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Milan Talkies Review: कमजोर कहानी की भेंट चढ़ी फिल्म, नहीं दिखा तिग्मांशु धुलिया का जादू

तिग्मांशु धुलिया की पिछली फिल्म साहब बीवी गैंगस्टर 3 फ्लॉप थी. आइए जानते हैं तिग्मांशु की नई फिल्म मिलन टॉकीज किस तरह से बनी है. 

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aajtak.in [Edited by: सुधांशु माहेश्वरी]नई दिल्ली, 15 March 2019
Milan Talkies Review: कमजोर कहानी की भेंट चढ़ी फिल्म, नहीं दिखा तिग्मांशु धुलिया का जादू मिलन टॉकीज
फिल्म: Milan Talkies
कलाकार: अली फजल, श्रद्धा श्रीनाथ, आशुतोष राणा, सिकंदर खेर, संजय मिश्रा
निर्देशक: तिग्मांशु धूलिया

ऐसा लग रहा है कि तिग्मांशु धूलिया का जादू कमजोर हो गया है. साहब बीवी गैंगस्टर सीरीज में दो जबरदस्त फिल्म और बुलेट राजा जैसी रिवेंज ड्रामा के लिए महशूर तिग्मांशु धूलिया इस बार मिलन टॉकीज लेकर आए हैं. तिग्मांशु की पिछली फिल्म साहब बीवी गैंगस्टर 3 फ्लॉप थी. आइए जानते हैं तिग्मांशु की मिलन टॉकीज किस तरह की फिल्म है.

कहानी

अनू (अली फजल) नाम का एक लड़का बड़ा फिल्म निर्देशक बनने का सपना देखता है. पर उसकी जाती जिंदगी में तमाम तरह के संघर्ष हैं. वो छोटी-मोटी फिल्में बनाकर अपना गुजारा कर रहा है. इसी के साथ वह कुछ दोस्तों के साथ एक रैकेट भी चला रहा है. ये रैकेट परीक्षा में नकल करवाने का काम करता है. जनार्दन (आशुतोष राणा) को अपनी बेटी मैथली (श्रद्धा श्रीनाथ) को बीए की परीक्षा में पास करवाना है.

इस काम के लिए जनार्दन, अनू की मदद लेता है. यहीं से अनू मैथली के संपर्क में आता है और दोनों की प्रेम कहानी परवान चढ़ती है. लेकिन मैथली के पिता जनार्दन को ये रिश्ता मंजूर नहीं. दरअसल, वह अपनी बेटी की शादी किसी दूसरे लड़के के साथ करवाना चाहता है. कहानी में ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है और देखने को मिलती है प्यार की अग्नि परीक्षा. क्या अनू मैथली का प्यार हासिल कर पाता है, क्या दोनों अलग हो जाते हैं, कैसे जनार्दन अनू को रोकता है? अनू जनार्दन का सामना कैसे करता है इन तमाम चीजों को जानने के लिए तिग्मांशु धूलिया की फिल्म देखने जाना होगा.

जाहिर सी बात है कि मिलन टॉकीज की कहानी में कुछ नया नहीं है. ऐसी कहानियों के प्लाट पहले भी कई मर्तबा हमारे सामने आ चुके हैं. इसमें कोई नया ट्रीटमेंट भी नजर नहीं आता. ऊपर से फिल्म की कहानी में कई जगह स्पीड ब्रेकर हैं. इस वजह से ये कमजोर गति से आगे बढ़ती है. अंत तक आते-आते तमाम चीजें उबाऊ लगने लगती हैं. हालांकि फिल्म के पहले हाफ में कहानी को लेकर कुछ रोचकता है. लेकिन दूसरे हाफ में पूरी फिल्म पटरी से उतरी नजर आती है. कह सकते हैं मिलन टॉकीज की कहानी बिखराव का शिकार हो गई है.

एक्टिंग

अब अगर किसी फिल्म की नींव यानी कहानी ही कमजोर हो तो अच्छे कलाकार भी इसमें क्या कर सकते हैं. मिलन टॉकीज की स्टार कास्ट बेहतरीन है. कहानी में दम नहीं होने की वजह से कोई भी कलाकार अपने किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाया है. अनू के रूप में अली फजल का काम औसत ही कहा जाएगा. उन्होंने अपनी तरफ कोशिश की है, लेकिन वो तमाम तरह के बिखराव की वजह से ऑडियंस के साथ कनेक्ट नहीं कर पाता.

बड़े पर्दे पर अपना पदार्पण कर रहीं श्रद्धा श्रीनाथ ने जरूर कुछ हद तक प्रभावित किया है. फिल्म में उन्होंने डांस भी किया, इंटेंस सीन्स भी दिए और ड्रामा भी काफी किया है. दिक्कत यह हुई कि उनके किरदार में गहराई ही नहीं है. ठहराव की भी कमी लगती है. स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री अली के साथ जचीं है, लेकिन कहानी की वजह से दोनों के पास दर्शकों को बांध कर रखने के लिए कुछ भी नहीं है. आशुतोश राणा की काबिलियत को देखते हुए लगता है मिलन टॉकीज उनके लिए नहीं थी. उनका किरदार बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं लगा.

वैसे अगर ये फिल्म अगर 20 साल पहले आई होती तो शायद उसकी कहानी और किरदारों में लोगों को भरोसा होता. फिल्म में संजय मिश्रा का भी छोटा रोल है. लेकिन वो भी कुछ ख़ास नजर नहीं आते. इस रोमांटिक कहानी में एक विलेन भी हैं. सिकंदर खेर ने यह किरदार निभाया है. लेकिन स्क्रीन पर वो बेअसर नजर आए हैं. वैसे इस फिल्म में अगर किसी को देखकर चेहरे पर मुस्कान आती है तो वो हैं तिग्मांशु धूलिया. तिग्मांशु ने फिल्म में एक्टिंग भी की है. उन्होंने अनू के पिता का किरदार निभाया है. उनकी कॉमिक टाइमिंग और पंचेस सटीक हैं. फिल्म में बाकी कलाकारों का किरदार ज्यादा डेवलप नहीं है.

निर्देशन

तिग्मांशु धूलिया ने मिलन टॉकीज के साथ एक शुद्ध देसी रोमांटिक फिल्म बनाने की कोशिश की है. लेकिन इसे देखकर कहा जा सकता है वो इसमें बुरी तरह फेल हुए हैं. ये फिल्म आज के दर्शकों को हजम हो ही नहीं सकती. तिग्मांशु ने इस बात पर तो जोर दिया कि अनू, मैथली से प्यार करता है. लेकिन पूरी फिल्म में ये नहीं बताया की मैथली के पिता उनके रिश्ते को स्वीकार क्यों नहीं करते हैं. ये पहलू आखिर तक खटकता है. फिल्म की लेंथ भी समझ से परे है. क्लाइमेक्स भी निराशाजनक है और तमाम चीजें पहले से ही पता चल जाती हैं.

म्यूजिक

मिलन टॉकीज के गाने भी याद किए जाने लायक नहीं हैं. पूरी फिल्म में बस सोनू निगम का 'शर्त' गाना ही थोडा सुकून देता है. बैकग्राउंड स्कोर भी बहुत औसत है और किसी भी सीन को ज्यादा प्रभावी नहीं बनाता.

रोमांटिक फिल्में देखने का शौक है तो मिलन टॉकीज देखने से परहेज करें. तिग्मांशु इस फिल्म के जरिए बॉक्स ऑफिस पर कोई उम्मीद नहीं कर सकते.

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