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मिलिबैंड के बयान पर भारत को कड़ा ऐतराज

इंगलैंड के विदेशमंत्री डेविड मिलीबैंड के बयान पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मामले पर खुद इंगलैंड के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है मिलीबैंड के बयान पर कड़ा एतराज जताया है.

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aajtak.in
कार्तिकेय शर्मानई दिल्‍ली, 21 January 2009
मिलिबैंड के बयान पर भारत को कड़ा ऐतराज

इंगलैंड के विदेशमंत्री डेविड मिलीबैंड के बयान पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मामले पर खुद इंगलैंड के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है मिलीबैंड के बयान पर कड़ा एतराज जताया है. भारत के दौरे पर आए मिलबैंड ने अपने बयान में आतंकवाद के मसले को कश्मीर से जोड़ने की कोशिश की थी. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी कहा कि कश्मीर को लेकर ब्रिटिश विदेश मंत्री मिलिबैंड के बयान को ज्यादा तूल दिए जाने की ज़रूरत नहीं है.

'आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास', इंगलैंड के विदेश मंत्री अगर इस देहाती मिसरे का मतलब समझते तो शायद वो नहीं कहते जो वो कह गए. अब उनके कहे पर राजनयिक गलियारों में कोहराम मचा गया है. प्रधानमंत्री ने साफ साफ शब्दों में इंगलैंड को बता दिया है कि मिलीबैंड ने जिस तरह आतंकवाद के मुद्दे को कश्मीर मसले के समाधान से जोड़ने की कोशिश की है वो भारत को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं.

प्रधानमंत्री ने ब्राउन को लिखा है कि भारत को उम्मीद थी कि मिलीबैंड के दौरे से आतंकवाद के खिलाफ भारत की मुहिम को ताकत मिलेगी लेकन मिलीबैंड के बयानों ने इसका उल्टा असर दिखाया है. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के कहा है कि मिलीबैंड के मसले पर भारत को जो कुछ करना था कर चुका है.

सरकार का एतराज इस बात पर भी है कि मिलबैंड ने आतंकवाद पर अपने एजेंडे को भारत पर थोपने की कोशिश की. मिलीबैंड ने कहा था कि कश्मीर मसले के समाधान के बाद पाकिस्तान को अपने पश्चिमी सीमा पर तालीबान औऱ अलकायदा के खतरे से निपटने में मदद मिलेगी जो कि आतंकवाद का असली जड़ है. लेकिन मिलीबैंड ये भूल गए अल-कायदा और तालीबान जैसे अमेरिका और इंगलैंड के लिए खतरा हैं उसी तरह लश्कर औऱ जैश जैसे संगठन भारत के लिए औऱ इन संगठनों का किसी भी मसले से कोई लेना देना नहीं है.

हालांकि अब इंगलैंड ने अपने उच्‍चायुक्‍त के जरिए सफाई पेश की है कि मिलीबैंड का इरादा आतंकवाद को किसी मसले से जोड़कर उसे जायज ठहराने की नहीं थी. लेकिन भारत ने इस मसले को हल्के से लेने से इनकार कर दिया है और ब्रिटेन के वाणिज्य राज्य मंत्री पीटर मैंडेलसन की प्रधानमंत्री औऱ विदेशमंत्री से मुलाकात को लेकर भारत सरकार ने चुप्पी को इसी मसले के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है.

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