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मैं भाग्य हूं: जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है मित्रता

aajtak.in[Edited by: दिनेश अग्रहरि]नई दिल्ली, 29 November 2017

मैं भाग्य हूं...मैं आपको रोज ज्ञान की बातें बताता हूं, जिंदगी की सच्चाई से रूबरू करवाता हूं. इस बार जानिए मित्रता की बातें.  मित्रता इस संसार की सबसे बड़ी पूंजी, मित्रता का कोई मोल नहीं, यह एक ऐसी दौलत है जिसके सामने दुनिया की कोई दौलत नहीं टिकती. भगवान राम-सुग्रीव और कृष्ण-सुदामा की मित्रता इस मामले में एक मिसाल है.

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