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अर्चना पूरण सिंह ने बताया कैसी चल रही है लॉकडाउन लाइफ, बदल गई ये चीजें

अर्चना ने कहा कि किसी को बाहर जाना नहीं, किसी का कोई अपॉइंटमेंट या शूटिंग नहीं. इसलिए हम लोगों ने सोचा कि इस लॉक डाउन के बाद जब भी हम बाहर निकलें तो फिज़िकली और मेंटली बेहतर इंसान बनकर निकलें.

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aajtak.in
साधना कुमार नई दिल्ली, 28 May 2020
अर्चना पूरण सिंह ने बताया कैसी चल रही है लॉकडाउन लाइफ, बदल गई ये चीजें अर्चना पूरण सिंह

लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया की मदद से फैन्स को बस इतना पता है कि अर्चना पूरण सिंह अपने गार्डन में मस्ती करती हैं और अपनी मेड भाग्यश्री से ढेर सारी बातें करती हैं. लेकिन क्या वाकई अर्चना पूरण सिंह का लॉकडाउन इन्ही चीजों के इर्द गिर्द घूम रहा है. आज तक के साथ खास बातचीत में अर्चना पूरण सिंह ने बताया कि वह लॉकडाउन के दौरान किस तरह अपना वक्त गुजार रही हैं.

लाफ्टर क्वीन अर्चना लॉकडाउन को अपने लिए वरदान समझकर अपने रूटीन का खास ख्याल रख रही हैं. समय से उठना, योग करना, सेहतमंद भोजन करना, फिट रहने के लिए एक्सरसाइज करना और फैमिली के साथ समय बिताना उनके रूटीन में शुमार हो गया है. अर्चना पूरण सिंह ने कहा कि पहले कुछ ज़्यादा रूटीन नहीं था लेकिन अब बहुत ज़्यादा हो गया है. जब से लॉक डाउन हुआ है तब से सब के टाइमिंग्स एक हो गए हैं.

अर्चना ने कहा कि किसी को बाहर जाना नहीं, किसी का कोई अपॉइंटमेंट या शूटिंग नहीं. इसलिए हम लोगों ने सोचा कि इस लॉक डाउन के बाद जब भी हम बाहर निकलें तो फिज़िकली और मेंटली बेहतर इंसान बनकर निकलें. ऐसा लगना चाहिए कि ये जो वक़्त है, वो हमने व्यर्थ नहीं किया क्योंकि समय को व्यर्थ करना बहुत आसान है. ये बात हम सबने गांठ बांधकर रख ली है. अर्चना ने कहा, "मैं तो हमेशा वॉक करती थी पहले गेट के बाहर करती थी फिर अपने घर के गेट के अंदर अपने घर की परिक्रमा करने लगी."

अर्चना ने बताया, "पहले मेरी मम्मी भी हमेशा कॉम्प्लेक्स में जाती थीं अपनी दोस्त से मिलने लेकिन अब वो भी अपने बगीचे में ही घूमती हैं क्योंकि वो घूमने से बाज़ नहीं आएंगी. फिर बच्चों ने भी बोला कि हम भी जॉगिंग करेंगे और परमीत भी एक्सरसाइज के फ़ेवर में रहते हैं. तो हम सबने मिलकर एक रूटीन बना लिया कि शाम में ही वर्कआउट करेंगे क्योंकि ज़्यादा थकेंगे तो नींद भी अच्छी आएगी. तो हमने हर दिन डेढ़-दो घंटे एक्सरसाइज करना शुरू कर दिया और हमारा रूटीन भी बंध गया."

सब साथ में करते हैं योग

अर्चना ने बताया, "बहुत पहले से मैंने सोच रखा था कि योग शुरू करना है पर किसी कारण हो ही नहीं पाता था. लेकिन अब जब टाइम मिला है तो रोज़ सुबह उठकर योग करती हूं. मुझे देखकर मेरा बड़ा वाला बेटा भी डेढ़ घंटे योग करने लगा. हम श्री श्री रविशंकर की क्रिया करते हैं तो हमें देखकर परमीत और मेरा छोटा बेटा भी आ गए और अब हम चारों एक कमरे में अलग-अलग जगहों पर बैठकर क्रिया करने लगे. तो धीरे-धीरे ये रूटीन बन गया और अब ऑटोमेटिकली सब ग्यारह-सवा ग्यारह बजे तक एक कमरे में आ जाते हैं और क्रिया करते हैं."

