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Badla Review: सस्पेंस में दम, पर कमजोर है अमिताभ-तापसी की एक्टिंग

बदला मूवी के जरिए एक बार फिर से अमिताभ बच्चन और ताप्सी पन्नू की जोड़ी देखने को मिली. पिंक में दोनों की जोड़ी ने कमाल किया था और इस फिल्म के साथ भी ऐसा ही हुआ है.

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aajtak.in [Edited By: पुनीत उपाध्याय]नई दिल्ली, 08 March 2019
Badla Review: सस्पेंस में दम, पर कमजोर है अमिताभ-तापसी की एक्टिंग बदला
फिल्म: Badla
कलाकार: Amitabh Bachchan, Taapsee Pannu and Amrita Singh
निर्देशक: Sujoy Ghosh

पिंक के बाद एक बार फिर बदला के जरिए अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की जोड़ी आई है. बदला एक सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा है. इस जॉनर में समय समय पर फिल्में बनती रही हैं. बींग साइरस, गुमनाम, गुप्त, बाजीगर, वो कौन थी, दृश्यम, कहानी और अंधाधुन जैसी फिल्मों की लिस्ट काफी लंबी है. बदला की कहानी में काफी मजबूत है और इसमें जबरदस्त सस्पेंस भी है. आइए जानते हैं कि कहानी और अंधाधुन जैसी फिल्मों के मुकाबले कैसी बन पड़ी है बदला.

क्या है फिल्म की कहानी:

फिल्म की कहानी नैना (तापसी पन्नू) की है. नैना एक यंग आंत्रप्रेन्योर है. शादीशुदा और एक बच्चे की मां है. हालांकि वो अर्जुन नाम के एक शादीशुदा शख्स के साथ एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर में भी है. दोनों एक दूसरे के परिवार वालों से छिप कर पैरिस में मिलते हैं. इसी बीच कहीं जाने के दौरान रोड एक्सिडेंट में नैना की कार से, सनी नाम के एक लड़के की मौत हो जाती है. जिसके बाद दोनों सनी की मौत का सबूत मिटाते हैं. लेकिन सनी की मौत को लेकर कोई दोनों को ब्लैकमेल करता है. पैसे की मांग करता है. दोनों ब्लैकमेलर को रकम देने एक होटल में पहुंचते हैं, यहीं से शुरू होता है कहानी में ट्विस्ट.

दरअसल, होटल में अर्जुन की मौत हो जाती है और इल्जाम नैना पर लगता है. अमृता सिंह ने सनी की मां का रोल निभाया है. अमिताभ बच्चन प्रॉसिक्यूटर के रोल में हैं, वो नैना का केस टैकल करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. अब फिल्म की कहानी का तानाबाना कुछ सवालों में बुनने की कोशिश हुई है. जैसे अर्जुन की अचानक मौत कैसे हुई?  पैसे की मांग करने वाला होटल के रूम पर आता है, मगर पैसे लिए बिना क्यों चला जाता है? अमिताभ का किरदार क्या है? ब्लैकमेलर कौन है? अर्जुन की हत्या किसने की? ऐसे तमाम सवाल जानने के लिए फिल्म देखना होगा. वैसे इसमें सस्पेंस अर्जुन की हत्या से अलग वो चीज है जो फिल्म के टाइटल से जुड़ी हुई है. इंटरवल तक फिल्म में जबरदस्त सस्पेंस है.

क्यों देखें-

फिल्म की कहानी मजबूत है. शुरू से लेकर अंत तक सस्पेंस बनाए रखा गया है. किरदारों को किस समय पर कैसे फिल्म में पेश करना है इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है. कहानी जिस तरह की है, उसे फिल्माना चुनौतीपूर्ण काम होता है. लेकिन इसके लिए निर्देशन और सम्पादन की तारीफ़ की जानी चाहिए. चूंकि फिल्म तमाम सवालों के जरिए बुनी गई है, इस वजह से एक सवाल का जवाब मिलने पर अगला सवाल फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखता है. सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. बदला की सबसे अच्छी बात यही है कि ये बोर नहीं करती और अंत तक दिलचस्पी बनाए रखती है.

हालांकि इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कलाकारों का अभिनय बहुत उम्दा नजर नहीं आता. हो सकता है कि कहानी में नाटकीयता बहुत कम होने की वजह से ऐसा है. बदला को अमिताभ बच्चन या तापसी पन्नू की बहुत बेहतरीन एक्टिंग के लिए याद नहीं किया जाएगा. अमृता सिंह या दूसरे कलाकारों के काम अपनी जगह ठीक ठाक कहे जा सकते हैं.

फिल्म के कुछ आउटडोर लोकेशन प्रभावी हैं. सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा में लाइट्स का बहुत योगदान होता है. बदला में कैमरा और रोशनी का अच्छा इस्तेमाल किया गया है.

क्यों ना देखें-

ज्यादा घुमावदार फिल्में देखने के आदी नहीं हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है. फिल्म के डायलॉग्स पर ज्यादा काम नहीं किया गया है. फिल्म की कहानी चाहें जितनी शानदार हो, बेहतरीन तरीके से इसे फिल्माया गया हो मगर कोई भी फिल्म दर्शकों के दिल में सिर्फ अच्छे डायलॉग्स की वजह से ही पहुंच सकती है. फिल्म में गाने नहीं हैं. बैकग्राउंड स्कोर भी मूड के हिसाब से सही कहा जा सकता है.

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