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चेवेल्ला लोकसभा सीट: जहां TRS ने सीट छीनी, कांग्रेस ने उसका नेता

चेवेल्ला में 2014 में हुए लोक सभा चुनावों में टीआरएस, कांग्रेस और टीडीपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था. इन चुनावों में टीआरएस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी को 33.06 फीसदी यानी 4,35,077 वोट मिले थे और वह पहले नंबर पर रहे थे. उन्होंने कांग्रेस के पी. कार्तिक रेड्डी को 73 हजार वोटों से हराया था.

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भारत सिंहचेवेल्ला, 18 January 2019
चेवेल्ला लोकसभा सीट: जहां TRS ने सीट छीनी, कांग्रेस ने उसका नेता राहुल गांधी के साथ कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी

चेवेल्ला (Chelvella) लोकसभा सीट तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में पड़ती है. यह सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इस लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कई बड़े आईटी हब आते हैं, जिनमें माधापुर, गाचिबोली, कोंडापुर और मियांपुर जैसे इलाके आते हैं. फिलहाल यहां से तेलंगाना राष्ट्र समिति के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी (Konda Vishweshwar Reddy) सांसद हैं. वह पहली बार इस सीट से सांसद चुने गए हैं. हालांकि, अब वह टीआरएस का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

चेवेल्ला लोकसभा सीट 2008 में लोकसभा सीटों के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. यहां पर दो ही लोकसभा चुनाव हुए हैं. पहला 2009 में, जब यह सीट आंध्र प्रदेश में थी, दूसरी बार 2014 में जब यह सीट तेलंगाना राज्य में आ गई. 2009 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के कद्दावर नेता जयपाल रेड्डी यहां सांसद चुने गए थे. 15वीं लोकसभा में उनके पास साइंस और टेक्नोलॉजी और अर्थ साइंस के मंत्रालयों का प्रभार था. इससे पहले वह 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की कैबिनेट में सूचना और प्रसारण मंत्रालय का प्रभार भी संभाल चुके हैं. 1999 में उनकी 21 साल बाद कांग्रेस में वापसी हुई. इसके बाद वह यूपीए-1 में वह शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. यूपीए-2 में उनके पास शहरी विकास मंत्रालय और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की भी जिम्मेदारी रही. 2014 के चुनावों में टीआरएस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी को जीत मिली.

सामाजिक ताना-बाना

2011 की जनगणना के मुताबिक चेवेल्ला की करीब 50 फीसदी आबादी शहरी इलाकों में रहती है और 50 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में आती है. इस सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 14.71 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति की आबादी 5.7 फीसदी. चेवेल्ला में 11,53,049 पुरुष और 10,32,130 महिला मतदाता हैं. इनकी कुल संख्या 13,15,862 ठहरती है. हालांकि, इस सीट पर भी वोटर टर्नआउट काफी कम देखने को मिलता है. 2014 के लोकसभा चुनावों में यहां पर केवल 60.22 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जिसमें 60.43 फीसदी पुरुष मतदाताओं और 59.98 फीसदी महिला मतदाताओं ने वोट दिया था. चेवेल्ला लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं. ये सीटें महेस्वरम, राजेंद्रनगर, सेरीलिंगमपल्ली, चेवेल्ला, पारगी, विकाराबाद, तन्दूर की हैं. इनमें चेवेल्ला और विकाराबाद सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं और बाकी सीटें अनारक्षित हैं. यहां पर 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में राजेंद्रनगर, सेरीलिंगमपल्ली, चेवेल्ला, पारगी और विकाराबाद में टीआरएस के विधायक हैं तो महेस्वरम और तन्दूर में कांग्रेस के विधायक हैं.

2014 का जनादेश

चेवेल्ला में 2014 में हुए लोक सभा चुनावों में टीआरएस, कांग्रेस और टीडीपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था. इन चुनावों में टीआरएस के कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी को 33.06 फीसदी यानी 4,35,077 वोट मिले थे और वह पहले नंबर पर रहे थे. उन्होंने कांग्रेस के पी. कार्तिक रेड्डी को 73 हजार वोटों से हराया था. कांग्रेस के पी. कार्तिक रेड्डी को 27.51 फीसदी यानी 3,62,054 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर टीडीपी के टी. वीरेंदर गौड रहे थे. उन्हें 26.84 फीसदी वोट यानी 3,53,203 वोट मिले थे. दूसरे और तीसरे नंबर के बीच में 9 हजार से भी कम वोटों का अंतर रहा था.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

चेवेल्ला से कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी की लोकसभा में मौजूदगी 95 फीसदी रही है. यह राष्ट्रीय औसत- 80 फीसदी और तेलंगाना के औसत- 69 फीसदी से कहीं ज्यादा है. बहस की बात करें तो वह राष्ट्रीय औसत (64.8 बहस) से थोड़ा आगे और अपने राज्य के सांसदों के औसत- 37.4 से काफी आगे हैं. उन्होंने 66 बहसों में हिस्सा लिया. सवालों की बात करें तो उन्होंने कुल 225 सवाल पूछने का काम किया. हालांकि, वह राष्ट्रीय औसत- 285 और तेलंगाना के सांसदों के औसत- 295 से पीछे ही रहे. इसके अलावा उन्होंने तीन प्राइवेट मेंबर बिल भी पेश किए. इस मामले में वह राष्ट्रीय और राज्य के औसत (दोनों 2.2 बिल) से आगे रहे. कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी को अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये मिले थे. इसपर ब्याज समेत जमा हुई रकम (13.82 करोड़) में से उन्होंने 13.49 करोड़ रुपये यानी कुल आवंटित फंड की 134.85 फीसदी रकम खर्च की. उनके फंड में से 34 लाख रुपये खर्च नहीं हो सके.

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