साथ बैठकर खाते हैं खाना

अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि पहले हम अलग-अलग कमरों खाना खाते थे. किसी को जल्दी जाना रहता था तो वो अपने कमरे में खाना खा लेता था, कोई अपनी टीवी के सामने बैठकर खाता था. लेकिन अब क्या हुआ, इस लॉक डाउन में स्टाफ कम है, कुछ गांव चले गए हैं तो सब मिल बांटकर काम कर लेते हैं और हम लोग भी नियमित रूप से डाइनिंग रूम में 2 बजे आ जाते हैं, तो स्टाफ भी पौने दो बजे तक लंच लगा देते हैं. एक दिन हम डाइनिंग टेबल पर खाना खाते वक़्त बात कर रहे थे तो मेरे दोनों बेटों ने कहा कि,"वी प्रेफर दिस." तो अब हम सबने कुछ-कुछ प्रण लिए हैं कि ये लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी हम ये नहीं भूलेंगे और साथ में डाइनिंग टेबल पर ही खाना खाएंगे.

अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि कुकिंग मेरे करने की ना ही ज़रूरत पड़ी और ना ही नौबत आई क्योंकि मेरे दोनों बेटे घुस गए किचन में. मेरे बड़े वाले बेटे ने एक से बढ़कर एक पास्ता बनाना शुरू किया, जो कभी किचन की तरफ देखता भी नहीं था और छोटे वाला तो हमेशा से बेकिंग करता था. लेकिन उसने छोड़ दिया था काफी साल पहले क्योंकि वो न्यूयॉर्क चला गया था और वापस आया तो वो धर्मा प्रोडक्शन में असिस्टेंट बन गया, उसे टाइम ही नहीं मिलता था तो उसने रीडिस्कवर किया की उसे कितना मज़ा आता है किचन में अवन में कुछ बनाने का.

अर्चना ने बताया कि जब बड़े वाले बेटे ने देखा कि छोटा वाला बना ही रहा है तो वो एक-दो हफ्ते में किचन से बाहर आ गया लेकिन ये छोटे वाले ने तो कमाल ही कर दिया है. जब हम डाइनिंग टेबल पर जाकर देखते हैं तो बड़े खुश होते हैं. उसने ऐसी -ऐसी कमाल की चीज़ें बनाई हैं कि वाकई दुनिया भर के रेस्टॉरेन्ट में खाने के बाद अब एहसास हो रहा है कि आप अपने घर में यदि आराम से और प्यार से सिंपल चीजों के साथ अगर आप अपनी मनपसंद चीज़ बनाएं तो उस से टेस्टी और कुछ हो नहीं सकता.

याद आया बच्चों का बचपन

अर्चना पूरण सिंह ने बताया कि उन्हें लॉकडाउन में एक बार फिर से अपने बच्चों का बचपन याद आ रहा है. उन्होंने कहा कि सच कहूं तो मेरे घर में सुबह से ही ऐसी नौटंकियां शुरू हो जाती हैं. कोई किसी के कमरे में जाकर छेड़ता है. मैं जब भी चलती हूं तो मुझे पीछे से छेड़ना शुरू कर देते हैं तो मुझे इतना गुस्सा आता कि मैं सच में बोलती हूं उनसे कि ये मत करो मेरे साथ, लेकिन वो वही करेंगे जिससे मुझे गुस्सा आता है. और फिर एक भाई करता है तो दूसरा भाई और मज़े लेता है. फिर मैं सोंचती हूं कि मैं रिएक्ट ना करूं, रिएक्ट नहीं करती तो वो और करते हैं और रिएक्ट करो तो वो हंसते हैं. तो ये जो छेड़छाड़ है, हम काम में सीनियर हो गए हैं तो किसी और को इतने गट्स होते नहीं कि हमको छेड़े, लेकिन अपने जो बच्चे होते हैं ना, वो इतने पंगे ले लेते हैं और मैं उनसे नाराज़ भी नहीं हो पाती क्यूंकि वो मुझे वैसे ही देखते हैं जैसे बचपन में मेरे साथ छेड़खानियां और शैतानियां करते थे.

ऐसे ही आज भी होता है, अभी भी उन्हें बहुत मार पड़ती है, जैसे ही मुझे वो छेड़ते हैं तो उन्हें थपाक से पड़ता है. मैं उनसे बोलती भी हूं कि तुमको डर नहीं लगता मुझसे, तो वो दोनों बोलते हैं, "आपको लगता है, आपके थप्पड़ से हमको कुछ भी फर्क पड़ता है." ये चलता रहता है और काफी जोर से मारती हूं मैं. इसी वजह से घर में एक बचपन का, एक शैतानी का और बहुत ही हंसमुख वातावरण बना रहता है घर में जिसकी वजह से दिन कहां निकल जाता है पता ही नहीं चलता.

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