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'प्रैक्टिस में सुशील को नहीं मिले अच्छे सहयोगी'

सुशील कुमार ने लंदन ओलंपिक खेलों में रजत पदक के साथ लगातार दो ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाला पहला भारतीय बनकर इतिहास रचा लेकिन उनके पिता ने कहा कि अगर उनके बेटे के साथ अभ्यास के लिए अच्छे सहयोगी होते तो वह और बेहतर प्रदर्शन कर सकता था.
'प्रैक्टिस में सुशील को नहीं मिले अच्छे सहयोगी'
भाषानयी दिल्ली, 12 August 2012

सुशील कुमार ने लंदन ओलंपिक खेलों में रजत पदक के साथ लगातार दो ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाला पहला भारतीय बनकर इतिहास रचा लेकिन उनके पिता ने कहा कि अगर उनके बेटे के साथ अभ्यास के लिए अच्छे सहयोगी होते तो वह और बेहतर प्रदर्शन कर सकता था.

सुशील के पिता दीवान सिंह ने कहा, ‘उसके पास अभ्यास के लिए ऐसे लोग नहीं थे जो उसके स्तर के थे. यह निराशाजनक है कि वह ओलंपिक स्वर्ण पदक नहीं जीत सका लेकिन इसके बावजूद उसकी उपलब्धि एतिहासिक है. मुझे लगता है कि विश्व स्तरी ट्रेनिंग की कमी के कारण उसने मौका खो दिया. मुझे उससे स्वर्ण पदक की उम्मीद थी.’ बीजिंग खेलों के कांस्य पदक विजेता सुशील को फाइनल में जापान के तात्सुहीरो योनेमित्सु के हाथों 1-3 की शिकस्त के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा.

सुशील की भविष्य की योजना के बारे में पूछने पर उनके पिता ने कहा, ‘यह उस पर निर्भर करता है कि वह जारी रखना चाहता है या नहीं. हम उसे कुछ नहीं कहेंगे.’

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