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यूपी में इस साल पिछले 10 वर्षों में सबसे कम बारिश हुई

मानसून विदा होने की तैयारी में मौसम विभाग के आकड़ों के अनुसार इस बार सूबे में सामान्य के मुकाबले मात्र 59.8 फीसदी बारिश रिकॉर्ड की गई है. 37 जिलों में बहुत कम बारिश हुई है. राजधानी में इस बार मात्र 44.8 फीसदी ही बारिश हुई है.
यूपी में इस साल पिछले 10 वर्षों में सबसे कम बारिश हुई यूपी में इस साल कम बारिश हुई
अनूप श्रीवास्तव[Edited By: सना जैदी]नई दिल्ली, 13 September 2015

मानसून विदा होने की तैयारी में मौसम विभाग के आकड़ों के अनुसार इस बार सूबे में सामान्य के मुकाबले मात्र 59.8 फीसदी बारिश रिकॉर्ड की गई है. 37 जिलों में बहुत कम बारिश हुई है. राजधानी में इस बार मात्र 44.8 फीसदी ही बारिश हुई है.

पहले से ही पानी का संकट झेल रहे बुंदेलखण्ड में इस मानसून सीजन में सामान्य के मुकाबले सिर्फ 47.7 प्रतिशत ही बारिश हुई है. पश्चिम उत्तर प्रदेश इस बार बेहतर रहा. जंहा 69.4 फीसदी बारिश रिकॉर्ड की गई है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 59.1 और मध्य उत्तर प्रदेश में 50.2 प्रतिशत बारिश हुई है. पिछले साल जंहा 18 जिलो में 60 से 80 प्रतिशत बारिश हुई थी. वहां इस बार 23 जिले कम बारिश की जद में हैं. राजधानी में मानसून सीजन में मात्र 319.4 मिमी0 बारिश रिकॉर्ड हुई है, जो सामान्य का 44.8 प्रतिशत है. मौसम विभाग के अनुसार इस बार अभी तक मात्र 319.4 मिमी बारिश ही हुई है.

मौसम विभाग के अनुसार इस बार बारिश कम हुई. जिसकी वजह से कई जिलो में सूखे जैसे हालात हो गए हैं. कृषि विभाग के मुताबिक इस बार कृषि के लिहाज से स्थिति काफी तनावपूर्ण है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम बारिश होने से धान की फसल पर संकट उत्पन्न हो गया है. किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर बारिश नहीं हुई तो धान की फसल चौपट हो जाएगी.

चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां धान की बहुत अच्छी पैदावार होती है. सरकारी आंकड़ो के अनुसार इस साल जिले में कुल एक लाख छह हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की गई है. कम बारिश की वजह से ज्यादातर इलाको में धान की फसल सूखने लगी है. बरसात नहीं होने के पर प्रशासनिक अमला भी चिंतित है. सूखे से बचने के लिए तमाम कवायद की जा रही है.

सूत्रों के मुताबिक देश के11 जिलों के 40 प्रतिशत से भी कम बारिश होने से किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब हैं. इन जिलों में पीलीभीत, आगरा, कानपुर नगर, अमेठी, महोबा, रायबरेली, कुशीनगर, कानपुर देहात, कौशाम्बी, अम्बेडकर नगर और फतेहपुर शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि 26 जिलों में 40 से 60 फीसदी और 23 जिलों में 60 से 80 फीसदी बारिश हुई है.

प्रदेश सरकार ने फरवरी से अप्रैल के बीच आए चक्रवाती तूफान से प्रभावित किसानों को राहत बांटने का बंद काम एक बार फिर शुरू कर दिया है. फिलहाल 49 जिलों के लिए 300 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं. पैसे की कम उपलब्धता का हवाला देते हुए शासन ने जिला अधिकारियों को पहले लघु और सीमांत किसानों (एक हेक्टयेर तक) को ही राहत मुहैया करने के लिए कहा है. हालांकि केंद्र सरकार ने दो हेक्टयेर तक जोत वाले किसानों के मुवावजे का नियम बनाया है. प्रदेश में चक्रवाती तूफान से 7600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. इस लिहाज से किसानों को करीब 10 हजार करोड़ रुपए की राहत मिलनी चाहिए. सरकार ने 3500 करोड़ रुपए बाटंने के राहत का काम बंद कर दिया था. इस बीच केंद्र सरकार से प्रदेश को 2800 करोड़ रुपए मिले हैं.

किस जिले को कितनी मिली राहत ललितपुर- 21 करोड़, फतेहपुर-16 करोड़, बांदा-14 करोड़, सीतापुर-13 करोड़, हमीरपुर, गाजीपुर व झांसी-12-12 करोड़ रुपए की राहत मिली. हरदोई, जालौन, मुरादाबाद और इलाहाबाद-10-10 करोड़, मथुरा-11करोड़, रायबरेली, महोबा, प्रतापगढ़ और कानपुर देहात 9-9 करोड़, चित्रकुट-7 करोड़, चंदौली, रामपुर, शाहजंहापुर, बुलंदशहर-6-6 करोड़, हाथरस, लखनऊ और जौनपुर 5-5 करोड़, फिरोजाबाद व मैनपुरी 4-4 करोड़, अलीगढ़, कुशीनगर, देवरुया, कौशांबी व संभल- 3-3 करोड़, वाराणसी, मिर्जापुर, बरेली, बलिया, गोरखपुर, अमेठी, अमरोहा, गौतमबुद्ध नगर 2-2 करोड़, आजमगढ़, कन्नौज, खीरी, सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर, संतकबीर नगर और कानपुर1-1 करोड़ रुपए की राहत मिली.

 

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