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Movie Review: भरपूर मसालों से लबरेज 'कैप्टन अमेरिका'

डिज्नी स्टूडियो ने भारतीय दर्शकों की नब्ज पहचान ली है, और वह लगातार उसी तरह की फिल्में लेकर आ रहा है जो दर्शकों के दिल में उतरे. पहले उसने भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म 'द जंगल बुक' दी जो 3डी में थी अब वह सुपरहीरो की फिल्म 'कैप्टन अमेरिकाः सिविल वॉर' लेकर आया है. जानें कैसी है फिल्म...

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aajtak.in
नरेंद्र सैनी नई दिल्ली, 17 May 2016
Movie Review: भरपूर मसालों से लबरेज 'कैप्टन अमेरिका'

रेटिंगः 3.5 स्टार
डायरेक्टरः एंथनी रूसो और जो रूसो
कलाकारः क्रिस इवांस, स्कारलेट योहानसन, रॉबर्ट डाउनी जूनियर, एलिजाबेथ ओल्सन और जेरमी रेनर

डिज्नी स्टूडियो ने भारतीय दर्शकों की नब्ज पहचान ली है, और वह लगातार उसी तरह की फिल्में लेकर आ रहा है जो दर्शकों के दिल में उतरे. पहले उसने भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म द जंगल बुक दी जो 3डी में थी अब वह सुपरहीरो की फिल्म 'कैप्टन अमेरिकाः सिविल वॉर' लेकर आया है, और यह भी 3डी में है. हॉलीवुड में वैसे भी एक नया ट्रेंड चल रहा है, और वह है ढेर सारे सुपरहीरोज का. पहले 'एवेंजर्स' और अब 'कैप्टन अमेरिका.'

कुछ दिन पहले रिलीज हुई 'बैटमैन वर्सेज सुपरमैनः डॉन ऑफ जस्टिस' में दो सुपरहीरो का मुकाबला दिखा था, और अब 'कैप्टेन अमेरिकाः सिविल वॉर' में भी हमारे सुपरहीरो दो गुटों में बंट चुके हैं, लेकिन दुनिया को बचाने का उद्देश्य उनका बदस्तूर कायम है. 'कैप्टन अमेरिका' की कहानी का एक बेस है और मार्वल की पिछली फिल्म 'एवेंजर्सः ऐज ऑफ अल्ट्रॉन' से कहानी का कनेक्शन भी है.

कहते हैं सौ अच्छे काम को धोने के लिए एक गलती काफी है. ऐसा ही कुछ सुपरहीरोज के साथ भी होता है. सुपरहीरोज से नुक्सान हो जाता है और सारी उंगलियां उनकी ओर उठने लगती हैं. सुपरहीरोज को लेकर जवाबदेही तय करने का राजनैतिक प्रेशर बढ़ने लगता है. उनके अस्तित्व पर सवालिया निशान लगने लगते हैं. फिर एक फैसला लिया जाता है, जिस पर कैप्टन अमेरिका राजी नहीं होता है जबकि अल्ट्रॉन्स की वजह से पछतावे की आग में जल रहा आयरमैन टोनी स्टार्क को इस पर कोई आपत्ति नहीं होती है. इस तरह एवेंजर्स की टीम दो हिस्सों में बंट जाती है. ब्लैक विडो, हॉक आइ, ब्लैक पैंथर, ऐंट मैन, स्पाइडरमैन, फाल्कन, विजन जैसे सुपरीहीरो को भी एक टीम चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

मार्वल स्टूडियो के सुपरहीरो हॉलीवुड के पसंदीदा रहे हैं और उन्हें भुनाना भी हॉलीवुड को बखूबी आता है. फिर डायरेक्टर एंथनी और जो ने इतने ढेर सारे सुपरहीरो पिरो दिए हैं कि पूरी फिल्म से नजर नहीं हटती है. स्क्रिप्ट एकदम टाइट है और कहानी तेजी से भागती है, बिल्कुल झट में एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाने वाले सुपरहीरोज की तरह. फिल्म के एक्शन सीन हैरत में डालने वाले हैं, और वीएफएक्स और टेक्नोलॉजी के कमाल से दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर देते हैं. नए सुपरहीरो (स्पाइडरमैन और ब्लैक पैंथर) आने से नए फैन्स जरूर इस फ्रेंचाइजी से जुड़ेंगे और यह दोनों ही बेहतरीन हैं. हालांकि पहली बार इन सुपरहीरोज की फिल्म को देख रहे दर्शकों को थोड़ी उलझन जरूर हो सकती है.

बॉलीवुड के पास इस हफ्ते कोई ऐसी बड़ी फिल्म नहीं है. 'सिविल वॉर' 'कैप्टन अमेरिका' सीरीज की सबसे मजबूत फिल्म है. इस तरह कैप्टन के पास बॉक्स ऑफिस पर जौहर दिखाने का पूरा मौका है और उसके पास हर वह मसाला भी है जो भारतीय दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच सके.

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