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सलमान खान के फैन का जय हो रिव्यू

सलमान खान की शुक्रवार को रिलीज फिल्‍म 'जय हो' की शुरुआत ऐसी ही है. यह आपको बोरिंग और घिसा-पिटा फिल्‍मी प्‍लॉट लग सकता है और संभव है आप अपने दोस्‍तों को व्‍हाट्सअप, फेसबुक या एसएमएस के जरिए तुरंत यह बता दें कि फिल्‍म फुस्‍स है. लेकिन ठहरिए...कई बार आगाज देखकर अंत का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, क्‍योंकि 'आम आदमी सोता हुआ शेर है. उंगुली मत कर, जाग गया तो चीर-फाड़ देगा.'
सलमान खान के फैन का जय हो रिव्यू सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ का पोस्टर
स्वपनल सोनलनई दिल्ली, 19 November 2014

फिल्म रिव्यूः जय हो
4 स्टार

पब में कुछ लड़के एक लड़की को छेड़ते हैं, पुलिस की मदद से वह लड़की तब बच जाती है. अगले दिन गुंडे पुलिस वाले से लड़की का नाम पता लेकर उसके घर उसे उठाने के लिए पहुंचते हैं. मुहल्‍ले के नायक तक यह बात पहुंचती है और गुंडे सोसाइटी के गेट तक भी नहीं पहुंच पाते हैं. मारधाड़ के साथ फिल्‍म की शुरुआत और फिर गाना बजाना.
सलमान खान की शुक्रवार को रिलीज फिल्‍म 'जय हो' की शुरुआत ऐसी ही है. यह आपको बोरिंग और घिसा-पिटा फिल्‍मी प्‍लॉट लग सकता है और संभव है आप अपने दोस्‍तों को व्‍हाट्सअप, फेसबुक या एसएमएस के जरिए तुरंत यह बता दें कि फिल्‍म फुस्‍स है. लेकिन ठहरिए...कई बार आगाज देखकर अंत का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, क्‍योंकि 'आम आदमी सोता हुआ शेर है. उंगुली मत कर, जाग गया तो चीर-फाड़ देगा.'
'जय हो' सलमान खान के फैंस के लिए एक बोनस बोनांजा है. बोनस इसलिए कि अब तक जो फैंस परदे पर अपने हीरो की एक झलक और उसकी 'लार्जर दैन लाइफ' इमेज को देखने भर से ही खुश हो लेते थे, उनके लिए इस फिल्‍म में कहानी है, ड्रामा है, कॉमेडी है, एक्‍शन है और इन सबके साथ है एक संदेश- 'अगर आप किसी को थैंक्‍स बोलना चाहते हैं तो थैंक्यू मत बोलिए, तीन लोगों की मदद कीजिए और उन तीन लोगों से कहिए कि वह भी तीन लोगों की मदद करें.' यकीनन फिल्‍म देखकर जब आप बाहर निकल रहे होंगे तो आपके जेहन में यह संदेश असर कर चुका होगा.
टीवी से लेकर फिल्‍मी परदे के कई नामी कलाकारों के होने के बावजूद 'जय हो' सलमान खान की फिल्‍म है. सलमान के फैंस के लिए एक पते की बात यह भी है कि इस फिल्‍म में उनका हीरो मारधाड़ से ज्‍यादा एक सेंसिबल इंसान है, जो दूसरों के दुख-दर्द में उसकी मदद करता है. लेकिन थैंक्‍स के बदले सिर्फ एक वादा लेता है कि वह तीन लोगों की मदद करेंगे.

फिल्‍म की कहानी
जय अग्निहोत्री (सलमान खान) एक पूर्व सैन्‍य अफसर है, जो अब गैराज चलाता है. जय जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा आगे रहता है. परिवार में उसकी मां है, एक बड़ी बहन (तब्बू) है. जीजा हैं, छोटा नटखट भांजा है और साथ ही कुछ दोस्‍त. सब अच्‍छा चल रहा होता है, लेकिन लोगों के लिए अच्‍छा करते-करते वह गुंडों से उलझता रहता है और इसी उलझन की आंच एक दिन उसके परिवार तक पहुंच जाती है. अब लड़ाई बराबरी की है, क्‍योंकि एक तरफ सुलझा, ताकतवर लेकिन गुस्‍सैल जय है तो दूसरी ओर प्रदेश के गृह मंत्री दशरथ सिंह (डैनी). आगे बढ़ती कहानी जय को दशरथ सिंह के सामने हाथ जोड़ने पर मजबूर कर देती है, लेकिन क्‍या जय माफी मांगता है या फिर अपने उसूल और परिवार के लिए जान की बाजी लगाता है. जय के संदेश का क्‍या, जिससे वह समाज में बदलाव लाना चाहता है. उसे विश्‍वास है कि एक आदमी भी समाज मे परिवर्तन ला सकता है तो क्‍या जय अपने इस मकसद में कामयाब हो पाता है...यकीनन इन सभी सवालों के जवाब आपको जय अग्निहोत्री ही दे सकता है.

