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कमजोर मानसून का मिल रहा संकेत

देश में मानसून कमजोर रहने का संकेत मिलने लगा है. जुलाई महीने में अभी तक पश्चिमोत्तर क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी इलाकों में बारिश नकारात्मक रही है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 8 जुलाई तक देश में बारिश 4 फीसदी कम रही है. बुधवार तक यह आंकड़ा नकारात्मक 2 फीसदी था.
कमजोर मानसून का मिल रहा संकेत 9 जुलाई को दक्षिण पश्चिम मानसून की सैटेलाइट इमेज - साभार स्काईमेट
aajtak.in [Edited By: राहुल मिश्र]नई दिल्ली, 10 July 2015

देश में मानसून कमजोर रहने का संकेत मिलने लगा है. जुलाई महीने में अभी तक पश्चिमोत्तर क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी इलाकों में बारिश नकारात्मक रही है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 8 जुलाई तक देश में बारिश 4 फीसदी कम रही है. बुधवार तक यह आंकड़ा नकारात्मक 2 फीसदी था.

कहां कितनी हुई बारिश
मध्य भारत में जून में बारिश अच्छी रही थी, लेकिन अब वहां बारिश 8 फीसदी कम है. दक्षिणी प्रायद्वीप में यह 7 फीसदी कम व पूर्वी इलाके में 4 फीसदी कम रही है. पश्चिमोत्तर भारत को छोड़कर समूचे देश में इस माह सामान्य से कम बारिश हुई है. हालांकि, पिछले कुछ दिन में पश्चिमोत्तर में भी बारिश घटने लगी है. जून के आखिर में, बिहार में 28 फीसदी वहीं उत्तर प्रदेश में 12 फीसदी कम बारिश हुई है. पश्चिम बंगाल के उप प्रभागों और हिमालयी पश्चिम बंगाल में मासिक औसत वर्षा में गिरावट दर्ज हुई है. वहीं जुलाई का महीना इन इलाकों में भारी राहत ले कर आया है. महीने की शुरूआत से ही पूर्वी भारत में अच्छी खासी बारिश देखने को मिली है.

आईएमडी का अनुमान
मौसम विभाग ने पहले ही कमजोर मॉनसून का अनुमान जताया है. आईएमडी के मुताबिक देश में बारिश 88 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, जून में बारिश सामान्य से 16 फीसदी अधिक रही. मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई और अगस्त में यह क्रमश: 8 फीसदी व 10 फीसदी कम रहेगी.

स्काईमेट का अनुमान
मौसम की भविष्यवाणी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने जुलाई में बारिश सामान्य से अधिक (104 फीसदी), अगस्त में सामान्य 99 फीसदी तथा सितंबर में 96 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. स्काईमेट ने कहा कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून के दौरान दो मौसम सक्रिय पॉकेट पश्चिमी तट व पूवोत्तर भारत हैं. सामान्य बारिश के रिकॉर्ड के बावजूद इन स्थानों पर जुलाई में बारिश कम रही है. स्काईमेट के अनुसार बारिश की कमजोर गतिविधियों से केरल में यह 30 फीसदी कम रही है, तटीय कर्नाटक में 32 फीसदी, कोंकण व गोवा में 15-15 फीसदी कम रही है.

70 फीसदी खरीफ फसलों को बारिश का इंतजार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने पिछले सप्ताह कहा था कि दलहन, तिलहन व कपास की फसल को बचाने के लिए मध्य व दक्षिणी भारत के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में बारिश की जरूरत है. आईसीएआर के अनुसार देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की शेष 70 फीसदी बुवाई को पूरा करने के लिए भी अच्छी बारिश की जरूरत है. इस महीने बारिश कम रहने के अनुमान के बीच सरकार ने किसानों से कहा है कि वे घबराएं नहीं क्योंकि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आपात योजना तैयार है.

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