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निर्वासन में भी ललित मोदी के तीखे तेवर

इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी पर इंग्लैंड का कानून शिकंजा कस रहा है, मगर भारत में उनके खिलाफ चल रहे मामले ठंडे बस्ते में ही दिखाई देते हैं.

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aajtak.in
धीरज नय्यरनई दिल्‍ली, 15 April 2012
निर्वासन में भी ललित मोदी के तीखे तेवर

ललित मोदी ने तीन अप्रैल की शाम उस आयोजन के पांचवें संस्करण के उद्घाटन समारोह को यूट्यूब पर लाइव देखा, जिसका तानाबाना 2008 में उन्होंने खुद बुना था. लंदन में निर्वासन झेल रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के पूर्व कमिश्नर मोदी के लिए बीता मार्च मुसीबतों भरा रहा था. वहां उन्हें दो जबरदस्त कानूनी झटके लगे. मगर आइपीएल ने उनके हौसले फिर से बुलंद कर दिए. आखिर उन्हें इतराने का मौका मिला और वे इतराए भी. ट्विटर पर इस तमाशे का मखौल उड़ाते हुए उन्होंने लिखा, 'सच तो यह है कि मैं पूरी तरह हतप्रभ हूं-एक शानदार शो को किस तरह नाटक बना दिया गया है. इसके फॉरमेट के बारे में फैसला लेते वक्त बीसीसीआइ आखिर क्या सोच रहा था.' उन्हें इस बात से घोर निराशा थी कि आइपीएल के उद्घाटन कार्यक्रम को एक खेल समारोह की प्रतिष्ठा के अनुरूप किसी स्टेडियम के बजाए चेन्नै के वाइएमसीए ग्राउंड में आयोजित किया गया? समारोह के बीच वे एक बार फिर चहके, 'मेरे हिसाब से समारोह फुस्स रहा, मैं तो चला दोस्तों से मिलने.'

लेकिन मोदी ने सावधानी जरूर बरती और आइपीएल को खारिज नहीं किया. 2 अप्रैल को अपने ब्लॉग पर उन्होंने लिखा, 'कम-से-कम मैं तो स्क्रीन से चिपका रहूंगा... हमेशा की तरह मुझे इस पर नाज होगा जैसा इसके पहले चार आयोजनों के दौरान होता था. वे आयोजन जिन्हें मैंने संभव बनाया.' वे बिना लागलपेट के कहते हैं कि लीग से उनके निलंबन के बाद उनके उत्तराधिकारी ने आम दर्शकों के बीच आइपीएल की लोकप्रियता को किस कदर मिट्टी में मिला दिया है. इसमें नएपन का अभाव बताते हुए मोदी अपने ब्लॉग में लिखते हैं, 'आपका पसंदीदा भोजन अगर हर रात एक ही तरह से आपको परोसा जाएगा तो जल्द ही इसका आकर्षण फीका पड़ जाएगा.'

इंग्लैंड में निर्वासन झेल रहे मोदी अब भी उतने ही बड़बोले हैं, जितने कभी भारत में हुआ करते थे. बस उनका माध्यम बदल गया है. मुख्यधारा के मीडिया से सीधे संवाद की जगह अब वे इंटरनेट की दुनिया में ज्‍यादा नजर आते हैं. इंडिया टुडे के साथ विशेष इंटरव्यू में पूछे गए सवालों के आधे जवाब उन्होंने टेलीफोन पर और आधे ईमेल के जरिए भेजे. मोदी नहीं चाहते कि उन्हें गलत ढंग से उद्धृत किया जाए. वे ट्विटर पर सक्रिय रहते हैं और यहां 4.4 लाख लोग उन्हें देखते-पढ़ते हैं. वे नियमित रूप से ब्लॉग लिखते हैं. वे फेसबुक पर भी हैं. उनकी नई वेबसाइट ललितमोदीडॉटकॉम ने पुरानी वेबसाइट ललितमोदीडॉटऑर्ग की जगह ली है और यह आइपीएल के पूर्व कमिश्नर की दुनिया में झांकने की इकलौती खिड़की है.

