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आपके दिमाग में भी है डिलीट बटन, निकाल फेंकिए बुरी यादें

aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा]
12 September 2018
आपके दिमाग में भी है डिलीट बटन, निकाल फेंकिए बुरी यादें
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कई बार हम चाहे जितनी भी कोशिश क्यों ना कर लें, कुछ चीजें हमारे दिमाग से कभी निकलती ही नहीं हैं. जैसे कहा जाता है कि आप किसी को माफ कर सकते हैं लेकिन भुला नहीं सकते हैं.

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हालांकि अगर आप बार-बार उन पुरानी यादों को दिमाग में दोहराएंगे तो दिमाग के लिए नयी यादें बनाना उतना ही मुश्किल हो जाएगा.
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लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर हम उन यादों से कैसे छुटकारा पाएं जिसने हमारी जिंदगियों को रोक कर रख दिया हो. विज्ञान कहता है कि इसका जवाब आपके भीतर ही है.

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हम सभी को पता है कि अभ्यास से हर इंसान धीरे-धीरे परफेक्ट बनता चला जाता है, चाहे क्रिकेट हो, पियानो हो या डांस हो. आप किसी चीज को जितनी बार दोहराते जाएंगे, आप उतने ही बेहतर तरीके से उस चीज को कर पाएंगे.
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यही बात यादों पर भी लागू होती है. अगर आप किसी याद को बार-बार दोहराते हैं तो फिर वह आपके अंदर उतनी ही गहराई से बैठती जाती है और फिर उसे डिलीट करना कठिन हो जाता है.
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तो फिर क्या करें?
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आप कल्पना कीजिए कि आपका दिमाग किसी सब्जी का बगीचा है जहां टमाटर, आलू, प्याज और बहुत सारी सब्जियां और फल उगे हुए हैं. अंतर बस इतना है कि आपके दिमाग में सब्जियों की जगह न्यूरॉन्स के बीच सिनैप्टिक कनेक्शन पैदा हो रहे हैं. इन्ही कनेक्शन के जरिए दिमाग तक चीजें पहुंचती हैं.
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जैसे आपको अपने बगीचे को सुंदर बनाए रखने के लिए पौधों की कटाई-छटाई करनी पड़ती है वैसे ही दिमाग के साथ भी करना पड़ेगा. दिमाग में काट-छांट का काम ग्लियाल कोशिकाएं करती हैं. ये आपके सिस्टम से खराब या कड़वी यादों को हटाती जाती हैं और दिमाग के किसी कोने में फेंकती रहती है, आपकी पहुंच से बहुत दूर.
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तो अब सवाल आता है कि इन कोशिकाओं को सक्रिय कैसे करें?
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पूरी नींद लीजिए-
क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपका दिमाग भर गया है. जब आप पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं तो आपका दिमाग स्टैंडबाई मोड में चला जाता है और अधिकतर हर तरह की मेमोरीज को इकठ्ठा करना शुरू कर देता है बिना बुरी और अच्छी यादों को अलग किए हुए. ठीक से नींद ना लेने पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. मान लीजिए कि ऑफिस में आपका किसी के साथ झगड़ा हुआ हो और आपको एक अहम प्रोजेक्ट भी खत्म करना है तो आपका दिमाग प्रोजेक्ट के बजाए ऑटोमैटिकली ऑफिस में हुई लड़ाई के बारे में सोचने लगेगा.
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लेकिन अगर आपने आराम कर लिया है तो आपकी ग्लियाल सेल्स अच्छी और बुरी मेमोरी में फर्क कर पाएंगी और खराब यादों को सिस्टम से बाहर फेंक देंगी. यही नहीं, आपके दिमाग में खुद पूरी क्लीनिंग प्रोसेस हो जाती है. जब आफ सोते हैं तो दिमाग की कोशिकाएं करीब 60 फीसदी तक सिकुड़ जाती हैं ताकि ग्लियाल कोशिकाओं के लिए स्पेस बन सके और आपके दिमाग का कूड़ा बाहर निकाला जा सके.

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खुद को बिजी रखना एक और जरूरी चीज है. दिन में करीब 6-7 घंटे तक काम करने के बाद आपका दिमाग इतना थक जाता है कि वह फालतू की चीजों के बारे में सोच ही नहीं पाता. काम करना औऱ खुद को व्यस्त रखना आपके दिमाग को नई यादें बनाने में मदद करता है और इश तरह पुरानी यादें खत्म होती जाती हैं.
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केवल आपका शरीर ही नहीं बल्कि दिमागी एक्सरसाइज करना भी जरूरी है. याद है कैसे आप दिन-रात सुडोकू खेलकर एक्सपर्ट बन जाते थे. इसी तरह बॉडी और माइंड से एक्सरसाइज करने से आपके दिमाग की कोशिकाएं अपना काम ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से काम करती हैं.

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