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उम्मीद यही कि विजेंद्र एक और पदक लाएं

2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों में भारत को मुक्केबाजी में कांस्य पदक दिलाने के बाद उनका नाम भारत में हर किसी की जबान पर था. लेकिन 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने निराश किया और वे सेमीफाइनल मुकाबले में हार गए. कइयों को लगा वे अपनी धार खो बैठे हैं.

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aajtak.in
शांतनु गुहा रायनई दिल्ली, 04 November 2011
उम्मीद यही कि विजेंद्र एक और पदक लाएं विजेंदर सिंह

2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों में भारत को मुक्केबाजी में कांस्य पदक दिलाने के बाद उनका नाम भारत में हर किसी की जबान पर था. लेकिन 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने निराश किया और वे सेमीफाइनल मुकाबले में हार गए. कइयों को लगा वे अपनी धार खो बैठे हैं.

विजेंद्र अब पटियाला में हैं और अगस्त में न्यूयॉर्क सिटी में होने वाले वर्ल्ड पुलिस गेम्स के लिए रोजाना पांच घंटे प्रशिक्षण में गुजारते हैं. उसके बाद सितंबर में अजरबेजान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में उन्हें ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना होगा. उन्हें पूरा भरोसा है वे दोनों में जीत हासिल करेंगे.

आखिरकार, इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन की रैंकिंग्स के मुताबिक वे 75 किग्रा वर्ग में अब भी पहले स्थान पर हैं.

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