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हॉकिंग्स जैसा जीनियस था विनायक, रिजल्ट से पहले बीमारी ने ली जान

aajtak.in [Edited by: मंजू ममगाईं]
09 May 2019
हॉकिंग्स जैसा जीनियस था विनायक, रिजल्ट से पहले बीमारी ने ली जान
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एमिटी इंटरनेशनल का 10वीं का छात्र विनायक श्रीधर दुनिया छोड़ने से पहले उन सभी बच्चों के लिए मिसाल कायम कर गया है जो छोटी-छोटी बातों को लेकर जीवन से निराश हो जाते हैं. जी हां विनायक का शरीर भले ही व्हीलचेयर पर था लेकिन उसकी महत्वकांक्षाएं बेहद ऊंची थी. 16 वर्षीय विनायक हॉकिंग्स को अपना आदर्श मानते थे और भविष्य में अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनकर दुनिया को देखने का अपना सपना पूरा करना चाहते थे.
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इस साल हुई सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में  विनायक श्रीधर ने भी हिस्सा लिया था. उन्होंने 3 विषयों के पेपर भी दिए. लेकिन चौथा पेपर देने से पहले ही उसकी मत्यु हो गई. बता दें, सोमवार को जारी रिजल्ट में विनायक ने अंग्रेजी में 100, विज्ञान में 96 और संस्कृत में 97 अंक हासिल किए. जबकि वो कंप्यूटर साइंस और सोशल स्टडीज की परीक्षा नहीं दे पाए थे.

26 मार्च को ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम के एक गंभीर रोग की वजह से उनका निधन हो गया. दुनिया भर में लगभग 3500 बच्चों में से एक बच्चा इस रोग से पीड़ित होता है. चिंता की बात यह है कि यह एक यह लाइलाज बीमारी है. आइए जानते हैं आखिर क्या है यह बीमारी, लक्षण और बचाव के तरीके.
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विनायक दो साल की उम्र से ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की इस बीमारी से पीड़ित थे. इस बीमारी में उम्र के साथ बच्चे की बीमारी भी बढ़ने लगती है. विनायक को भी 7 वर्ष की आयु से चलने फिरने में दिक्कत महसूस होती थी. यही वजह थी कि वो अपना सारा काम व्हील चेयर की मदद से करते थे. उनके हाथ बेहद धीमी गति से काम करते थे. विनायक को पढ़ाई करने का बहुत शौक था. वह बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते थे.
(Pixabay Image)
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विनायक का कहना था कि जब स्टीफन हॉकिंग दिव्यांग होकर ऑक्सफोर्ड जा सकते हैं और विज्ञान की दुनिया में इतिहास रच सकते हैं तो वह अंतरिक्ष वैज्ञानिक क्यों नहीं बन सकते. उनके भीतर आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं थी. वह हमेशा आश्वस्त रहते थे कि परिणाम आने पर वह टॉपरों की लिस्ट में शामिल होंगे.
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क्या है यह बीमारी-
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मासपेशियों के रोगों का एक ऐसा समूह है, जिसमें लगभग 80 प्रकार की बीमारियां शामिल हैं. इस समूह में कई प्रकार के रोग शामिल हैं. इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर के भीतर कुछ ऐसे जीन पनपते हैं जिसकी वजह से वह मांसपेशियों को स्वस्थ रखने वाला प्रोटीन नहीं बना पाता. विनायक के केस में भी उनकी मांसपेशियों का मूवमेंट बहुत कम हो चुका था. यही वजह थी कि वो तेजी से लिख भी नहीं पाते थे.विनायक का शरीर इस बीमारी की वजह से व्हीलचेयर तक सीमित हो चुका था.
(Pixabay Image)
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मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण-
-मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक अनुवांशिक बीमारी है, जो आमतौर पर बच्चों में होती है. इस बीमारी की वजह से किशोर होते-होते बच्चा पूरी तरह विकलांग हो जाता है.
-ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की इस बीमारी में रोगी की मांसपेशियां कमजोरी होने लगती है. यह कमजोरी उम्र के साथ बढ़ती रहती है.

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मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लक्षण-
-इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत महसूस होती है.
-इस रोग से पीड़ित बच्चे को तेज चलने पर दिक्कत होती है और वो गिर जाता है.
-इस बीमारी से पीड़ित बच्चा उठते समय अपने घुटने या हाथ का सहारा लेता है.
-इस बीमारी से पीड़ित बच्चा चलने या दौड़ने पर जल्दी थक जाता है.
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बीमारी से बचने के उपाय-
-यूं तो इस बीमारी को लाइलाज बीमारियों की श्रेणी में रखा जाता है. यह रोग एक जीन विकृति है इसीलिए इसका पुख्ता इलाज जेनेटिक इंजीनियरिंग ही बताया जाता है.
-इसके अलावा इस बीमारी से निपटने के लिए आटोलोगस बोन मेरो सेल ट्रांसप्लांट और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट को शामिल किया जाता है.इसकी मदद से मांसपेशियों की सूजन कम करने के साथ शरीर में नई मांसपेशियों का निर्माण भी होता है. इस प्रयोग से ऐसे मरीजों की आयु बढ़ाई जा रही है.
-अगर इस बीमारी का समय रहते इलाज नहीं किया जाता तो ज्यादातर बच्चों की मौत 11 से 21 वर्ष की आयु के बीच में ही हो जाती है.
(Pixabay Image)

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