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Gold Review: दमदार, देशभक्‍त‍ि भुना ले जाएगी अक्षय की फिल्‍म

अक्षय कुमार की 15 अगस्‍त को रिलीज फिल्‍म गोल्‍ड देशभक्‍त‍ि से भरपूर है. इसमें स्‍पोर्ट्स, ड्रामा, हिस्‍ट्री सब कुछ नजर आता है. पढ़‍िए फिल्‍म का रिव्‍यू.

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आरजे आलोक [edited by: महेन्द्र गुप्ता]नई द‍िल्‍ली, 15 August 2018
Gold Review: दमदार, देशभक्‍त‍ि भुना ले जाएगी अक्षय की फिल्‍म गोल्‍ड पोस्‍टर

फिल्म का नाम : गोल्ड

डायरेक्टर: रीमा कागती

स्टार कास्ट: अक्षय कुमार, विनीत कुमार सिंह, अमित शाद, कुणाल कपूर, मौनी रॉय ,सनी कौशल

अवधि: 2 घंटा 34 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग:  4.5 स्टार

डायरेक्टर रीमा कागती लीक से हटकर सिनेमा के बारे में जानी जाती हैं. इससे पहले उन्होंने तलाश बनाई थी और अब अक्षय कुमार के साथ मिलकर हॉकी के पहले गोल्ड पर आधारित फिल्म बनाई है. फिल्म देशभक्ति के जज्बे से भरी हुई नजर आती है. फिल्म की कास्टिंग भी काफी अलग है. पढ़िए फिल्‍म का रिव्‍यू.

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कहानी:

फिल्म की कहानी 1936 से शुरू होती है. जब बर्लिन में ब्रिटिश इंडिया के तहत भारत की हॉकी टीम कंपनी जाती है, इसमें जूनियर मैनेजर के तौर पर तपन दास (अक्षय कुमार) होते हैं और उस टीम का नेतृत्व करते हैं सम्राट (कुणाल कपूर). फिल्म में इम्तियाज (विनीत कुमार सिंह ) भी मौजूद होते हैं, इस साल भारत गोल्ड तो जीत जाता है, लेकिन ब्रिटिश इंडिया का झंडा फहराया जाता है, जो कि तपन को पसंद नहीं आता और वह ठान लेता है कि जब भी अगली बार भारत की हॉकी टीम खेलेगी तो स्वतंत्र भारत के झंडे के अंतर्गत खेलेगी.  कहानी आगे बढ़ती है, जिसमें राजकुमार रघुवीर प्रताप सिंह (अमित शाद) और पंजाब के रहने वाले हिम्मत सिंह (सनी कौशल )की एंट्री होती है. एक बार फिर से टीम का गठन होता है और स्वतंत्र भारत में 1948 में भारतीय हॉकी टीम किस तरह से 200 साल की गुलामी का बदला एक गोल्ड मेडल जीतकर लेती है, यही फिल्म में दर्शाया गया है, जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

क्‍यों देख सकते हैं:

फिल्म की कहानी काफी दमदार है. आजादी के पहले का दौर कैसा है और फिर आजादी के बाद किस तरह खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है, यह कहानी बड़े ही उम्दा तरीके से डायरेक्टर रीमा कागती ने दिखाई है. फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि किस तरह से ब्रिटिश टीम के अंतर्गत भारतीय खिलाड़ी हॉकी खेलते हैं और जब भारत आजाद हो जाता है तो भारत के झंडे को लहराते देख अलग ही जज्बा सामने दिखाई देता है. संवाद बैकग्राउंड स्कोर और साथ ही साथ डायरेक्शन कमाल का है. सिनेमेटोग्राफी बढ़िया है और जिस तरह से लोकेशन सेलेक्ट की गई है वह काबिले तारीफ है. फिल्म में कई सारे ऐसे सीन हैं जो आपके दिल में घर कर जाते हैं. जैसे हर एक किरदार की जर्नी और भारत देश के लिए खेलने का जज्बा, कमाल का दिखाया गया है.

मौनी रॉय इस फिल्म से डेब्यू कर रही हैं और फिल्में ठीक-ठाक काम किया है, वही कुणाल कपूर और अमित शाद का काम काफी बढ़िया है. मुक्काबाज़ फिल्म विनीत कुमार सिंह ने लाजवाब अभिनय किया है और सनी कौशल पंजाबी किरदार में बहुत ही उम्दा दिखाई देते हैं. अक्षय कुमार इस फिल्म में बंगाली कोच का किरदार निभाते हुए दिखाई देते हैं जो कि आप को कहानी के साथ बांधे रखता है. एक बार फिर से अक्षय ने यह बात बता दिया है कि क्यों उन्हें बढ़िया एक्टर कहा जाता है. देश भक्ति से लबरेज़ फिल्म है, जो कि यादगार बन जाती है. एक और अच्छी बात है कि इसे सिंगल थिएटर के साथ-साथ मल्टीप्लेक्स में भी देखा जा सकता है.

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कमज़ोर कड़ियां:

छोटी-मोटी बातों को छोड़ दें  तो फिल्म की कमजोर कड़ी कोई खास नहीं है. फिल्म की लेंथ थोड़ी छोटी की जा सकती थी, जिसकी वजह से फिल्म और उम्‍दा हो सकती थी .

बॉक्स ऑफिस :

फिल्म का बजट लगभग 80 करोड़ रुपए बताया जा रहा है.  बॉक्स ऑफिस पर इसका मुकाबला फिल्म सत्यमेव जयते से है. अक्षय की मौजूदगी और ट्रेलर के हिसाब से दर्शक फिल्म देखने जरूर जाना चाहेंगे. यह बेहद खास होगा कि लंबे वीकेंड पर गोल्ड क्या कमाल करती है.

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