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दवा नहीं, घरेलू फंडों से दें सर्दी-जुकाम को मात

सर्दी-जुकाम बार-बार होता है तो हर बार दवा का सहारा ना लें बल्कि घर में इन फंडों के इस्तेमाल से इलाज कर सकते हैं. जानिए, घर में ही आजमाए जाने वाले आसान से घरेलू नुस्खे.

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aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा बाजपेयी]नई दिल्ली, 20 December 2018
दवा नहीं, घरेलू फंडों से दें सर्दी-जुकाम को मात सर्दी-जुकाम के घरेलू उपचार

सर्दियों के मौसम में ठंड के बढ़ते ही सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में बढ़ोतरी हो जाती है. चिकित्सकों का मानना है कि इस मौसम में ठंड से बचने के लिए हम गरम कपड़े तो पहन लेते हैं, मगर ठंड के असर से बचने के लिए शरीर का बाहर के साथ-साथ अंदर से भी गरम रहना जरूरी है. पटना के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार दूबे का मानना है कि इन बीमारियों से बचने के लिए कई घरेलू नुस्खे भी अपनाए जा सकते हैं. सुनील कुमार दूबे कहते हैं कि ठंड में लौंग, तुलसी, काली मिर्च और अदरक से बनी चाय खांसी, सर्दी, जुकाम के लिए 'रामबाण' का काम करती है.

हाल ही में बॉल्सब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की मानद उपाधि से सम्मानित दूबे ने आईएएनएस से कहा कि इन बीमारियों का मुख्य कारण वायरस का बढ़ता प्रसार होता है. उन्होंने कहा कि जुकाम एक संक्रामक बीमारी है जो बहुत जल्दी बढ़ती है. यह बीमारी बहती नाक, बुखार, सुखी या गीली खांसी अपने साथ लाती है, जो श्वसन तंत्र पर अचानक हमला करता है.

उन्होंने कहा, "कॉमन कोल्ड में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान और सावधानी बरतनी चाहिए. सर्दियों में शहद का सेवन करने से शरीर को कई तरह की रोगों से दूर रखा जा सकता है. आयुर्वेद में शहद को अमृत माना गया है. सर्दी, जुकाम होने पर रात को सोने से पहले एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से यह खत्म हो जाती है."

उनका कहना है कि शहद शरीर के 'इम्युन सिस्टम' को दुरुस्त करता है.

उन्होंने कहा कि सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी खाने का बहुत फायदा मिलता है. यह शरीर को तो गर्म रखता ही है, साथ में बाजरे की रोटी में प्रोटीन, विटामिन बी, कैल्शियम, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट शरीर के लिए अच्छे होते हैं. ठंड से बचने के लिए बच्चों को भी बाजरे की रोटी खिलानी चाहिए.

दूबे ने आईएएनएस से कहा, "सर्दियों में मछली तथा सूप भी बेहद कारगर है. खाने में अदरक के प्रयोग से शरीर तो गरम होता ही है, साथ में पाचन क्रिया भी अच्छा होता है."

उन्होंने बताया कि आंवला डायबिटीज से परेशान लोगों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है. आंवला को प्राचीन आयुर्वेदिक प्रणाली में कई तरह के रोगों के इलाज के लिए लगभग 5000 साल से इस्तेमाल किया जा रहा है. आवंला की तुलना अमृत से की गई है. आंवला में विटामिन सी, विटामिन एबी, पोटैशिम, कैलशियम, मैग्नीशियम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड होते हैं. आंवला और मूंगफली सर्दियों में फायदेमंद होता है. तिलों के तेल से मालिश भी हमें ठंड से बचाने का काम करती है. उन्होंने बताया कि सर्दियों में मौसमी और संतरा खाने से बचना चाहिए. खजूर को गर्म दूध के साथ खाने पर भी सर्दी से राहत मिलती है.

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