अभिनय पक्ष
यह फिल्‍म 'सलमान जॉनर' का विस्‍तार है. सलमान हमेशा से एक अच्‍छे एंटरटेनर रहे हैं, लेकिन इस फिल्‍म ने उन्‍होंने अच्‍छा अभिनय भी किया है. कई दृश्‍यों में सलमान के आंसू दर्शकों को भावुक बना सकते हैं. इसके साथ ही शेर की तरह दहाड़ने वाले दृश्‍यों में भी सलमान किसी शेर की तरह ही दिखे हैं.
फिल्‍म की अभिनेत्री डेजी शाह की यह पहली फिल्‍म है. डेजी इससे पहले कोरियोग्राफर थीं और गणेश आचार्य को असिस्‍ट करती थीं. फिल्‍म के डायरेक्‍टर सोहेल खान और अभिनेता सलमान खान ने डेजी के इस गुण का भरपूर फायदा उठाया है. साधारण लेकिन कर्णप्रिय धुनों के बीच डेजी को झूमते, नाचते देखना अच्‍छा लगता है. हां, एक्टिंग के मामले में उन्‍हें अभी लंबा सफर तय करना होगा.
निगेटिव रोल में डैनी हमेशा की तरह जम रहे हैं. महत्‍वाकांक्षी और बैलेट से लेकर बुलेट तक में अपनी पैठ रखने वाले गृहमंत्री की भूमिका में वह अच्‍छे लगे हैं. फिल्‍म का 'सरप्राइज पैकेज' बताई जा रही सना खान ने कोई खास सरप्राइज नहीं दिया. हां, उन्‍हें जो किरदार दिया गया था उन्‍होंने उसे बखूबी निभाया है. सलमान के भांजे के किरदार में नमन जैन दर्शकों को हंसाते हैं.
सलमान खान की बड़ी बहन के किरदार में तब्बू अच्‍छी लगी हैं. खासकर भाई बहन के बीच संवाद और आपसी तालमेल बढि़या है. सलमान की मां के किरदार में नादिरा बब्‍बर थोड़ी ओवर लगी हैं. बाकी छोटे किरदारों में मो‍हनीष बहल, आदित्‍य पंचोली, शरद कपूर, पुलकित सम्राट, यश टोंक, अस्मित पटेल, महेश ठाकुर, महेश मांजरेकर, वत्‍सल सेठ ठीक हैं.
फिल्‍म में एक और बेहतरीन लेकिन छोटा किरदार जेनिलिया डिसूजा का है. अपाहिज लड़की की किरदार में हमेशा हंसते रहने वाली जेनिलिया ने जान डाल दी है.

...और सब कुल मिलाकर
'जय हो' दक्षिण भारतीय फिल्‍म 'स्‍टालिन' की रीमेक है, लेकिन बतौर निर्देशक सोहेल की मेहनत दिखाई देती है और वह रंग लाई है. फिल्‍म का संगीत पक्ष ठीक-ठाक है. गीत सुनने लायक हैं. एक गुजराती गीत (फोटोकॉपी) गुजरात में धूम मचाने के लिए काफी है.
फिल्‍म में जबरदस्‍त एक्‍शन है. खासकर डर्ट बाईक चेज और इस दौरान ट्रेन के सामने बेहतरीन एक्‍शन देखने को मिलता है. फिल्‍म की एक खास बात यह भी है कि इसमें बेवजह एक्‍शन ठूंसा नहीं गया है.
सोहेल खान के निर्देशन में यह फिल्‍म ऐसे समय आई है, जब सड़क से लेकर संसद तक 'आम आदमी' चर्चा में है. फिल्‍म का नायक आम आदमी है और एक अकेले की शुरुआत से बदलाव की बात करता है. उसका मानना है कि यह बदलाव सिर्फ राजनीति या वर्दी पहनकर ही नहीं बल्कि अपने स्‍तर पर काम करके भी लाया जा सकता है. ऐसे में इस फिल्‍म के विषय में अरविंद केजरीवाल की थोड़ी झलक देखने को मिलती है. हालांकि जय और केजरीवाल दोनों का तरीका बिल्‍कुल अलग है. बहरहाल, जैसा कि पहले ही स्‍पष्‍ट है यह फिल्‍म सलमान के फैंस को बहुत पसंद आएगी और यदि आप सलमान फैन नहीं भी हैं तो एक बार देखना तो बनता है बॉस... आगे रावण की लीला पास है, बाकी सब फर्स्‍टक्‍लास है.... जय हो!!!

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