अपनी पहचान जाहिर न करने के इच्छुक उनके एक मित्र कहते हैं, 'आप यह क्यों चाहते हैं कि मैं आपको ललित के बारे में बताऊं? उनकी वेबसाइट देख लीजिए, आप जो कुछ जानना चाहते हैं, वह सब वहां है.' भारतीय अधिकारियों के साथ चल रही उनकी कानूनी खींचतान पर वेबसाइट में पूरा एक सेक्शन है. बीसीसीआइ, प्रवर्तन निदेशालय, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, आयकर विभाग और पासपोर्ट कार्यालय की ओर से भेजे गए तमाम समन और नोटिसों की कॉपी उन्होंने यहां अपलोड की है. मई से दिसंबर, 2010 के बीच भेजे गए इन समन और नोटिसों पर अपने जवाब भी उन्होंने वेबसाइट पर चस्पां किए हैं.

वे भारत नहीं लौटने की वजह आधिकारिक रूप से उस संभावित खतरे को बताते हैं जो मुंबई के अंडरवर्ल्ड से उनकी जान को है. मोदी के मुताबिक दाऊद इब्राहिम और उसके गुर्गे उन्हें खत्म करना चाहते हैं. हर जांच एजेंसी को वे यही जवाब देते हैं. यही वजह है कि वे लंदन में अपनी रहने की जगह का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं करते. उनके आलोचक, जिनमें बीसीसीआइ के मौजूदा अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन भी शामिल हैं, मानते हैं कि मोदी भारतीय कानून से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

मोदी पर लग रहे आरोपों में सबसे गंभीर है प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में चल रहा फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) का मामला. मोदी की वेबसाइट के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 2 अगस्त, 2010 को पहली बार समन भेजा. सितंबर में आइपीएल और बीसीसीआइ के सभी पदों से उन्हें आधिकारिक रूप से बेदखल करने के थोड़ा पहले. समन में मोदी को अपना पासपोर्ट, भारत और विदेशों में अपने बैंक खातों के विवरण, लीग के बारे में बीसीसीआइ की ओर से किए गए सभी समझौतों से जुड़े दस्तावेज, आइपीएल से संबंधित सभी निविदाएं तथा 2008 और 2010 में हुई फ्रैंचाइजी की नीलामियों के विवरण के अलावा आइपीएल के मीडिया और प्रसारण अधिकारों की बिक्री के कागजात लेकर व्यक्तिगत रूप से निदेशालय में हाजिर होने को कहा गया था.

समन के जवाब में मोदी ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से ईडी के सामने हाजिर होने में असमर्थ हैं. उन्हें अपनी जान के खतरे की वजह से भारत से बाहर रहने की सलाह दी गई है. मोदी की इस दलील से असंतुष्ट ईडी ने 24 अगस्त, 2010 को एक और समन भेजा. इसमें उनके हस्ताक्षर से आइपीएल दक्षिण अफ्रीका की ओर से जारी किए गए क्रिकेट साउथ अफ्रीका के साथ हुए सभी समझौतों की प्रतियां पेश करने को कहा गया था. 2009 में हुए आइपीएल के दूसरे संस्करण को दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था. इसके मैच आम चुनाव की तारीखों से टकरा रहे थे और केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करा पाने से इनकार कर दिया था.

मोदी ने इस बार भी व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने में लाचारी जताई लेकिन वीडियोलिंक के जरिए सभी सवालों का जवाब देने या लंदन में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के सामने हाजिर होने का प्रस्ताव रखा. इसके अलावा उन्होंने मुंबई पुलिस के अतिरिक्त कमिश्नर देवेन भट्ट की ओर से 16 सितंबर, 2009 को लिखा एक पत्र भी पेश किया जिसमें कहा गया था कि मोदी की जान को संभावित खतरे की आशंका के मद्देनजर उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा दी गई है.

मोदी आयकर विभाग और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की ओर से भी कई मामलों का सामना कर रहे हैं. ये सारे मामले भी सुलझाए नहीं जा सके हैं क्योंकि मोदी ने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने में लाचारी जाहिर की है और ये एजेंसियां भी वीडियोलिंक के जरिए या अपने अधिकारियों को लंदन भेजकर पूछताछ करने पर राजी नहीं हैं. पूरा डेढ़ साल बीत गया है और ईडी तथा अन्य एजेंसियों की जांच अब भी लटकी हुई है. न ही कोई आरोप पत्र दाखिल हुआ है. इस बीच पासपोर्ट कार्यालय ने ईडी की सलाह पर 3 मार्च, 2011 को मोदी का पासपोर्ट निरस्त कर दिया. इस पासपोर्ट पर अब वे यूके से बाहर यात्रा नहीं कर सकते. इस आदेश के खिलाफ मोदी की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है.

