल्म में उन्होंने बॉलीवुड एक्ट्रेस आयशा टाकिया के ससुर का किरदार निभाया.

4. इकबाल फिल्म में गिरीश कर्नाड ने एक क्रिकेट कोच की भूमिका अदा की थी, उनके इस रोल को कई फिल्म समीक्षकों और क्रिटिक्स की प्रशंसा हासिल हुई थी.

5. गिरीश कर्नाड, सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' में नजर आए थे. इसमें गिरीश कर्नाड रॉ हेड के तौर पर सलमान खान के बॉस बने थे.

टीवी पर दी दस्तक, घर-घर में मिली पहचान
फिल्मों को करने के साथ ग‍िरीश कर्नाड ने दूरदर्शन के शो मालगुड़ी डेज में भी काम किया. 1990 में आए इस शो में उन्होंने स्वामी के प‍िता मास्टर मंजुनाथ की भूमिका न‍िभाई. ये वो पड़ाव था, ज‍िसने ग‍िरीश कर्नाड को घर-घर में पहचान द‍िलाई. कर्नाड ने पूर्व राष्ट्रपत‍ि एपीजे अब्दुल कलाम पर बनी ऑड‍ियो बुक व‍िंग्स ऑफ फायर को अपनी आवाज दी.

सशक्त समाज‍िक कार्यकर्ता
ग‍िरीश कर्नाड की लेखनी में ज‍ितना दम था, उन्होंने उतने ही बेबाक अंदाज में अपनी आवाज को बुलंदी दी. तमाम राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही. धर्म की राजनीति और भीड़ की हिंसा पर भी कर्नाड ने तमाम प्रतिरोधों में हिस्सा लिया. कर्नाड ने सीन‍ियर जर्नल‍िस्ट गौरी लंकेश की मर्डर पर बेबाक अंदाज में आवाज उठाई. गौरी लंकेश के मर्डर के एक साल बाद हुई डेथ एन‍िवर्स‍िरी में वो #MeTooUrbanNaxal प्ले कार्ड गले में पहनकर सभा में पहुंचे थे. उनके नाक में ऑक्सीजन की पाइप लगी थी. ये तस्वीर काफी चर्चित हुई थी. 


साह‍ित्य में सर्वोच्च सम्मान

गिरीश कर्नाड को 1972 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1992 में कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1998 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला. 1998 में उन्हें कालिदास सम्मान भी दिया गया है. सिनेमा और साहित्य में योगदान के लिए कर्नाड को भारत सरकार ने 1974 में पद्म श्री, 1992 में पद्म भूषण सम्मान दिया गया. 

स‍िनेमा
1971 में बेस्ट डायरेक्टर कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड से सम्मान‍ित
1973 में बेस्ट फीचर फिल्म Kaadu के लिए नेशनल अवॉर्ड
1977 में कन्नड़ बेस्ट फीचर अवॉर्ड  फिल्म Tabbaliyu Neenade Magane

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