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ग्वालियर में समाया है मध्यकालीन भारतीय इतिहास

ग्वालियर का भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है. इस शहर की स्थापना सूर्यसेन नामक एक स्थानीय सरदार ने किया था. ग्वालियर का नाम सूर्यसेन ने उसे घातक रोगों से ठीक करने वाले चरवाहे के नाम पर रखा था. यह शहर तात्या टोपे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई और कुछ सिंधिया राजकुमारों जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारकों से भरा है.

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Sahitya Aajtak 2018
आज तक वेब ब्यूरोनई दिल्ली, 13 September 2013
ग्वालियर में समाया है मध्यकालीन भारतीय इतिहास ग्वालियर रेलवे स्टेशन

ग्वालियर का भारतीय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है. इस शहर की स्थापना सूर्यसेन नामक एक स्थानीय सरदार ने किया था. ग्वालियर का नाम सूर्यसेन ने उसे घातक रोगों से ठीक करने वाले चरवाहे के नाम पर रखा था.

ग्वालियर पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया. ग्वालियर पर पाल वंश, प्रतिहार वंश, गुलाम वंश, लोदी वंश, सूरी वंश, मुगल वंश के साथ ही कई मराठा छत्रपों का राज रहा. यह शहर तात्या टोपे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई और कुछ सिंधिया राजकुमारों जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारकों से भरा है.

क्या देखें
ग्वालियर का किला
मान मंदिर पैलेस
तेली का मंदिर
गुजारी महल संग्रहालय
तानसेन का मकबरा
गौस मोहम्मद का मकबरा
जय विलास पैलेस
जय विलास संग्रहालय

इसके अलावा आप यहां तेली का मंदिर, 10वीं सदी में बना सहस्त्रबाहु मंदिर, भीम सिंह की छतरी और सिंधिया स्कूल देख सकते हैं.

कैसे पहुंचें
हवाई मार्ग से ग्वालियर के लिए दिल्ली, भोपाल, इंदौर तथा मुंबई से नियमित उड़ाने मौजूद हैं. और यह रेल मार्ग से भी देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है.

महत्वपूर्ण शहरों से दूरी
नई दिल्लीः 327 किलोमीटर
भोपालः 430 किलोमीटर
मुंबईः 1080 किलोमीटर
चेन्नईः 1867 किलोमीटर
कोलकाताः 1261 किलोमीटर

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