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जानिए कितनी खतरनाक है 'रैट फीवर' बीमारी, जिससे खौफ में है केरल

aajtak.in [Edited By: प्रज्ञा]
04 September 2018
जानिए कितनी खतरनाक है 'रैट फीवर' बीमारी, जिससे खौफ में है केरल
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केरल के ज्यादातर हिस्सों से बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब वहां बुखार की परेशानी ने घर कर लिया है. केरल में लेप्टोस्पायरोसिस या रैट फीवर तेजी से फैल रहा है. लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) सहित अन्य बुखार के कारण 29 अगस्त से अभी तक नौ लोग मारे गए हैं.
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स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अनुसार, सोमवार को पलक्कड़ और कोझीकोड़ जिलों में लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) के कारण सोमवार को दो व्यक्तियों की मौत हो गई.
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अधिकारियों ने बताया कि राज्य के विभन्न अस्पतालों में 71 लोग लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) से ग्रस्त पाये गए हैं, जबकि 123 लोगों में इस बीमारी के लक्षण मिले हैं.
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उन्होंने बताया कि सोमवार को 13,800 से ज्यादा लोगों ने अस्पतालों में विभिन्न बुखारों के लिए अपना इलाज कराया.

इनमें से डेंगू के 11 मामले निकले जबकि 21 संदिग्ध मामले थे.
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जल से पैदा होने वाली बैक्टीरियल डिसीज लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. यह संक्रमित जानवरों के यूरीन के माध्यम से फैल रहा है. इस बीमारी के लक्षण मांसपेशियों में दर्द और फीवर आना है.
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने से प्रतिराधात्मक दवाइयों का वितरण शुरू कर दिया था. इसके साथ ही लेप्टोस्पायरोसिस समेत जलजनित अन्य बीमारियों जैसे टायफाइड आदि के बारे में चेतावनी भी जारी की थी. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सोमवार को रैट फीवर से 3 लोगों की मौत हुई है. मंत्री ने कहा कि पीड़ित व्यक्तियों ने दुर्भाग्य से प्रतिरोधात्मक दवाई नहीं ली थी.

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हालांकि लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी ज्यादातर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक नहीं फैलती है और कुछ एंटीबॉयोटिक्स से इसका इलाज किया जा सकता है.
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केरल के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर मोहम्मद जावेद कहते हैं, पिछले सप्ताह में कोझिकोड और वयनाड में करीब 30 लोगों की मौत हुई है. राज्य के ये दोनों जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

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उन्होंने आगे बताया, राज्य में हर साल मॉनसून सीजन में लेप्टोस्पायरोसिस के मामले सामने आते हैं क्योंकि धान के खेत पानी से भर जाते हैं. इससे किसानों के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर कोई घाव या चोट लग जाए तो यह खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.
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लेकिन इस बार चिंता करने वाली बात ये है कि बीमारी की चपेट में आने वाले लोगों में दिखने वाले लक्षण जैसे पेचिस, यूरीन में ब्लड आना या स्किन पर ब्लीडिंग स्पॉट सामने नहीं आ रहे हैं.
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इस बार यह इन्फेक्शन फास्ट और प्रोग्रेसिव है, हाल ही में हुई मौतें महामारी के खतरे की तरफ इशारा कर रही हैं.
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केरल में टैबलेट के तौर पर प्रिवेंटिव मेडिसिन बांटी जा रही हैं जिसे एक महीने तक सप्ताह में एक बार लेना होता है.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लेप्टोस्पायरोसिस का इन्क्यूबेशन पीरियड 5 से 14 दिनों के बीच का होता है. इसके लक्षणों फ्लू की बीमारी के तरह लग सकते हैं लेकिन ये जानवेला साबित होते हैं.

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मनुष्यों में इस बीमारी का संक्रमण चोट लगने, घाव होने या फिर आंखों, नाक या मुंह के म्यूकस मेम्ब्रेन के जरिए भी हो सकता है.

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