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कंटेजन फिल्म और कोरोना में नहीं सब कुछ समान, जानिए 3 बड़े अंतर

ऐसा नहीं है कि कोरोना वायरस और कंटेजन फिल्म में सबकुछ समान हो. ऐसे कई पहलू हैं जहां ये फिल्म इस खतरनाक वायरस से जुदा है. आइए आपको बताते हैं वो अंतर जो कोरोना को फिल्म कंटेजन से अलग बनाता है-

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 08 May 2020
कंटेजन फिल्म और कोरोना में नहीं सब कुछ समान, जानिए 3 बड़े अंतर कंटेजन

कोरोना वायरस का जब से प्रकोप बढ़ा है, हर किसी के जुबान पर चढ़ गई है एक फिल्म- कंटेजन. अब क्योंकि इस फिल्म में 9 साल पहले कोरोना जैसा ही एक वायरस दिखाया गया था, इसलिए ये फिल्म ट्रेंड करने लगी. हर कोई बता रहा था कि कैसे इस फिल्म ने इतने साल पहले ही ऐसी तबाही की भविष्यवाणी कर दी थी. लेकिन ऐसा नहीं है कि कोरोना वायरस और कंटेजन फिल्म में सबकुछ समान हो. ऐसे कई पहलू हैं जहां ये फिल्म इस खतरनाक वायरस से जुदा है. आइए आपको बताते हैं वो अंतर जो कोरोना को फिल्म कंटेजन से अलग बनाता है-

मृत्यु दर

इस बात में कोई दो राय नहीं कि कोरोना वायरस बहुत ही जानलेवा और खतरनाक है. इसके चलते लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. लेकिन फिर भी ये वायरस उतना जानलेवा नहीं है जितना फिल्म कंटेजन में दिखाया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि इस वायरस के चलते 25-30 प्रतिशत का मृत्युदर देखा गया है. लेकिन अब जब आप कोरोना वायरस को देखेंगे तो पाएंगे कि इसका मृत्युदर काफी कम है. फिल्म के मुकाबले तो ये कही भी नहीं टिकता. ऐसा बताया गया है कि कोरोना वायरस के चलते 3 से 4 प्रतिशत के बीच मृत्युदर देखा गया है. अब दुनिया के हिसाब से तो ये भी काफी ज्यादा है लेकिन फिल्म में दिखाया वायरस और ज्यादा भयानक था.

कौन सी उम्र के लोग हो रहे शिकार?

अब वैसे तो कोरोना वायरस ने हर किसी को अपनी चपेट में लिया है, फिर चाहे वो कोई जवान हो या हो बूढ़ा. लेकिन फिर भी ज्यादातर देशों में देखा गया है कि वृद्ध लोगों में इस वायरस से ज्यादा मौते देखी गई हैं. लेकिन वही जब हम कंटेजन फिल्म की बात करते हैं तो इस में ये वायरस सबसे ज्यादा नौजवानों को अपना शिकार बनाता है. फिल्म के शुरूआत में ही ये वायरस Beth Emhoff को अपना शिकार बनाता है. ऐसे में कोरोना की तुलना में कंटेजन फिल्म में दिखाया गया वायरस कम उम्र के लोगों को ज्यादा अपना शिकार बना रहा था.

वैक्सीन

अब वैक्सीन भी एक ऐसा पहलू है जहां कंटेजन और कोरोना एक दूसरे से अलग दिखाई पड़ते हैं. फिल्म में दिखाया गया है कि कुछ ही महीनों मे वायरस की वैक्सीन बना ली जाती है. एक ऐसा वायरस जिसने करोड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया, उसकी वैक्सीन फिल्म में कुछ ही महीनों में तैयार कर ली जाती है. लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं इस तरह के वायरस में वैक्सीन के बनने में टाइम लगता है. कई बार तो सालों तक लग सकते हैं. ऐसे में अभी तक कोरोना वायरस की कोई भी वैक्सीन तैयार नहीं की गई है. कुछ देशों ने दावे जरूर पेश किए हैं लेकिन अभी तक कुछ भी पुख्ता सामने नहीं आया है.

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इम्यूनिटी

कंटेजन फिल्म में दिखाया गया था कि Mitch Emhoff नाम का किरदार इस खतरनाक वायरस से इम्यून हो जाता है. कोई भी चाहे खांसे या छींके, उसे वायरस से संक्रमित होने का डर नहीं होता है. वो सुरक्षित रहता है. लेकिन अब ऐसी स्थिति कोरोना वायरस के साथ देखने को नहीं मिलती है. अभी तक किसी भी एक्सपर्ट या डॉक्टर ने ये दावा नहीं किया है कि कोई कोरोना वायरस से इम्यून हो सकता है. ऐसे में ये भी कंटेजन फिल्म और कोरोनाके के बीच बड़े अंतर के तौर देखना चाहिए.

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