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Review: कमजोर और बिखरी कहानी है 'काशी: इन सर्च ऑफ गंगा'

जानें कैसी है शरमन जोशी, ऐश्वर्या दिवान, गोविंद नामदेव,अखिलेन्द्र मिश्रा और मनोज जोशी की फिल्म काशी: इन सर्च ऑफ गंगा. पढ़ें र‍िव्यू.

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aajtak.in
मोनिका गुप्ता मुंबई, 26 October 2018
Review: कमजोर और बिखरी कहानी है 'काशी: इन सर्च ऑफ गंगा' शरमन जोशी

फिल्म का नाम- काशी: इन सर्च ऑफ गंगा

डायरेक्टर: धीरज कुमार

स्टार कास्ट: शरमन जोशी, ऐश्वर्या दिवान, गोविंद नामदेव,अखिलेन्द्र मिश्रा, क्रांति प्रकाश झा, परितोष त्रिपाठी, मनोज जोशी, मनोज पाहवा

अवधि: 2 घंटा 03  मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग:  1 स्टार

अभिनेता शरमन जोशी चुनिंदा फिल्में करते हैं.  इस बार उन्होंने काशी फिल्म का चयन किया है. पिछले दिनों पूरे देश के अलग-अलग शहरों में एक लड़की के गायब होने के पोस्टर्स ने कई सवालिया निशान उठा दिए थे कि आखिररकार वो लड़की कौन है. हालांकि, वो इस फिल्म का कैंपेन था. फिल्म रिलीज हो चुकी है. आइए जानते हैं आखिरकार कैसी बनी है यह फिल्म.

कहानी  

फिल्म की कहानी वाराणसी बेस्ड है, जहां का रहने वाला काशी (शरमन जोशी ) है . उसके घर में माता-पिता और बहन गंगा (प्रियंका सिंह) रहते हैं. लखनऊ से जर्नलिस्ट देविना (ऐश्वर्या दिवान) वाराणसी अपने रिसर्च के लिए आती हैं और उनकी मुलाकात काशी से होती है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब काशी की बहन गंगा अचानक लापता हो जाती है. उसकी तलाश में काशी को अलग अलग शहरों में भटकना पड़ता है. इन सबके बीच लोकल मंत्री बलवंत (गोविंद नामदेव) और बाकी किरदारों की एंट्री होती है. आखिरकार गंगा कैसे गुमशुदा हो गई है. उसके साथ क्या-क्या होता है. इन सभी बातों का पता आपको फिल्म देखकर ही चल पाएगा.

कमजोर कड़ियां

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी, डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले है. बहुत ही उबड़-खाबड़ कहानी है.  कोई भी किरदार आपको प्रभावित नहीं कर पाता है. मुद्दा अच्छा था, लेकिन एक अच्छी फिल्म बनते बनते रह गई. पूरी फिल्म में हर दसवें मिनट पर एक गाना आ जाता है, जो इसकी कहानी को और गड़बड़ करता है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक के तौर पर आपके जहन में ये बात चलने लगती है की आखिरकार ये फिल्म ख़त्म कब होगी. किरदारों का चयन भी काफी ढीला था. लग रहा था पूरी फिल्म का जिम्मा सिर्फ शरमन के कन्धों पर है, जितना पैसा अलग-अलग तरह के गानों में लगाया गया. उसे अच्छे एक्टर्स की तलाश में लगाया जाता तो फिल्म और बेहतर दिखाई देती. यहां तक की सीनियर एक्टर्स जैसे अखिलेन्द्र मिश्रा, गोविंद नामदेव  भी अपनी क्षमता से काफी कमजोर अभिनय करते हुए दिखाई दे रहे थे. बहुत ही निराश करती है ये फिल्म.

क्यों देखें फिल्म?

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है. इसके एक दो गाने भी अच्छे हैं, जिन्हे आप इंटरनेट पर सुन सकते हैं. यदि आप शरमन जोशी के बहुत बड़े दीवाने हैं तो यह फिल्म जब भी टीवी पर आए, उस समय एक बार जरूर देख लीजिएगा.

बॉक्स ऑफिस

प्रोमोशन के साथ फिल्म का बजट लगभग 8-10 करोड़ का नजर आता है और इसकी रिलीज भी अच्छी होगी. लेकिन बधाई हो, बाजार, अंधाधुन जैसी फिल्में पहले से ही चल रही हैं. उन सबके बीच इसका बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म कर पाना बहुत मुश्किल होगा.

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