18 जनवरी, 2012 को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है. अदालत ने विदेश मंत्रालय, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, मुंबई और मुख्य पासपोर्ट अधिकारी से मोदी की अपील पर जवाब तलब किए हैं. मोदी को अब हर हाल में पासपोर्ट चाहिए ताकि वे यूके में वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन कर सकें. ईडी ने मोदी के खिलाफ ब्लू कार्नर नोटिस भी जारी कर दिया है, जिसकी वजह से भारत में कदम रखते ही निदेशालय को उनकी मौजूदगी की खबर मिल जाएगी.

उन्होंने अक्तूबर, 2010 में बीबीसी के पूर्व खेल संपादक मिहिर बोस को लंदन में दिए साक्षात्कार में बीसीसीआइ के इन आरोपों को खारिज किया था कि जब आइपीएल टीमों में उनके रिश्तेदारों और दोस्तों ने हिस्सा खरीदा तो उन्होंने हितों के टकराव संबंधी जानकारी की घोषणा नहीं की थी. उन्होंने बताया कि बोली की प्रक्रिया पारदर्शी थी और उस वक्त बीसीसीआइ अधिकारी और आइपीएल गवर्निंग काउंसिल के सदस्य वहां मौजूद थे. मोदी ने कहा, 'उस वक्त प्रसारण अधिकार खरीदने के लिए वहां सिर्फ वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप थी. सोनी ने बोली लगाई जरूर थी लेकिन खुलने से पहले ही उसने उसे वापस ले लिया. ईएसपीएन ने भी बोली लगाई लेकिन मेज पर उसने शून्य का अंक रखा, इसलिए उनकी बोली को अयोग्य ठहरा दिया गया.' इसके बाद मोदी ने बताया कि किस तरह उन्होंने बीसीसीआइ के लिए अरबों की कमाई की.

मोदी अब तक भारतीय कानूनों से बचने में किसी तरह कामयाब रहे हैं लेकिन इंग्लैंड में उन पर शिकंजा कसता जा रहा है. 20 मार्च, 2012 को लंदन की एक अदालत ने उन्हें 65,000 पाउंड (53 लाख रुपए) का भुगतान नहीं कर पाने के कारण दिवालिया करार दे दिया. यह रकम उन्हें पेज ग्रुप नाम की एक एजेंसी को चुकानी थी, जिसे 2010 में उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था. दिवालिया करार दिए जाने के बाद मोदी तब तक किसी रजिस्टर्ड कंपनी के डायरेक्टर नियुक्त नहीं हो सकते और न ही किसी वित्तीय संस्था से कर्ज ले सकते, जब तक कि अदालत उन्हें बरी नहीं कर देती. 26 मार्च को लंदन की एक दूसरी अदालन ने मोदी को अवमानना का दोषी ठहराया.

मोदी ने 2008 में ट्वीट किया था कि न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर क्रिस कैर्न्स को आइपीएल की नीलामी सूची से इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि वे प्रतिद्वंद्वी इंडियन क्रिकेट लीग में हुए एक मैच फिक्सिंग मामले में शामिल थे. कोर्ट ने मोदी के आरोपों को बेबुनियाद ठहराते हुए उन्हें कैर्न्स को 90,000 पाउंड (73 लाख रुपए) बतौर हर्जाना और 4,00,000 पाउंड (3.25 करोड़ रुपए) मुकदमे का खर्च चुकाने का आदेश दिया. अदालत ने यह कहकर हर्जाने को स्थगित करने से इनकार कर दिया कि मोदी रसूख वाले शख्स हैं. मोदी ने ट्वीट किया है कि वे दोनों फैसलों के खिलाफ अपील कर रहे हैं. इंडिया टुडे को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

मई 2010 में भारत छोड़ने वाले मोदी को लगभग दो साल पूरे हो रहे हैं. मोदी का कहना है कि वे एक 'देशभक्त भारतीय हैं जिसे अपने देश की याद आती है.' वे आइपीएल को भी बहुत याद करते हैं. 2 अप्रैल को अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा, 'इसके आगाज के मौके पर निजी तौर पर मैं नहीं रहूंगा तो कुछ न कुछ उदासी तो जरूरी होगी.' लेकिन सचाई यह है कि उन्हें ही कुछ ज्‍यादा दिन उदास रहना पड़ेगा.

-शांतनु गुहा रे, भावना विज-अरोड़ा के साथ लंदन से अदिति खन्ना

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