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पीएम नरेंद्र मोदी बायोप‍िक: फिल्म पीएम के व्यक्तित्व को छू भी नहीं पाए विवेक ओबेरॉय

पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में एक बार फिर ऐत‍िहास‍िक जीत दर्ज की है. हर तरह मोदी-मोदी की गूंज है, इस बीच स‍िनेमा के पर्दे पर भी पीएम मोदी की बायोप‍िक र‍िलीज हो गई. आइए जानते हैं कैसी बनी है फिल्म.

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aajtak.in [Edited By: ऋचा मिश्रा]नई दिल्ली, 24 May 2019
पीएम नरेंद्र मोदी बायोप‍िक: फिल्म पीएम के व्यक्तित्व को छू भी नहीं पाए विवेक ओबेरॉय पीएम मोदी के किरदार में व‍िवेक ओबेरॉय
फिल्म: PM Narendra Modi
कलाकार: Vivek Oberoi
निर्देशक: Omung Kumar

पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में एक बार फिर ऐत‍िहास‍िक जीत दर्ज की है. हर तरह मोदी-मोदी की गूंज है, इस बीच स‍िनेमा के पर्दे पर भी पीएम मोदी की बायोप‍िक र‍िलीज हो गई. फिल्म को डायरेक्टर ओमंग कुमार ने बनाया है. ये फिल्म एक ऐसी शख्स‍ियत पर बनी है ज‍िससे हम बीते कई सालों से देख रहे हैं. ज‍िसका नाम है मोदी. इसल‍िए फिल्म में देखने को कुछ नया नहीं है, हां वो सब है जो हम जानते हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी मोदी के चाय बेचने से लेकर देशसेवा करने तक और फिर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को द‍िखाती है. फिल्म की कहानी का अंत साल 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम पद की शपथ लेने पर होता है. फिल्म को देखकर लगता है कि व‍िवेक ओबेरॉय और उनकी टीम ने चंद महीनों का इंतजार किया होता तो वो साल 2019 की झलक भी फिल्म में द‍िखा सकते थे. 

एक्ट‍िंग

व‍िवेक ओबेरॉय ने पीएम नरेंद्र मोदी की बायोप‍िक को अपनी फिल्मों में कमबैक के लिए चुना. लेकिन उनकी अदाकारी फिल्म में न‍िराश करने वाली है. उन्हें देखकर ये कहीं से नहीं लगता कि वो पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका में हैं. पीएम जैसा आत्मविश्वास विवेक ओबेरॉय की एक्टिंग में कहीं नजर नहीं आता. जबकि मोदी के संवाद तरीका बहुत प्रभावी है. इसी कला के जरिए मोदी देश की जनता के द‍िल को छूते हैं. लेकिन व‍िवेक ओबेरॉय अपनी फिल्म में मोदी के व्यक्तित्व की इस खासियत को छू भी नहीं पाए हैं.

पीएम मोदी बायोप‍िक बनाने की ज‍िम्मेदारी ओमंग कुमार के कंधों पर थी. जो इसके पहले मैरी कॉम की बायोप‍िक में शानदार हुनर द‍िखा चुके हैं. लेकिन इस बार उन्होंने नरेंद्र मोदी की बायोप‍िक में न‍िराश कर देने वाला काम किया है. फिल्म के दूसरे कलाकारों की अदाकारी पर नजर डालें तो बोमन ईरानी, ब‍िजनेसमैन रतन टाटा के छोटे रोल में भी इम्पैक्टफुल हैं.

दर्शन कुमार ने ब‍िकाउ पत्रकार का रोल किया है जो ठीक-ठाक है. वहीदा वहाब ने हीराबेन का रोल किया है जो नॉट बैड टाइप है. एक लाइन में कहे तो किसी किरदार ने यादगार छाप नहीं छोड़ी है. फिल्म एक पावरफुल पर्सनाल‍िटी पर बनाई गई है लेकिन पूरी कहानी में कोई पावर नजर नहीं आता है.

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