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सीट पर बांध देता है फिल्म इन टु द स्टॉर्म का तूफान

एक वाक्य में कहना हो तो कह सकते हैं कि हम इसके जोरदार एक्शन के चलते अपनी सीट से बंधे रह गए. एक प्राकृतिक आपदा के दौरान इंसानी व्यवहार, रोमांच, रफ्तार और इन सबके बीच जीवन बचाने की जद्दोजहद का नाम है इन टु द स्टॉर्म.

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aajtak.in
सौरभ द्विवेदीनई दिल्‍ली, 08 August 2014
सीट पर बांध देता है फिल्म इन टु द स्टॉर्म का तूफान इन टु द स्टॉर्म का पोस्‍टर

फिल्म रिव्यूः इन टु द स्टॉर्म (इंग्लिश)
एक्टरः रिचर्ड आर्मिटेज, सारा वेन कैलीज, मैट वॉल्श
डायरेक्टरः स्टीवन क्वेल
ड्यूरेशनः 1 घंटा 29 मिनट
रेटिंगः 4 स्टार

कैसी है फिल्म इन टु द स्टॉर्म
एक वाक्य में कहना हो तो कह सकते हैं कि हम इसके जोरदार एक्शन के चलते अपनी सीट से बंधे रह गए. एक प्राकृतिक आपदा के दौरान इंसानी व्यवहार, रोमांच, रफ्तार और इन सबके बीच जीवन बचाने की जद्दोजहद का नाम है इन टु द स्टॉर्म. टू डी तकनीक से फिल्म शूट की गई, मगर फिर भी इसके सीन स्तब्ध कर देते हैं. आपदा का डर आप फिल्म देखते हुए अपने भीतर महसूस करने लगते हैं. गैरी, एलिसन, ट्रे और कैथलिन की लड़ाई आप लड़ने लगते हैं. प्रार्थना सी बुदबुदाने लगते हैं कि काश ये सब इस भयानक तूफान से बच जाएं. इसके भंवर में न फंसे. और ऐन इसी बिंदु पर फिल्म बेहद सफल नजर आती है.

गैरी एक हाई स्कूल में वाइस प्रिंसिपल है. उसके दो बेटे हैं डैनी और ट्रे. डैनी को लगता है कि मां के जाने के बाद उनके पिता उनसे दूर हो गए हैं. ये किशोरवय की मुश्किलों का दौर है. डैनी और ट्रे दोनों ही अपने कैमरे और वीडियो शूटिंग के लिए दीवाने हैं. डैनी अपने स्कूल की कैटलिन नाम की लड़की को पसंद करता है. स्कूल की ग्रेजुएशन सेरेमनी के दिन वह ऑफीशियल वीडियो शूट करने के बजाय कैटलिन की मदद के लिए एक बंद पड़ी पेपरमिल के कंपाउंड में शूटिंग के लिए चला जाता है ताकि कैटलिन अपना प्रोजेक्ट पूरा कर सके.

उधर शहर में पीट और एलिसन तूफान का पीछा कर रहे हैं. एलिसन मौसम विज्ञानी है और पीट टॉरनैडो नाम के इस तूफान की एक्सक्लूसिव वीडियो शूट करने वाले प्रॉडक्शन हाउस का मुखिया. उनके साथ वीडियो में असिस्ट करने के लिए कुछ और बच्चे भी हैं.

जब तूफान आता है तो एक ही इलाके के अलग-अलग कोने इसकी चपेट में आते हैं. बचते हैं और फिर और भी बड़े तूफान में आ घिरते हैं. इन सबके बीच उनके मन की गांठें, अंदर की असुरक्षाएं और ख्वाहिशें भी खुलती रहती हैं.

फिल्म बहुत बड़ी नहीं है. जबरन खींची नहीं गई है. इसके बावजूद इसमें कमोबेश सभी तत्व, सिरे और भाव आ गए हैं. इसे देखते हुए ऐसा लगता है जैसे डैनी और ट्रे के हाथ का एक कैमरा हम भी बन गए हों और हर रफ्तार को रेकॉर्ड करते जा रहे हैं. जब तूफान में बिल्डिंग, प्लेन, पेड़ और कारें माचिस की डिबिया सी खड़खड़ाती हैं तो हम सिहर कर भी निर्लिप्तता बनाए रखते हुए इसे दर्ज कर जाते हैं. साथ ही एक कामना भी पालते हैं कि ये सब जल्द बीत जाए और आसमां फिर से सूरज की रोशनी से कुछ गर्माहट पाए आश्वस्ति की.

रिचर्ड आर्मिटेज जाने माने एक्टर हैं और उन्होंने हीरो बने बिना फिल्म को कांधा दिया है. यही बात एलिसन का रोल निभाने वाली सारा कैलीज के बारे में भी कही जा सकती है. फिल्म में टीनएजर्स का किरदार निभाने वाले एक्टर्स मैक्स और नैथन में कुछ अनगढ़पन है और यही उन्हें यकीनी बनाता है.

डायरेक्टर स्टीवन क्वेल ने फिल्म में कहीं भी अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी. तूफान को दिखाया मगर अतिरंजित नहीं होने दिया. फिल्म में हास के पुट के लिए भी पर्याप्त गुंजाइश बनाई गई जो जोकरनुमा स्टंटबाजों के जरिए. इन्हें देख शेक्सपीयर के ड्रामा के कॉमेडियन या और पीछे लौटें तो भरतमुनि के समय के विदूषक याद आते रहते हैं.

इन टू द स्टॉर्म देखें अगर आपको अमेरिका में आई प्राकृतिक आपदाओं को नए सिरे से महसूसना है. अगर आपको रफ्तार, थ्रिल, खतरा और फिर इनसे उबरना पसंद है.

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